Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 20:1 लूका 20:2 लूका 20:3 लूका 20:4 लूका 20:5 लूका 20:6 लूका 20:7 लूका 20:8 लूका 20:9 लूका 20:10 लूका 20:11 लूका 20:12 लूका 20:13 लूका 20:14 लूका 20:15 लूका 20:16 लूका 20:17 लूका 20:18 लूका 20:19 लूका 20:20 लूका 20:21 लूका 20:22 लूका 20:23 लूका 20:24 लूका 20:25 लूका 20:26 लूका 20:27 लूका 20:28 लूका 20:29 लूका 20:30 लूका 20:31 लूका 20:32 लूका 20:33 लूका 20:34 लूका 20:35 लूका 20:36 लूका 20:37 लूका 20:38 लूका 20:39 लूका 20:40 लूका 20:41 लूका 20:42 लूका 20:43 लूका 20:44 लूका 20:45 लूका 20:46 लूका 20:47



मुख्य सार: दाख की बारी से निकलकर मार डालना—स्वामी का प्रश्न स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के वचन के साथ कैसी निष्ठा अपेक्षित है
लूका 20:15 का वाक्य एक चोट पैदा करने वाले दृश्य का भाग है जिसमें दाख की बारी का मालिक अपने अतिक्रमण करने वालों के प्रति न्याय कायम करने के लिए कठोर कदम उठाता है। यह प्रचलित कृषिगत दृश्य-उपमान रूप में यह दर्शाता है कि ईश्वर के स्वामीत्व के सामने मनुष्य की दखलंदाजी क्या परिणाम ला सकती है। यहां दाख की बारी का स्वामी एक पवित्र संपत्ति के इस हिस्से की सुरक्षा करते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लेता है, ताकि पवित्र कानून-प्राप्ति और मालिक की अधिकारिता स्पष्ट रहे।
साहित्यिक संदर्भ (लैंगिक-संदर्भ)
जो वाक्य “उसे दाख की बारी से बाहर निकालकर मार डाला” कहता है, यह गहन रूप से सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था के भीतर न्याय और मालिकाना अधिकार की कसौटी को उजागर करता है। यीशु का यह कथनOften पंक्ति-गत शिक्षण को लेकर है कि परमेश्वर के राज्य में स्वामित्व, जवाबदेही और सत्य के साथ व्यवहार आवश्यक है।
धार्मिक गूढ़ार्थ (Theological significance)
यह पद एक प्रतीकात्मक चेतावनी है: परमेश्वर के प्रभावी मालिकान के विरुद्ध असंवेदनशीलता और दखल की प्रतिक्रिया में जवाबदेही तय है। यह लेखन यह सूचित करता है कि धार्मिक नेतृत्व और जनता के लिए दी गई जिम्मेदारियों के प्रति निष्क्रियता और अवमानना परमेश्वर के हित में असमर्थता बनती है।
पवित्र शास्त्र के साथ संबंध
संकेत-टिप: निष्क्रियता या भ्रष्टाचार सेSubmission में दिए गए न्याय-संकेत इस पाठ में प्रमुख हैं—यह दर्शाता है कि परमेश्वर के संपत्ति पर नियंत्रण और सही उपयोग कितने आवश्यक हैं, और यह कि पवित्र धरोहर की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पड़ते हैं।
दर्शनीय प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पंक्ति दिखाती है कि परमेश्वर के राज्य के लिए वास्तविक जिम्मेदारी और श्रद्धा अनिवार्य है। दाख की बारी के मालिक का निर्णय इस बात की प्रतीकात्मकता है कि God’s rightful authority cannot be trifled with, और जब लोग धर्म के नाम पर ढुलमुल व्यवहार करते हैं, तो परिणामस्वरूुप न्याय की धार बनी रहती है।
15:15 के प्रकाश में 1-2 cross-reference
1) यशायाह-उद्धृतियों में भगवान के साथ मानव प्रतिक्रिया का मूल्यांकन; 2) मत्ती के धर्म-उद्धरणों में मालिक-कर्ता, खेत-स्वामी, और आत्म-बोध की शिक्षा; 3) मरकुस-लूका में भी प्रभु की वाणी और निर्भरता की परीक्षा के दृश्य। फिट बैठते हैं, क्योंकि ये क्रॉस-रेफरेंसेस पाठ की एकता में भक्तगण के लिए ठोस सीख देती हैं कि परमेश्वर के राज्य के लिए सही आचरण का मानदंड क्या है।
उद्धरण-नोट
यदि उपलब्ध हो, नीचे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन से खास वाक्य-उद्धरण शामिल किए जाते हैं।
नोट: इस पाठ में विशिष्ट उनके उद्धरण सीधे यहाँ नहीं दिए जा रहे, परन्तु इनके समरूप विचार-धाराएँ पाठ के वास्तविक अर्थ को समृद्ध करती हैं—यानी निष्ठा, उत्तरदायित्व और धार्मिक नेतृत्व की कसौटियाँ स्पष्ट हैं।