Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



लूका 5:30 — परम मित्रता के मूल्य बनाम संतोष की परीक्षा
मुख्य interpretive point: यीशु के साथ चेलों के भोजन-संबंध ने धार्मिक नेताओं को चुनौती दी कि वे कैसे पवित्रता और पंथीय दृष्टिकोण के बीच निष्पक्षता बनाकर देखते हैं। नैतिक और लोक-रीति से ऊपर प्रेम की गतिविधियाँ स्पष्ट होती हैं, जब यीशु दया, बुलावा और पापियों के साथ सहअस्तित्व बनाते हैं।
कथानक-संदर्भ ( literary context )
लूका 5 अध्याय का आरम्भ यीशु के बुलावे, जकड़े मनुष्यों के साथ उनके व्यवहार और चेलों के लिए नई दृष्टि की स्थापना पर केंद्रित है। इस वायदे-भरे समारोह में कर-चुकाने वालों और पापियों की उपस्थिति, फरीसियों और शास्त्रियों के तीखे आलोचनात्मक प्रश्नों को जन्म देती है। अध्याय के पहले हिस्से में यीशु ने मछुआरों के साथ निकटता दिखाते हुए चमत्कार किए; अब वे उनके साथ भोजन करते हैं—यह समाज-निर्मित दूरी पर एक स्पष्ट क्रांति है।
तेज़े आधिकारिक विचार (theological significance)
1) यीशु का आह्वान निष्कपट प्रेम का संकेत है: उसने पापियों को भी अपने ऊपर बुलाया। भोजन में भागीदारी, कहीं-ना-कहीं, समाज के सत्ता-समझौते से ऊपर प्रेम को मान्यता देता है।
2) फरीसी-शास्त्री जो कानूनी शिष्टाचार और पवित्रता की दूरी में रहते हैं, वे यह मानना शुरू करते हैं कि धार्मिकता तब है जब लोग “स्वच्छ” समूहों में हों। यीशु का व्यवहार दर्शाता है कि आत्म-साक्षात्कार और पुनःनिर्गमांत भागीदारी की अर्हता किसी बाहरी हेर-फेर से नहीं, एक दिल की परिवर्तनशीलता से है।
3) यह दृश्य बताता है कि मसीह यहूदियों एवं गैर-यहूदियों की सीमाओं को पार कर, दया के नियम को लागू कर रहे हैं. यह समाज-व्यवस्था के अनुसार बहिष्कृत लोगों को भी परमेश्वर के राज्य में आमंत्रित करने का संकेत है।
किताबों के भीतर के संयोजन (cross-references) — संदर्भ-सम्बन्ध
ये संदर्भ दिखाते हैं कि प्रेम और करुणा के कार्य, कानून-नियमों के पार, मसीह के घटनाक्रम का केंद्र हैं।
प्रेक्षणीय प्रश्न (reflective questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद स्पष्ट करता है कि क्रिश्तीय आशीर्वाद और दया में शुद्धता का वास्तविक माप यह है कि हम किन्हीं बाहरी दूरी के बिना प्रेम के साथ दूसरों को स्वीकारते हैं। फरीसियों की कुड़कुड़ाहट यह दर्शाती है कि कर्म-प्रधान दृष्टि कभी भी दूसरों के सामने यीशु की दया को न्यौता नहीं दे सकती। यीशु का भोजन-सम्बन्ध एक स्पष्ट संकेत है: परमेश्वर का राज्य दया, क्षमा, और शामिल करने से बना है—यह हर वर्ग के लिए खुला है।
उद्धरण-आधार: यदि आवश्यक हो, तो मैथ्यू हेनरी, अलेक्टर बार्न्स या एडम क्लार्क के छोटे-छोटे शाब्दिक संकेत (exact quotes) उद्धृत किए जा सकते हैं; परन्तु यहाँ उद्देश्य उनके विचारों को उनके शब्दों के साथ नहीं, बल्कि उनकी प्रेरक व्याख्या से समेकित करना है।