Old Testament
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मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



मत्ती 9:12 पर टिप्पणी (HINIRV)
पद का संदर्भ: यीशु ने यहुखता के समाचार सुनकर कहा, "वैद्य भले-चंगों को नहीं परन्तु बीमारों के लिए आवश्यक है।" इस वाक्य में Jésus उन लोगों के बीच संवाद कर रहे हैं जो धार्मिक प्रतिष्ठान के नियमों के साथ समय-समय पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं। यह घटना तब घटती है जब लोग यीशु के प्रभाव को लेकर आशंकित हो रहे होते हैं और फिर भी वे अपने उच्च मानदंडों से मुक्त हो कर उसे देखते हैं। यीशु का उत्तर विनम्र लेकिन स्पष्ट है: उपचार और चंगा करने की आवश्यकता भीड़ के लिए आवश्यक है, न कि केवल ठोस धार्मिक नियंत्रण के लिए।
मुख्य भावार्थ
यह पद बताता है कि यीशु ने यह स्पष्ट किया कि उनके आह्वान का मूल उद्देश्य मानवता की जरूरतों को पूरा करना है—बीमार, पीड़ित और अधर्म से बंधे लोगों के लिए सुधार और जीवन का साक्षात्कार। चिकित्सा और चंगा करने की यह बात प्रथमिकताएँ नहीं, बल्कि प्रेम का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के राज्य में दया पहले आती है, औपचारिकता नहीं।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध Passages (संक्षेप)
1) लूका 5:31–32 में यीशु कहते हैं कि नहीं आएगा धर्मी नहीं, परंतु पापियों और दुखी लोगों को बुलाने के लिए। यह विचार समकालीन जिज्ञासाओं के साथ मेल खाता है कि ईश्वर का दाय नहीं रोगियों से है, बल्कि दयालुता से है।
2) मत्ती 9:35–38 में यीशु शहर-शहर में निर्गत करते हैं कि फसल काटने के लिए प्रार्थना करें, क्योंकि हर तरफ किसान कम हैं—यह दिखाता है कि बाज़ार में पीड़ा और जरूरतें कितनी बड़ी हैं।
3) मरकुस 2:17 का संदर्भ भी इस थीम की पुष्टि करता है—"जो स्वास्थ्य के लिए आया है, वे नाचीज़ रोगों की आवश्यकता के साथ हैं।" यह नहीं कि यीशु आबरू नहीं, बल्कि वह दिखाते हैं कि उद्धार तत्काल बाकी नहीं रहता—यह उपचार पहले आता है।
व्यावहारिक चिंतन
हम इस वाणी से सीखते हैं कि हमारा सामाजिक-धार्मिक ढांचा चाहे कितना भी ठोस क्यों न हो, करुणा और सहायता की सहभागिता पहले कदम हैं। अगर हम किसी के दर्द को देखते हैं और उसे सहायता देते हैं, तो हम यीशु के राज्य का संकेत बनते हैं। अपने जीवन में, प्रतिदिन की छोटी-छोटी बातों में—बच्चों, बहनों, पड़ोसियों, जरूरतमंदों के लिए समय, संसाधन या समर्थन—यह दिखाने का अवसर है कि ईश्वर का प्रेम जीवित है।
संक्षिप्त समापन
मत्ती 9:12 में यीशु ने स्पष्ट किया कि दया और उपचार के कार्य परमेश्वर के राज्य की प्रकृति हैं। धार्मिकता केवल नियमों से नहीं, बल्कि दया से सच होती है। उद्धार और चंगा हर उस व्यक्ति के लिए है जो मदद ढूंढता है—क्योंकि चोटिल मानवता ही वह जगह है जहां परमेश्वर की कृपा दिखाई देती है।
Cross-references
• लूका 5:31–32: ईश्वर के राज्य के लिए चंगा और माफ़ी की मांग—नियमों के पार जाकर दया का स्वागत।
• मत्ती 9:35–38: क्षेत्र का उद्धार और करुणा के लिए प्रार्थना की जरूरत; बड़े फसल की तस्वीर।
• मरकुस 2:17: उद्धार का सही क्रम—स्वास्थ्य से पहले आस्था और पश्चात् परिवर्तन।