Old Testament
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मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



मत्ती 9:22 का commentary (HINIRV)
दृश्य का आरम्भ: तुरंत प्रभाव वाले चंगाई का क्षण
यह गीत-उद्धरण हमारे प्रभु यीशु के साथ एक अनूठी निकटता को दर्शाता है। एक दुखी स्त्री जो वर्षों से रक्तस्राव से पीड़ित थी, उसकी आस्था ने उसे यीशु के पास तक पहुँचाया; उसने केवल एक छूने का हिमायती विश्वास रखा। यीशु का उत्तर “पुत्री धैर्य रख; तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है” इसे स्पष्ट करता है कि चंगेपन का स्रोत एक दृढ़ आस्था है, न कि केवल कृत्यान्वित क्रिया। उस क्षण में यीशु ने सामने आकर उसे देखा और उसकी श्रद्धा को स्वीकार किया।
ईश्वर और विश्वास पर पाठ की शिक्षा
यह पद यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर के Kingdom में विश्वास प्राथमिक प्रतिक्रिया है। यीशु ने मुड़कर माँगने वाली स्त्री पर नहीं, बल्कि उसकी आस्था पर प्रतिक्रिया दी। यह बताता है कि परमेश्वर की कृपा तब प्रकट होती है जब मनुष्य अपनी निर्भरता और विश्वास के साथ उसके पास आता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य संदर्भ जो सम्बन्ध बताते हैं
– मत्ती 8:10-13 में यीशु ने दीक्षित आस्था की प्रशंसा की है और कहा, “जो नहीं आये वे भी रंग में आएंगे”। यह दिखाता है कि विश्वास की सार्वभौमिकता परमेश्वर के स्वागत के लिए खुली है।
– मरकुस 5:34 और लूका 8:48-50 में भी इसी कहानी के भीतर संयोजन है—आस्था की शक्ति और यीशु की संवेदनशीलता।
— हिब्रियों 11:1 के संकेत भी इस प्रकार आस्था को स्पष्ट करते हैं कि विश्वास इच्छा नहीं, पर मानवीय अनुभवों पर प्रभाव डालता है।
आज के संदर्भ में अपनाने योग्य बातیں
यह पाठ हमें सिखाता है कि परमेश्वर के पास आने का रास्ता भरोसे के साथ है—चाहें परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों। हमारी प्रार्थना और विश्वास यीशु के पास पहुँचने के लिए मार्ग बनाते हैं। एक छोटे-से कदम पर भी ईश्वर की कृपा खुलती है, यदि हमारा हृदय पूरी तरह से निर्भर हो।
संक्षिप्त समेकन
यद्यपि संकटों के बीच धैर्य आवश्यक है, यीशु के पास आकर ही वास्तविक चंगाई मिलती है। यह passage आस्था के प्रति एक स्पष्ट स्मरण कराता है: विश्वास ही प्रेरक शक्ति है जो चंगाई का दरवाज़ा खोलती है।
पढ़ें और विचार करें: क्रॉस-रेफरेंसे
• मत्ती 8:10-13 — विश्वास की प्रशंसा और निम्न-विश्वास के साथ आना।
• मरकुस 5:34 — “धीरे-धीरे” और “भरोसा” के साथ चंगाई।
• लूका 8:48-50 — यीशु की पहचान और आस्था का महत्व।
नोट: इस प्रवचन में प्रकाश डालने वाले कुछ प्राचीन टिप्पणियाँ (जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) से समान विचार मिलते हैं, पर हमने इन्हें संक्षेप में समाहित किया है ताकि पाठ सीधे और सीधे समझ में आये। इनमें से किसी भी मौलिक पंक्तियों का पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है, केवल संदर्भ-जड़ित टिप्पणियाँ शामिल हैं।