Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



मत्ती 9:33 का संक्षिप्त अध्ययन
पद का तुरन्त संदर्भ प्रसंग: यीशु ने जिस तरह दुष्टात्माओं को निकालना शुरू किया, उसने लोगों के दिलों में विश्वास की नई रोशनी जगा दी। इस परंपरा में यह दृश्य आता है कि दुष्टात्मा निकालने के बाद जख्मी या अचेत अवस्था में गूंगा व्यक्ति भी बोल उठता है; भीड़ का अवाक रह जाना और “इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया” कहना यह बताता है कि यीशु की सत्ता सामान्य दवा-धर्म से बहुत ऊपर थी।
यह पाठ क्या बताता है—ईश्वर की सत्ता और विश्वास
इस पाठ से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का उद्धारक कार्य भीतर से परिवर्तनकारी है। दुष्टात्मा निकालना एक दृश्य है कि परमेश्वर का राज—जो मसीह के द्वारा आ रहा है—तत्काल और स्पष्ट प्रभाव डालता है: शारीरिक अस्थिरता भी चकित करने वाली चकमक बन जाती है जब उद्धारकर्ता पास होते हैं। स्पष्ट संकेत है कि ईश्वर का राज्य, उसकी कृपा और सत्ता द्वारा मानवीय स्थिति पर पूर्ण विजय पाती है।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और दृश्य चित्र
अनुसंगत शास्त्रीय प्रकाश
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes आदि के प्रकाशकों के साथ संगत सोच को भी रेखांकित करता है—यानी कि यीशु का राज्य पाखण्ड नहीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन है जिसे पहली बार के लोगों ने साफ-साफ देखा और पहचाना। (ध्यान दें: नीचे दी गई प्रत्यक्ष उद्धरण केवल संज्ञात्मक संदर्भ के तौर पर संकेतित हैं।)
पार्श्व संदर्भ (Cross-references)
1) मत्ती 4:23-24 — यीशु का प्रचार और चंगाई का व्यापक क्रम दर्शाता है कि राज्य परमेश्वर का आगमन है; इसमें दुष्टात्माओं का दमन और रोग-चिकित्सा एक साथ घटित होती हैं।
2) लूक 11:14-20 — यह स्पष्ट करता है कि दुष्टात्माओं को निकालना परमेश्वर के राज्य के संकेत हैं, और विरोधियों की आलोचना के बावजूद, प्रभु की सत्ता स्पष्ट रूप से प्रकट होती है।
3) लूक 18:27 — मानव के लिए संभव नहीं, पर परमेश्वर के लिये सब कुछ संभव है; यहाँ भी उद्धारकर्ता की शक्तिशाली कृपा पर जोर है।
आज के समय में आवेदन
हमारे दिन में भी उद्धारक यीशु ही वह सत्ता हैं जो हमारी परस्थितियों—आत्मिक उलझनों, भय, और शारीरिक-मानसिक पीड़ाओं—को बदल सकते हैं। विश्वास में आकर हम उसकी कृपा और शासन को स्वीकारें। यह पाठ यह सिखाता है कि ईमानदार आस्था के साथ जो नृत्य-हीन स्थितियाँ हों, वे भी ईश्वर के परमोत्कृष्ट कार्य के प्रकाश में पीछे हट सकती हैं।
प्रश्न-चिन्ह:
सार-सार: दुष्टात्मा का निष्कासन और गूंगे का बोलना—ये दोनों घटना बताती हैं कि प्रभु यीशु का राज्य भीतर से बदल डालने वाला है। यह दिखाता है कि ईश्वर की शक्ति पाखण्ड नहीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन है।