Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



अर्थ का स्पष्ट उद्घोष
लूका 5:9 में कहा गया उद्देश्य यह है कि यहाँ प्रेरितों का मछुआरों के असाधारण जाल से अचम्भे में आना दर्शित होता है; वे अपने कार्य के नये अर्थ और परमेश्वर की योजना की गहराई को समझते हैं। यह पैगंबर-निष्ठा और परमेश्वर की कृपा से भय और सम्मान दोनों को उजागर करता है: मछुआरे जो साधारण व्यवसाय करते थे, वे परमपवित्र God के साथ अद्भुत सहभागिता के कारण अचम्भित हो उठते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यूहन्नी गाड़ी से अलग, लूका का विवरण स्पष्ट करता है कि यीशु ने शिष्यों को उनके कार्यस्थल पर बुलाया और उनके दैनिक उद्योग में एक नया उद्देश्य दिया। जाल में इतनी मछलियाँ मिलना एक दृश्य संकेत है कि परमेश्वर का राज्य उनके सामने आ रहा है और यह चमत्कार शिष्य provisionary रूप से उनके विश्वास को पुष्ट करता है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संबद्ध शास्त्रीय प्रकाश (संशोधित सार)
यहाँ से मार्गदर्शित विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के अक्सर उद्धृत विचारों के साथ संयुक्त रूप में समझे जाते हैं:
कई टिप्पणीकार इस सच को देखते हैं कि वास्तविक अचम्भा तब आता है जब शिष्य अपने मालिक के साथ मिलकर एक अद्भुत भागीदारी अनुभव करते हैं; यह प्रभु के राज की आदर्शता और शक्ति की उद्घोषणा है।
यदि आवश्यकता पड़े तो (कोई शब्द-संदर्भ नहीं उद्धृत पूर्ण पंक्तियाँ) ये बिंदु ही ध्यान में रखने योग्य हैं: परमेश्वर की कृपा और आशीष दैनिक जीवन में उपस्थित होती है; शिष्यों का तत्काल उत्तरनिष्ठ भाव विश्वास को गहराता है; और यह बुलावा अन्य लोगों के लिए भी एक प्रेरणा बनता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षेप संकेत
1) लूका 5:10— यीशु के बुलावे के साथ शिष्य भी बुलाए जाते हैं; यह दिखाता है कि चमत्कार केवल अभिभावक के स्वीकृति नहीं, बल्कि शिष्य-प्रवृत्ति के लिए भी है।
2) मत्ती 4:19— शिष्यों को प्रेरित करने की बुलाहट, daily life के क्षेत्रों में भी राजा का राज्य स्थापित होता है।
3) प्रेरित 1:8— पवित्र आत्मा की शक्ति से गवाह बनना, विविध स्थानों में चमत्कार और उद्धार का काम जारी रहता है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
यह पाठ हमें स्मरण दिलाता है कि ईश्वर की उपस्थिती और उनके बुलावे से जीवन के ordinary क्षण extraordinary बन जाते हैं।