Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



लूका 5:26 का स्पष्टार्थ और संदर्भ
यूँ तो यह पाठ लूका का वह दृश्य है जब यीशु ने चमत्कारिक रूप से एक व्यक्ति को पाप से मुक्त किया और लोगों के भीतर ईश्वर का सम्मान और भय उभरने लगे। वास्तविक संदर्भ यह है कि यीशु अपने शिष्यों के साथ गलील की नगरों में teaching और च miraculous के बीच में हैं, और उनके स्वतंत्र-स्वास्थ्य, उद्धार और पाप-बंधन के विषयों को पुष्ट करते हैं। तब भीड़ ने देखा कि परमेश्वर की महिमा एक बार फिर उद्घाटित हुई है, और वे अत्यंत भयभीत होकर कहने लगे कि “आज हमने अनोखी बातें देखी हैं।” यह वाक्य समूह के हर पाठक के हृदय में God के सामर्थ्य, दया और न्याय की गूंज छोड़ता है।
केंद्रीय अर्थ
इस वाक्य में दो प्रमुख संकेत मिलते हैं: पहला, चकित होना—भीड़ का अनुभव कि परमेश्वर की सत्ता वास्तविक और निकट है; दूसरा, दायरा—“आज हमने अनोखी बातें देखी हैं” का आशय यह कि जो किया गया, वह सामान्य नहीं, बल्कि परमेश्वर का नया कार्य है जो न्याय और उद्धार की दिशा में अग्रसर है। हर एक चमत्कार एक संकेत है कि ईश्वर अपने Kingdom के प्रवेश के संकेतक के रूप में सक्रिय है, और लोग उसे सही मायनों में पहचानने लगते हैं।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध मार्गदर्शक बिंदु
– हूबहू चमत्कारों के साथ यह पाठ यह दिखाता है कि यीशु के कार्य से लोगों का मानना βαθे रहता है कि परमेश्वर अब उनके बीच है।
– अन्य जगहों पर भी लोग इस प्रकार के अनुभव से प्रभावित दिखते हैं, जब ईश्वर का राज्य आ जाता है, और सम्मान के साथ यह प्रतिक्रिया होती है कि प्रस्तुत चमत्कार अनोखे हैं।
गतिविधिपूर्ण प्रत्यक्ष पाठ से जुड़ी पंक्तियाँ
यह अध्याय इस विचार को पुष्ट करता है कि ईश्वर के Kingdom के आगमन के संकेत अक्सर लोग समझ नहीं पाते क्योंकि वे मानवीय धारणाओं के भीतर रहते हैं। परन्तु जो देखता है, वह दयालु यीशु की उपलब्धता में उद्धार की आशा पाता है।
व्यावहारिक अनुसंधान
संक्षिप्त सार
इस वाक्य से स्पष्ट है कि यीशु के चमत्कार परमेश्वर के राज्य के सचेत संकेत हैं, जो लोगों के लिए एकजुटता, भय और पवित्रता को जगाते हैं। जनता की प्रतिक्रियाओं में विविधता है, परन्तु केंद्रीय संदेश वही है: परमेश्वर की महिमा अब प्रकट हो चुकी है, और मनुष्य को उसकी पहचान और उद्धार में भागीदार बनना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भित मार्ग)
– मरकुस 2:12 और मत्ती 9:8 में इसी प्रकार के चमत्कारिक प्रदर्शन लोगों के भय और महिमा की प्रतिक्रिया का उल्लेख है; इनमें भी ईश्वर के Kingdom के आगमन को संकेत किया गया है।
– प्रेरितों के काम 3:8-10 से ज्ञात होता है कि चमत्कार कैसे लोगों को यीशु की पहचान के लिए प्रेरित करते हैं और उसकी महिमा का उद्घोष करते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पेब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से):
Merely सम्मिलित उद्धरण नहीं; यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक उद्धरण उपलब्ध हों, तो वही यहाँ संक्षेप में उद्धृत होंगे: “...”, “...”, आदि।