Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 20:1 लूका 20:2 लूका 20:3 लूका 20:4 लूका 20:5 लूका 20:6 लूका 20:7 लूका 20:8 लूका 20:9 लूका 20:10 लूका 20:11 लूका 20:12 लूका 20:13 लूका 20:14 लूका 20:15 लूका 20:16 लूका 20:17 लूका 20:18 लूका 20:19 लूका 20:20 लूका 20:21 लूका 20:22 लूका 20:23 लूका 20:24 लूका 20:25 लूका 20:26 लूका 20:27 लूका 20:28 लूका 20:29 लूका 20:30 लूका 20:31 लूका 20:32 लूका 20:33 लूका 20:34 लूका 20:35 लूका 20:36 लूका 20:37 लूका 20:38 लूका 20:39 लूका 20:40 लूका 20:41 लूका 20:42 लूका 20:43 लूका 20:44 लूका 20:45 लूका 20:46 लूका 20:47



क्यों यह बनावट मायने रखती है
लूका 20:10 में कहानी एक दासी से शुरू होती है जो संरक्षक किसान राजकुमार की इच्छा के अनुसार दाख की बारी के फलों का हिस्सा देने के लिए दास को भेजता है, पर किसानों ने उसे पीटकर खाली हाथ लौटा दिया। यह विन्यास केवल एक अलग घटना नहीं, बल्कि परमेश्वर के दायित्वों और मानवीय प्रतिरोध के बीच एक चयन की तस्वीर है। यह पद प्रभु यीशु के समय के इजरायल के किसान-शास्त्र के साथ एक नैतिक-पैमाने की परीक्षा है: किसान-प्रधान ने परमेश्वर के दायित्व का हिस्सा लेने के लिए दास भेजे, पर उनके दिल में अविश्वास, दुष्टता और प्रेम-रहित स्वार्थ था। इस दृष्टांत से हमें यह सिखाया जाता है कि परमेश्वर के आदेश और उल्लेखित धार्मिक जिम्मेदारियाँ कैसे मानव स्वार्थ के कारण दब जाती हैं, और कैसे परमेश्वर के दावत-आह्वान का सम्मान नहीं किया जाता।
原-context (मूल संदर्भ)
यह पद लूका के ईसाई समुदाय के लिए एक परिष्कृत दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यीशु ने यहूदियों के धार्मिक नेतृत्व के लिए एक चेतावनी के रूप में यह कहानी कही कि वे परमेश्वर के भेजे हुए दूतों, और अंततः पुत्र के प्रति अस्वीकारिता कैसे दिखाते हैं। कहानी में दाख की बारी किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो मालिक की संपत्ति पर अधिकार रखते हैं, पर मालिक की मांग का प्रतिकार करते हुए अपनी स्वार्थ-प्राधान्य दिखाते हैं।
मुख्य संदेश
इस दास्तान का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर की नियुक्तियाँ और उसकी दावतों का सम्मान न करना मनुष्य के लिए दायित्व-तोड़ व्यवहार को जन्म देता है। दास (या दूत) द्वारा दाख के हिस्से की मांग—यह परमेश्वर के राज्य की व्यवस्था का संकेत है, जिसे किसान-प्रधान अस्वीकार कर देते हैं। यीशु इसे ईश्वर के उत्तराधिकारी के प्रति अस्वीकृति की चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के उद्देश्य और उद्धारकार्य के लिए वे लोग जिम्मेदार हैं जो ईश्वर के संदेश और प्रेरणा को मानते नहीं।
बाइबिल थीम्स से संबंध
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
1) मत्ती 21:33-43 में प्रभु यीशु ने इसी प्रकार के पेड़ और बाग़ के किसानों के आचरण पर एक चेतावनी दी है कि परमेश्वर के संदेश को कैसे अस्वीकार किया गया—यह भी प्रभु का उत्तराधिकारी होने पर गहन विचार प्रस्तुत करता है।
2) मरकस 12:1-9 में इसी प्रकार के राज्य-प्रतीक में एक मालिक के दासों पर अत्याचार, और अंततः पुत्र के प्रति अभिशाप और उद्धार की आवश्यकता का चित्रण है।
3) ईसा-यशाय 5:1-7 की दाख की बारी की कल्पना में परमेश्वर अपने अधिकार-शासन का परीक्षण करते हैं कि क्या लोग उसे सम्मान देते हैं।
स्वीकृत उद्धरण (खास-खास)
क्योंकि यह पाठ public-domain टिप्पणी के सार को समाहित करता है, नीचे दिए गए कथनों का संक्षिप्त संदर्भ है:
मैथ्यू हेन्री (Matthew Henry) और अर्ल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) तथा एडम क्लार्क (Adam Clarke) से सीधे उद्धरण पंक्तियों के लिए आवश्यकतानुसार संकेत दिए गए हैं, यदि उपलब्ध हो:
उद्धृत पंक्ति/विचार: “यह दासों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करने और परमेश्वर के दायित्वों के प्रति समर्पण के बारे में बताता है।” नोट: पूर्ण वाक्य या पंक्ति यदि विशिष्ट रूप से उपलब्ध हो तो ही उद्धृत होगी; अन्यथा सार बोध के रूप में अभिव्यक्त किया गया है।
देवotional reflection
हमारे समय में यह सिंगारू द्रष्टान्त एक सरल सवाल छोड़ता है: क्या हम परमेश्वर की मांग और उसकी राज्य-उद्धार योजना के साथ सहयोग करते हैं या अपनी स्वार्थी चाह को प्रमुख मानते हैं? प्रभु की दावत पर हाँ कहना तभी संभव है जब हम अपने भीतर के स्वार्थ-आकर्षण को त्यागें और उसके प्रेम, धैर्य और न्याय की दिशा में चलें। इस पाठ से प्रेरित होकर, Pray-प्रेरणा यह है कि हम परमेश्वर की आह्वान को उसके उचित समय और तरीकों से मानने हेतु अपनी नियुक्तियाँ प्रतिबद्धता के साथ दें—खासकर जब वह हमें छोटे-से कार्य से बड़ा उद्धार दिखाते हैं।