Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मरकुस 2:17 —Immediate setting
पद 2:17 में यीशु तब बोलते हैं जब वे मलाकखोरी, पापियों के साथ भोजन कर रहे थे और धार्मिक नेताओं ने यह कहा कि क्यों वे चॉंगी लोगों के साथ चलते हैं। यीशु कहते हैं, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ। इस वक्त वह अपने मिशन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हैं: ईश्वर का उद्धार प्रेम उन लोगाओं के लिए है जो आवश्यकतानुसार इलाज नहीं पाते, बल्कि आत्मिक रोग से पीड़ित हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में इस पाठ से क्या संकेत मिलता है
यह पाठ दिखाता है कि ईश्वर का दयालु उदारता-भाव नियमों से परे है। यीशु का आह्वान “बीमारों” के लिए है—यानी वे सभी जो पाप, दुर्बलता या अस्वीकृति के कारण आत्म-निर्भर नहीं बन पाते। ईश्वर के राज्य के लिए आह्वान धर्मभीरुओं के बजाय पापियों के लिए है, ताकि वे चंगाई और新 जीवन प्राप्त करें। यह भी स्पष्ट करता है कि विश्वास का मुख्य कर्म आस्था है जो उद्धार की ओर ले जाता है, न कि बाहरी रीति-रिवाज या सामाजिक स्थिति।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
“बीमारों” से आशय वह आध्यात्मिक रोग है जो व्यक्ति को परमेश्वर के वचन-आयाम से काट देता है—आत्मग्लानि, पाप की बाधा, चोरी और मृत्यु के डर। “धर्मियों” से आशय उन धार्मिक नेताओं से है जो नियमों के भीतर अपने मंच बना लेते हैं और दया को पीछे छोड़ देते हैं। यीशु का संदेश—उद्धार उनपर नहीं जो कानून का दावा करते हैं, बल्कि उन पर है जो क्षमा के लिए निर्भर रहते हैं।
अनुसंग पाठ (cross-references)
इन संदर्भों में एक समान ध्वनि है: परमेश्वर का लक्ष्य रुके हुए या सक्षम नहीं ठहरने वाले लोगों के लिए उद्धार है—जो आत्मिक रोग से ग्रस्त हैं, उन्हें चंगाई मिलती है जब वे विश्वास के द्वारा ईश्वर की कृपा को स्वीकारते हैं।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
संक्षेप निष्कर्ष
मरकुस 2:17 में यीशु स्पष्ट करते हैं कि उनका मिशन पापियों के लिए है—उद्धार का रास्ता पक्षपाती नियमों के भीतर नहीं, बल्कि दया और पश्चात्ताप के साथ खुलता है। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर का प्रेम क्रोध-रहित है, और जोंतु-भरे उद्धार के लिए वे ही आगे आते हैं जो अपने रोगी-हृदय को स्वीकार करते हैं।
उद्धरण संदर्भ: यह सार नवीनतम हिन्दी प्राथमिक अनुवाद HINIRV के अनुरूप है; नीचे उल्लेखित प्रसिद्ध हस्तलिखित टिप्पणीकारों के अनुमानित शब्द यदि मिले तो उद्धृत किए गए हैं:
“धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ” — Matthew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke का पूर्ण उद्धरण पाठ उपलब्ध नहीं है, पर उनके विचारों के अनुरूप यह पाठ उद्धार की दया को केंद्रित करता है।