लूका 5:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यीशु ने उनको उत्तर दिया, “वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है।

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लूका 5:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह पद्य महत्वपूर्ण है

लूका 5:31 में यीशु का यह उत्तर बताता है कि उनका मिशन किस ओर केन्द्रित है: उपचार और पुनर्स्थापन। यह वचन हमें धर्म की बाह्यता के मुकाबले करुणा और ज़रूरतों पर ध्यान देने का आग्रह करता है।

प्रारम्भिक संदर्भ

यह वचन उस घटना के संदर्भ में आता है जब लेवी (मत्थी) ने करदाताओं और पापियों के साथ भोज किया। फरीसी और धर्मशास्त्रियों ने आलोचना की कि यीशु ऐसे लोगों के साथ बैठते हैं। उनकी आपत्ति पर यीशु ने कहा कि चिकित्सक स्वस्थों के लिए नहीं, बल्कि रोगियों के लिए होता है—अर्थात् वे आए हैं उन लोगों को पलटाने और जीवित करने के लिये जो आध्यात्मिक रूप से रोगग्रस्त हैं।

मुख्य संदेश

मुख्य बात यह है कि उद्धार का निमंत्रण उन लोगों के लिये है जिन्हें अपनी आवश्यकता का अहसास है। यीशु का दृष्टिकोण दोषारोपण नहीं, बल्कि सहायता है। यह पद्य आत्म-पराकाष्ठा से ऊपर उठकर दया और सहानुभूति पर ज़ोर देता है—ईश्वर की छुट्टी बाहरी धार्मिकता नहीं, बल्कि हृदय की खोज है।

समर्थक बाइबिलीय विषय

  • करुणा और मिसियॉन का विषय: ईश्वर का उद्धार उन्हें मिलता है जो अपनी कमी मानते हैं।
  • पराजितों के प्रति आमंत्रण: धर्म का उद्देश्य सामाजिक और आध्यात्मिक बहाली है, न कि केवल नियमों का पालन कराना।
  • बदली का संभावित मार्ग: पापियों के साथ भोज यीशु की वह नीति दर्शाती है जिससे वे परिवर्तन के लिये प्रेरित होते हैं।

प्रासंगिक पारवर्ती श्लोक (Cross-references)

मत्ती 9:12–13 — वही तर्क मत्ती में भी मिलता है; परमेश्वर दया चाहते हैं न कि केवल बलिदान। यह लूका के वचन को पुष्टि करता है।

मरकुस 2:17 — यहाँ भी यीशु कहते हैं कि वे रोगियों के लिये आये हैं; यह उनके मिशन की लगातार तस्वीर खींचता है।

— पैगम्बरी में भी दीनों को मुक्ति देने और बंदियों को आज़ाद कराने का संदर्भ मिलता है; यीशु अपने काम में इन नबियों की अपूर्णता को पूरा करता है।

मॅथ्यू हैनरी, अल्बर्ट बार्न्स, आदम क्लार्क — संक्षिप्त उद्धरण और संदर्भ

मॅथ्यू हैनरी का विचार संक्षेप में यह है कि यीशु का उद्देश्य व्यावहारिक सहायता और आत्मिक उपचार है; "चिकित्सक..." जैसी टिप्पणियाँ वे उपयोगी समझते हैं। (सटीक उद्धरण उपलब्ध होने पर यहां रखा जा सकता है।)

अल्बर्ट बार्न्स ने इस शब्द का नैतिक और धार्मिक सन्दर्भ में विश्लेषण किया कि आलोचना का उत्तर दया के साथ दिया जाना चाहिए। आदम क्लार्क ने भी इसे मिशन के व्यापक उद्देश्य के रूप में देखा।

निष्कर्ष और ध्यानार्थ (आध्यात्मिक चिंतन)

लूका 5:31 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का प्रेम उन तक पहुँचना चाहता है जो स्वयं को कमजोर और पथभ्रष्ट मानते हैं। यह पद्य आलोचना की बजाय आत्म-परीक्षा और सेवा का निमंत्रण देता है। व्यक्तिगत रूप से यह पूछिए: क्या मैं दूसरों की कमज़ोरियों पर उँगली उठाता/उठाती हूँ या उनके साथ सहानुभूति और सहायता का हाथ बढ़ाता/बढ़ाती हूँ?

इस वचन से प्रोत्साहन लें कि सच्ची आयुश्चिकित्सा पहले आवश्यकता की पहचान से शुरु होती है—और प्रभु स्वयं वह चिकित्सक हैं जो हृदयों को चंगा करते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 5:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मरकुस 2:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 2:17 (HINIRV) »
यीशु ने यह सुनकर, उनसे कहा, “भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ*।”

मत्ती 9:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 9:12 (HINIRV) »
यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “वैद्य भले-चंगों को नहीं परन्तु बीमारों के लिए आवश्यक है।

यिर्मयाह 8:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 8:22 (HINIRV) »
क्या गिलाद देश में कुछ बलसान की औषधि नहीं? क्या उसमें कोई वैद्य नहीं? यदि है, तो मेरे लोगों के घाव क्यों चंगे नहीं हुए?

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