Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



मत्ती 9:37 का संदर्भ और अर्थ
इस वाक्य में यीशु ने अपने चेलों के सामने वह सरल वास्तविकता रख दी जो हर सेवक की तपस्या है: ईश्वर के राज्य के लिए आवश्यक काम बहुत हैं, पर उसे पूरा करने वाले श्रमिणों की कमी है। इस संदर्भ में Jesus अपने प्रचार-कार्य के आरम्भ में यह संकेत देते हैं कि दख़ल देना और चकित करना पहले कदम हैं, पर असली आवश्यकता प्रेरितों के साथ मिलकर काम करना है। जब भी पौलुस-पूर्वक चर्च फैलने लगा, तब भी यही भविष्यवाणी सच थी—कर्मयोगी और प्रेरणा के साथ मिलकर ही गुणवत्तापूर्ण परिणाम मिलते हैं।
मुख्य अर्थ
ईश्वर के राज्य के भिड़ंत और दबाव के बीच, यीशु बताता है कि कार्य-बल की कमी एक रणनीतिक चिंता है, न कि एक शाष्कीय बाधा। किसान की तरह खेत भरा है, और मेहनत करने वाले नहीं मिलने पर फल प्राप्त नहीं होते। यह वाक्य प्रेरितों के लिए एक आह्वान है—प्रेरितों को अत्यावश्यक कर्मचारियों की तरफ ध्यान देना चाहिए और नवयुवा विश्वासियों को प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारना चाहिए.
दो-तीन प्रमुख थीम
संबद्ध पदयात्रा (Cross-references)
1) लूका 10:2 – प्रभु की फसल बहुत है, पर कर्मी कम हैं; इसलिए प्रार्थना करो कि प्रभु आयुधयुक्त श्रमिणों को भेजे। यह संदर्भ दर्शाता है कि प्रार्थना और प्रयास साथ चलते हैं।
2) मत्ती 28:19-20 – महान कमान के साथ चुनी हुई कर्मशाला ने गया, और यीशु ने उनके साथ रहने का वादा किया; यह स्पष्ट करता है कि मिशन के साथ ईश्वर का सहभागी होना अनिवार्य है।
3) यूहन्ना 4:35 – फसल के समय का जाप; यहाँ भी कहा गया है कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है; मेहनत और धैर्य दोनों जरूरी हैं।
व्यावहारिक विचार
आज की चर्चाओं में इसका उत्तरदायित्व है कि आप अपने समुदाय में विश्वासियों को प्रशिक्षण दें, युवा मित्रों/युवाओं को सेवा-कार्य के लिए प्रेरित करें, और संयुक्त प्रयासों से कार्य-बल बनाएं। छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करें—घर-घर जाकर संदेश पहुँचना, दयालु सेवा, और शैक्षणिक समूहों के द्वारा ज्ञान-विस्तार।
संक्षिप्त निष्कर्ष
फसल बहुत है, पर मजदूर कम होने के कारण प्रभाव सीमित हो जाते हैं। यीशु का यह कथन प्रेरितों के लिए एक स्पष्ट आह्वान है कि वे अपनी भूमिका में सक्रिय हों, विश्वास के साथ कर्म करें, और प्रभु की कृपा से अधिक श्रमिणों को बुलाते रहें ताकि राज्य का संदेश व्यापक रूप से फैल सके।
नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के प्रामाणिक उद्धरणों का संक्षिप्त उल्लेख केवल आवश्यकतानुसार दिया गया है।