Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



क्यों यह पद्य महत्वपूर्ण है
लूका 5:31 में यीशु का यह उत्तर बताता है कि उनका मिशन किस ओर केन्द्रित है: उपचार और पुनर्स्थापन। यह वचन हमें धर्म की बाह्यता के मुकाबले करुणा और ज़रूरतों पर ध्यान देने का आग्रह करता है।
प्रारम्भिक संदर्भ
यह वचन उस घटना के संदर्भ में आता है जब लेवी (मत्थी) ने करदाताओं और पापियों के साथ भोज किया। फरीसी और धर्मशास्त्रियों ने आलोचना की कि यीशु ऐसे लोगों के साथ बैठते हैं। उनकी आपत्ति पर यीशु ने कहा कि चिकित्सक स्वस्थों के लिए नहीं, बल्कि रोगियों के लिए होता है—अर्थात् वे आए हैं उन लोगों को पलटाने और जीवित करने के लिये जो आध्यात्मिक रूप से रोगग्रस्त हैं।
मुख्य संदेश
मुख्य बात यह है कि उद्धार का निमंत्रण उन लोगों के लिये है जिन्हें अपनी आवश्यकता का अहसास है। यीशु का दृष्टिकोण दोषारोपण नहीं, बल्कि सहायता है। यह पद्य आत्म-पराकाष्ठा से ऊपर उठकर दया और सहानुभूति पर ज़ोर देता है—ईश्वर की छुट्टी बाहरी धार्मिकता नहीं, बल्कि हृदय की खोज है।
समर्थक बाइबिलीय विषय
प्रासंगिक पारवर्ती श्लोक (Cross-references)
मत्ती 9:12–13 — वही तर्क मत्ती में भी मिलता है; परमेश्वर दया चाहते हैं न कि केवल बलिदान। यह लूका के वचन को पुष्टि करता है।
मरकुस 2:17 — यहाँ भी यीशु कहते हैं कि वे रोगियों के लिये आये हैं; यह उनके मिशन की लगातार तस्वीर खींचता है।
— पैगम्बरी में भी दीनों को मुक्ति देने और बंदियों को आज़ाद कराने का संदर्भ मिलता है; यीशु अपने काम में इन नबियों की अपूर्णता को पूरा करता है।
मॅथ्यू हैनरी, अल्बर्ट बार्न्स, आदम क्लार्क — संक्षिप्त उद्धरण और संदर्भ
मॅथ्यू हैनरी का विचार संक्षेप में यह है कि यीशु का उद्देश्य व्यावहारिक सहायता और आत्मिक उपचार है; "चिकित्सक..." जैसी टिप्पणियाँ वे उपयोगी समझते हैं। (सटीक उद्धरण उपलब्ध होने पर यहां रखा जा सकता है।)
अल्बर्ट बार्न्स ने इस शब्द का नैतिक और धार्मिक सन्दर्भ में विश्लेषण किया कि आलोचना का उत्तर दया के साथ दिया जाना चाहिए। आदम क्लार्क ने भी इसे मिशन के व्यापक उद्देश्य के रूप में देखा।
निष्कर्ष और ध्यानार्थ (आध्यात्मिक चिंतन)
लूका 5:31 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का प्रेम उन तक पहुँचना चाहता है जो स्वयं को कमजोर और पथभ्रष्ट मानते हैं। यह पद्य आलोचना की बजाय आत्म-परीक्षा और सेवा का निमंत्रण देता है। व्यक्तिगत रूप से यह पूछिए: क्या मैं दूसरों की कमज़ोरियों पर उँगली उठाता/उठाती हूँ या उनके साथ सहानुभूति और सहायता का हाथ बढ़ाता/बढ़ाती हूँ?
इस वचन से प्रोत्साहन लें कि सच्ची आयुश्चिकित्सा पहले आवश्यकता की पहचान से शुरु होती है—और प्रभु स्वयं वह चिकित्सक हैं जो हृदयों को चंगा करते हैं।