Old Testament
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लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



पद का संदर्भ: लूका 5:1
जब भीड़ उस पर गिर पड़ती थी, और परमेश्वर का वचन सुनती थी, और वह गन्नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ।
यथार्थ तात्पर्य और दृष्यगत सेटिंग
यथा पाठ बताता है, इसी समय चारों ओर जनसमुदाय एकत्र था जो धैर्यपूर्वक और उत्सुकता के साथ परमेश्वर के वचन को सुनना चाहते थे। यीशु झील के किनारे पर खड़े थे, जिसका दृश्य एक सांकेतिक मंच बन गया कि कानों और हृदयों को चुपके से तैयारी दी जाए ताकि परम सत्य प्रवेश करे। यह स्थान सामान्य व्यापार-स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसे अवसर का प्रतीक है जिसमें प्रभु की शिक्षा जनसमूह तक पहुँचती है, और वह ज्ञान जो उद्धार को जन्म देता है, उनके बीच फैलता है।
कृत्य, विश्वास और परमेश्वर का परिचय
यह वाक्य दर्शाता है कि परमेश्वर का वचन जीवंत रहता है और वह सुनने वालों के बीच आता है। ईश्वर का वचन लोगों के जीवन को प्रभावित करता है जब वे उसे सम्मान देकर सुनते हैं। यीशु की उपस्थिति और उसका निर्देश पाठकों में एक आस्था-स्थापना की प्रक्रिया शुरू करते हैं—ऐसी आस्था जो न केवल ज्ञान है, बल्कि क्रियान्वयन की ओर प्रेरित करती है।
महत्वपूर्ण शब्दों तथा imagery की स्पष्ट व्याख्या
अन्य पवित्र ग्रंथों से संबंध (क्रॉस-रेफरेंसेस)
• यूहन्ना 6:63— वचन आत्मा है और जीवित करता है; श्रोताओं के भीतर सत्य के संकल्प को उकसाता है।
• मरकुस 4:33-34— यीशु बहुधा सरल उपमाओं में teaching करते हैं ताकि पेचीदा सिद्धांत भी सामान्य लोगों तक पहुँच जाएँ।
व्याख्या: ये संदर्भ बताते हैं कि प्रभु का वचन कितनी बार सरल लेकिन प्रभावी रूप में सामने आता है, और समुदाय के साथ सहभागिता बढ़ाने के लिए उपमानों का उपयोग करता है।
आज के संदर्भ में applying (वर्तमान समय के लिए)
आज भी हम देखते हैं कि परमेश्वर का वचन तब प्रभावी होता है जब समुदाय उसे सुनने के लिए एकाग्र होता है—आध्यात्मिक सतहों के पार उन्नति संभव होती है। चर्चाओं, अध्ययन और प्रार्थना के दौरान, श्रोता न केवल ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि विश्वास के कार्यक्रमों—जैसे सेवकाई, नैतिक निर्णय, और नैतिक चरित्र—में परिवर्तन भी अनुभव करते हैं।]
संक्षिप्त समेकन
यह पाठ हमें बताता है कि ईश्वर का वचन जीवंत है और समुदाय के बीच प्रवाहित होता है जब लोग उसे ध्यान से सुनते और समझते हैं। गन्नेसरत की झील के किनारे खड़े यीशु से मिलने वाला संदेश प्रेरणादायक है—आस्था को कर्म में बदलने के लिए एक मार्ग देता है।
फुटनोट: ऐतिहासिक टिप्पणियाँ (सार केवल संकेत के लिए)
उद्धृत टिप्पणीकारों के विशिष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे नीचे उल्लेखित हैं:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट उद्धरण नीचे दिए जा सकते हैं, पर यहाँ मूल पाठ के अनुरूप संक्षेप में प्रयुक्त हैं: