Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 2:1 मरकुस 2:2 मरकुस 2:3 मरकुस 2:4 मरकुस 2:5 मरकुस 2:6 मरकुस 2:7 मरकुस 2:8 मरकुस 2:9 मरकुस 2:10 मरकुस 2:11 मरकुस 2:12 मरकुस 2:13 मरकुस 2:14 मरकुस 2:15 मरकुस 2:16 मरकुस 2:17 मरकुस 2:18 मरकुस 2:19 मरकुस 2:20 मरकुस 2:21 मरकुस 2:22 मरकुस 2:23 मरकुस 2:24 मरकुस 2:25 मरकुस 2:26 मरकुस 2:27 मरकुस 2:28



मुख्य व्याख्या बिंदु
मरकुस 2:19 में यीशु दुल्हे के बारात के समय दुल्हन के साथ रहने की तस्वीर से उपवास की परंपरा को नई प्रकाश में प्रस्तुत करते हैं। दूल्हा उनके बीच है, अतः उपवास का समय अभी नहीं है। यह घड़ी-भर का संकेत है कि ईश्वर का राज्य आ रहा है, और सामान्य धार्मिक रीति-रेवा किस प्रकार समय और परिस्थितियों के अनुसार उन्नत होता है। बारात की खुशियाँ और दुल्हे की उपस्थिति ऐसा संकेत देती है कि नया सोमवार-लौट आया है, जो पुरानी रीति-रिवाजों के बाहर एक नई अनुकंपा और अद्भुत आनंद का उद्घोष है।
कथात्मक परिप्रेक्ष्य (लिटरेरी संदर्भ)
यह वचन यीशु और उसके शिष्यों के बीच की स्थिति को उजागर करता है: जब वे लोग पाबंदी और उपवास के नियम के अनुसार चलते हैं, तब भी यीशु अपनी मिशन की नई दिशा दिखाते हैं। दुल्हा आने पर अतिथि उपवास नहीं करते, क्योंकि यह अवसर हर्ष और उत्साह का है। यह दृश्य मंदिर-धर्म के पूरक नहीं, बल्कि ईश्वर के राज्य के समय-सार को दर्शाता है—मिशन अभी सक्रिय है, उद्धार की गूंज अभी गूंज रही है, और यह खुशी का समय है।
धार्मिकSignificance ( theological significance )
ईश्वर के राज्य के आगमन से पुराने विधानों की भूमिका बदलती है। उपवास एक प्रतीक है व्यथा, विनम्रता और penitence का; परंतु दूल्हे की उपस्थिति उनके लिए उत्सव का आह्वान है। Jesus संकेत देते हैं कि पुराने नियम के कठोर पालन से राज्य के वास्तविक अभियान का अर्थ नहीं निकलता; क्योंकि ईश्वर का पुत्र यहाँ है और उसकी उपस्थिति में प्रमाणिकता और आनन्द दोनों आवश्यक हैं।
अन्य शास्त्रीय संदर्भों से कनेक्शन
परिचर्चा के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
येशु का यह उत्तर स्मरण कराता है कि ईश्वर के राज्य में परंपरागत नियमों की वहनीयता उनके उद्देश्य के अनुरूप जानी जाए। दुल्हे की उपस्थिति आनंद का संकेत है, अतः वास्तविक भटकन तब होती है जब दूल्हा मौजूद न हो। यह संदेश प्रकट करता है कि ईश्वर की कृपा से प्रेरित जीवन में, समय-समय पर उत्सव और नम्रता दोनों की भूमिका रहती है—पर पहले ही प्रेम और कृपा के संदर्भ में नीतियों को समझना आवश्यक है।
पंक्ति-सार/पूर्व-प्रेरणा टिप्पणी
माथ्यू महन (Matthew Henry) ने इस प्रकार समझाया है कि दुल्हा के आगमन पर उपवास नहीं, बल्कि आनंद होना चाहिए; यह यीशु के शासन के समय की विशिष्टता है। ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) के सामान्य टिप्पणी-स्वर में भी उसी दिशा के संकेत मिलते हैं: यह दृश्य ईश्वर के राज्य के अनुकूल समय-सार का संकेत है और पुराने नियमों के कठोर अभ्यास एक नवीन फलक में जुड़ते हैं।
नोट: यदि उपलब्ध हो, तो नीचे उद्धृत शब्द-रूप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से मिलते हैं, पर पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।