Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 20:1 लूका 20:2 लूका 20:3 लूका 20:4 लूका 20:5 लूका 20:6 लूका 20:7 लूका 20:8 लूका 20:9 लूका 20:10 लूका 20:11 लूका 20:12 लूका 20:13 लूका 20:14 लूका 20:15 लूका 20:16 लूका 20:17 लूका 20:18 लूका 20:19 लूका 20:20 लूका 20:21 लूका 20:22 लूका 20:23 लूका 20:24 लूका 20:25 लूका 20:26 लूका 20:27 लूका 20:28 लूका 20:29 लूका 20:30 लूका 20:31 लूका 20:32 लूका 20:33 लूका 20:34 लूका 20:35 लूका 20:36 लूका 20:37 लूका 20:38 लूका 20:39 लूका 20:40 लूका 20:41 लूका 20:42 लूका 20:43 लूका 20:44 लूका 20:45 लूका 20:46 लूका 20:47



सूत्रार्थ: शास्त्रियों के बारे में सावधानी
यूहन्नी-भाषा में कहा जाए तो लूका 20:46 में यीशु ने शास्त्रियों के आकर्षण से सावधान रहने को कहा है—जो बाहर से ऊँचे वस्त्र पहनकर और सम्मान पाने की चाह रखते हैं, वे भीतर से अहंकार और स्वार्थ के चिह्न से भरे होते हैं। हर प्रकार के दिखावे परखना सीखना यहाँ प्रमुख संदेश है: धर्म में दिखावा नहीं, धर्म में विनय और पालन का सच्चा प्रेम होना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ यीशु के ईरोसलिम के मन्दिर-आकस्मिक जातियों के बीच के संवाद का भाग है। शास्त्री, फरीसी, और भ्रष्टाचार-रोधी समूह—इन सबकी आलोचना करते वक्त यीशु ने बाहरी आडंबर को चिह्नित किया। वे लोग जिन्हें "बड़े आसन" और "भोजन के प्रमुख स्थान" प्रिय लगते थे, वे दिखावे के पीछे वास्तविक निष्क्रियता दिखाते थे। यह संदेश तब भी लागू होता है जब लोग धार्मिक स्थानों और अवसरों में सामाजिक पद-प्रतिष्ठा को महत्व दें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
टिप्पणी और क्रॉस-रेफरेंसे
कई पुरानी पवित्र टिप्पणीकारों ने इस पाठ को समन्वित ढंग से समझाया है।
पक्का किया गया दृश्यात्मक संदर्भ (cross-references)
• मत्ती 23:5–7: बाहरी आडंबर के विरुद्ध यीशु की तीखी आलोचना। स्पष्ट संदेश: धार्मिकता दिल की है, दिखावे का नहीं।
• लूका 11:43: प्रमुख स्थानों की चाह से सामाजिक स्पर्धा का संकेत; ताने परन्तु आन्तरिक धर्म की कमी।
• मरकुस 12:38–40: शिक्षकों के स्वार्थी व्यवहार का उद्घाटन; सुख-सुविधाओं के पीछे वास्तविक धर्म पीछे छूट जाना।
संक्षिप्त विषयगत सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
धर्म यात्रा में हमें बाहरी सजावट से नहीं, दिल की नम्रता से परखना चाहिए। समुदाय में उच्च स्थान पाने की इच्छा को त्याग कर, निर्भीक सत्य और सेवाभाव में लगे रहने की प्रेरणा लें। जो लोग दिखावे से दूर रहते हैं, वे परमेश्वरीय कृपा के अवसरों को अधिक जीवन्त कर पाते हैं।