Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 9:1 मत्ती 9:2 मत्ती 9:3 मत्ती 9:4 मत्ती 9:5 मत्ती 9:6 मत्ती 9:7 मत्ती 9:8 मत्ती 9:9 मत्ती 9:10 मत्ती 9:11 मत्ती 9:12 मत्ती 9:13 मत्ती 9:14 मत्ती 9:15 मत्ती 9:16 मत्ती 9:17 मत्ती 9:18 मत्ती 9:19 मत्ती 9:20 मत्ती 9:21 मत्ती 9:22 मत्ती 9:23 मत्ती 9:24 मत्ती 9:25 मत्ती 9:26 मत्ती 9:27 मत्ती 9:28 मत्ती 9:29 मत्ती 9:30 मत्ती 9:31 मत्ती 9:32 मत्ती 9:33 मत्ती 9:34 मत्ती 9:35 मत्ती 9:36 मत्ती 9:37 मत्ती 9:38



संदेश का सीधा अर्थ
येशु ने मत्ती नामक टैक्स collecter को बुलाकर उसके पीछे चलने को कहा; इससे स्पष्ट है कि यीशु दया और आह्वान से भीतर आती सीटों को बदल देता है, सामाजिक मान्यताओं के विपरीत भीं स्वीकार कर सकता है और पात्रता नहीं देखता।
सं contextual पृष्ठभूमि
मैथ्यू 9:9 उस समय की घटनाओं को दर्शाता है जब यीशु शाहराह (कसीदा) के रास्ते पर चल रहे थे और प्रमुख पथ-चिह्नों से भरे समाज में एक कर-चुकाने वाले (चौकीदार) को बुलाते हैं। मत्ती नामक वहजिन वैश्य नहीं, बल्कि लेवी नामक कर वसूलकर्ता था, जो रोमावर्तक शासन के तहत असामाजिक माना जाता था। यीशु का बुलावा यह दिखाता है कि प्रभु का निमंत्रण सभी के लिए है, भले ही सामाजिक स्थिति कैसी भी हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
चयनित पंक्तियों से समझने योग्य विचार
अन्य सुदृढ़ संदर्भ और उनकी संक्षिप्त व्याख्या
1) यीशु का बुलावा और परिवर्तन: मत्ती के बाद के प्रकरण दिखाते हैं कि कैसे यीशु ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ते हैं जो सामाजिक रूप से ऊपर-नीचे हैं। यह संगति का प्रमुख पाठ है कि ईश्वर का राज्य अप्रत्याशित चयन से चलता है।
2) पाप और पुकार में सीमा नहीं: अन्य दूतों के साथ भी यीशु ऐसी पुकार करते हैं जो समाज के मानदंडों को चुनौती देती है, ताकि लोग पुनः स्थिर बन सकें।
3) तपस्या और समुदाय: यह घटना समुदाय के भीतर आस्थावानों को बुलाने और उनके लिए मार्ग बनाती है ताकि वे भी परमेश्वर की कृपा से जीवन में परिवर्तन अनुभव करें।
संक्षिप्त उपयोगी उद्धरण (हिन्&इ )
यह पाठ मॉडर्न टिप्पणीकारों के अनुसार सामाजिक हदबंदी को चुनौती देता है और प्रभु के बुलावे की सार्वभौमिकता दिखाता है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
इस वाक्य से सीख मिलती है कि ईश्वर के प्रेम के बुलावे में कोई जात-पाँत, आय-व्यवस्था या सामाजिक अस्वीकृति प्रतिबंध नहीं बनती। मत्ती ने तुरंत उत्तर देकर दिखा दिया कि सत्य के सामने भागीदारी सर्वोपरि है। हमें भी प्रेरित होना चाहिए कि हम अपने आचरण में दूसरों के लिए खुलापन और स्वागत दिखाएं, ताकि वे भी जीवन-परिवर्तन का अनुभव कर सकें।
पथ-पुष्टि क्रॉस-रेफरेंसेस
यूहन्ना 1:12-13: प्रभु के आह्वान पर विश्वास करने वाले को पुत्रत्व मिलना; प्रभु के पास आने की समय-संवेदीता।
लूका 5:27-32: यीशु ने अन्य कर-वसूलकों के साथ भी सम्बद्धता बनायी; निष्कासन से बाहर बुलावा और आस्था का आलोचनात्मक पुनर्मूल्यन।
मरकुस 2:15-17: सामाजिक-संयोजन से परे दया का संदेश; यीशु ने कहा कि उद्धारियों के लिए उपचार होता है, न कि स्वस्थों के लिए।