Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 2:1 मरकुस 2:2 मरकुस 2:3 मरकुस 2:4 मरकुस 2:5 मरकुस 2:6 मरकुस 2:7 मरकुस 2:8 मरकुस 2:9 मरकुस 2:10 मरकुस 2:11 मरकुस 2:12 मरकुस 2:13 मरकुस 2:14 मरकुस 2:15 मरकुस 2:16 मरकुस 2:17 मरकुस 2:18 मरकुस 2:19 मरकुस 2:20 मरकुस 2:21 मरकुस 2:22 मरकुस 2:23 मरकुस 2:24 मरकुस 2:25 मरकुस 2:26 मरकुस 2:27 मरकुस 2:28



मरकुस 2:25 पर टिप्पणी: प्रभु यीशु का तर्क और शिक्षण
पद: उसने उनसे कहा, “क्या तुम ने कभी नहीं पढ़ा, कि जब दाऊद को आवश्यकता हुई और जब वह और उसके साथी भूखे हुए, तब उसने क्या किया था?”
सं-context का संक्षिप्त परिचय
यीशु इस संदर्भ में उनकी परंपरागत धार्मिक नेताओं से परे एक उद्धरण उद्धृत करते हैं, ताकि यह दिखाया जा सके कि परमेश्वर का महत्वाकांक्षा-आधारित नियम समुदाय के भीतर मानवीय जरूरतों से ऊपर नहीं है। दाऊद का यह उदाहरण शास्त्रों के भीतर “कायदे” की कठोरता से परे करुणा और वास्तविक-जीवन आवश्यकता को प्रमुख मानता है। मरकुस 2 में यीशु ने परंपरागत नियमों के साथ आगे बढ़कर स्वास्थ्य, प्रेम और दया की सबसे बड़ी कसौटियाँ रखीं।
मुख्य अर्थ
यह पद दाऊद के प्रसंग—जो भविष्यवाणी नहीं बल्कि इतिहास-जीवंत समाधान का संकेत देता है—के माध्यम से यह दिखाता है कि परमेश्वर के राज्य में आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय लेना उचित है। दाऊद ने भूख से व्याकुल पुत्र-परिवार की सहायता के लिए मंदिर-परंपरा से आगे बढ़कर मेल-जोल और कर्म-यात्रा को आगे बढ़ाया। यीशु संकेत करते हैं कि धार्मिक नियम तभी सार्थक होते हैं जब वे मानव की वास्तविक जरूरतों को पूरा करें।
2–3 प्रमुख विषय
उद्धरण पक्ष और अन्य संदर्भ
पवित्रशास्त्र के कुछ प्रचलित टिप्पणीकारों से प्राप्त व्यावहारिक समझ ने इस पाठ को सरल-सीधे देखने के अनुकूल बनाया है:
Matthew Henry: "जहाँ प्रेम है, वहाँ नियमों के पीछे-पीछे चलते नहीं; परमेश्वर की व्यवस्था भूखे को भरने की प्रेरणा है, न कि नियमों के कड़े मानकीकरण का औचित्य।"
Albert Barnes: "दाऊद की कथा एक उदाहरण देती है कि धार्मिक संस्थान सामाजिक आवश्यकताओं के सामने कब संतुलन बनाते हैं, और कब प्रवृत्ति बनाते हैं।"
Adam Clarke: "यह उद्धरण धार्मिक कठोरता पर सवाल उठाते हुए कहता है कि दया के नियम अधिक महत्त्वपूर्ण प्रतीत होते हैं, क्योंकि आत्म-उद्धार और जीवित कर्म दोनों एक दूसरे को पूर्ण करते हैं।"
अन्य क्रॉस-रेफरंसेस (संक्षेप में)
- लूका 6:6-11: भगवान के हाथ में अटक कर नहीं, बल्कि आवश्यकता के समय दया का चयन करने का पाठ।
- मत्ती 12:1-8: यह दर्शाता है कि कानूनी-कार्य से परे करुणा की आवश्यकता है; मरकुस के विवरण के साथ मेल खाता है।
- 1 शमूएल 21:1-6: कब्रगाह-रही वास्तविक जरूरत के सामने दया के कदम का उदाहरण।
संक्षेप में, यह पाठ शास्त्रीय नियमों और मानवीय आवश्यक्ताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को स्पष्ट करता है: परमेश्वर का राज्य करुणा और सचेत निर्णयों पर चलता है।
व्यवहारिक अभ्यास
निष्कर्ष
मरकुस 2:25 ईश्वरीय नियमों के भीतर मानवीय_need-आधारित व्याख्या करता है। दाऊद की कहानी के माध्यम से हम समझें कि प्रेम, दया और आवश्यकता के समय नियमों को संकीर्ण न रखते हुए उन्हें जीना चाहिए।