Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



reader-friendly overview
मत्ती 9:34 में फरीसियों का आरोप सामने आता है कि यीशु दुष्टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता है। यह दृश्य एक गम्भीर आध्यात्मिक परीक्षण है: लोग ऐसी चमत्कारी शक्ति की पहचान कैसे करते हैं और अपने मन के पूर्वाग्रह से कैसे जुड़ जाते हैं? यह पद यीशु की पहचान और उनकी शिक्षाओं के साथ सत्ता के स्रोत पर एक निर्णायक प्रश्न रखता है।
verse in its chapter
मत्ती 9 अध्याय में यीशु कीhealings, कॉलिंग ऑफ़ मैथ्यू, और नये जीवन के लिए बुलाहट का क्रम चलता है। 9:34 में प्रत्यक्ष वैचारिक विरोध सामने आता है: क्या यीशु दुष्टात्माओं को निकालकर उनका नियंत्रण चुनौती दे रहा है, या वास्तव में परमेश्वर की दिव्य सत्ता से यह संभव हो रहा है? इस पाठ में यह स्पष्ट कर देता है कि जहाँ लोगों के मानस में दुविधा और पूर्वाग्रह होते हैं, वहाँ सत्य की गवाही कठिन हो जाती है।
main spiritual lesson
मुख्य सीख यह है कि परमेश्वर की सत्ता के सामने ανθρώπο की आलोचना या विरोध भ्रमित कर सकता है—परन्तु वास्तविक पहचान उसी चीज से मिलती है जो उद्धार और नया जीवन देता है। फरीसियों की टिप्पणी दिखाती है कि आत्मिक दृष्टि की कमी से सच को गलत ढंग से पढ़ा जाता है। यीशु इस बात को रेखांकित करते हैं कि दुष्टात्माओं के सरदार के द्वारा दुष्टात्माओं को हटाने से उनका सत्ता-स्रोत स्पष्ट होता है—परमेश्वर का राज है, जो प्रेम, करुणा, और पाप-नया जीवन लाने की दिशा देता है।
cross-references with brief explanations
ये संदर्भ एक ही विचार को पुष्ट करते हैं: सत्य जब सामने आता है, तब उसे आत्म-आशंका या धार्मिक पूर्वाग्रह से नहीं तौला जाना चाहिए, बल्कि उसकी दिव्य स्रोत और परिणाम पर देखा जाना चाहिए।
careful application
1) बाइबल को अपने अनुभव के तराजू से नहीं बल्कि परमेश्वर के शब्द और क्रिया से समझें। 2) आलोचना के बजाय सत्य की पुष्टि के लिए प्रभु की उपस्थिति और शिक्षण को देखने का आग्रह रखें। 3) समुदाय में दया और करुणा से दूसरों की विविधताओं के बीच भी ईश्वर की शक्ति की गवाही दें।
concise summary
फरीसियों की टिप्पणी दिखाती है कि आध्यात्मिक दृष्टि अस्पष्ट हो सकती है जब आदमी अपने पूर्वाग्रह के साथ तथ्य को पढ़ता है। यीशु की करुणामय कार्य-शक्ति परमेश्वर के राज्य की पुष्टि है, न कि सत्तात्मक आलोचना। सच को देखते हुए जीवन-परिवर्तन का रास्ता खुलता है।
quotes from classic commentators (brief)
Adam Clarke ने कहा कि यीशु के चमत्कार उनके दुष्ट-प्रेरित होने के आरोपों के जवाब थे, न कि परमेश्वर-निन्दा; यह दृश्य धार्मिक विरोध और विपरीतता के बीच सत्य की पुष्टि का उदाहरण है।
Albert Barnes ने संकेत किया कि फरीसियों की यह रेखा दिखाती है कि बुरे के साथ अच्छा किया गया हो तो भी उसकी सत्ता को गलत ढंग से पढ़ना एक नैतिक समस्या है।
Matthew Henry ने निष्कर्ष निकाला कि जहाँ पर सत्य चुनौती में है, वहाँ पूछना चाहिए कि स्रोत क्या है, और परिणाम क्या दे रहा है—प्रभु की शक्ति से।
HINIRV exact quotes (brief): “यह तो दुष्टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता है।”