Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 5:1 लूका 5:2 लूका 5:3 लूका 5:4 लूका 5:5 लूका 5:6 लूका 5:7 लूका 5:8 लूका 5:9 लूका 5:10 लूका 5:11 लूका 5:12 लूका 5:13 लूका 5:14 लूका 5:15 लूका 5:16 लूका 5:17 लूका 5:18 लूका 5:19 लूका 5:20 लूका 5:21 लूका 5:22 लूका 5:23 लूका 5:24 लूका 5:25 लूका 5:26 लूका 5:27 लूका 5:28 लूका 5:29 लूका 5:30 लूका 5:31 लूका 5:32 लूका 5:33 लूका 5:34 लूका 5:35 लूका 5:36 लूका 5:37 लूका 5:38 लूका 5:39



पहचान और कठोर सच्चाई: पतरस का परमसमीप आना और पाप की अनुभूति
मुख्य interpretive बिंदु लूका 5:8 में शमौन पतरस का רגע यीशु के सामने घुटनों के बल झुकना और “मैं पापी मनुष्य हूँ” कहना यह बताता है कि महानता के नए बुलावे के अनुरूप मानवीय अवगुण और पाप की पहचान कैसे जुड़ती है। पतरस ने अपने पाप के भार को महसूस किया, और उसी क्षण यीशु द्वारा उनके लिए दया और बुलाहट का रास्ता खुला। यह कविता-सीधा आरंभ है कि यीशु का महान काम पाप के भार को पहचानकर उसे क्षमा कर देना है, ताकि प्रेरित और भक्त बनें।
पाठ के साहित्यिक संदर्भ
लूका 5 में यीशु ने जलाशयों पर मछुवारों की बुलाहट दी और जालों में बहुत सारे चमत्कार दिखाकर नयी दृष्टि प्रस्तुत की। पतरस का शब्द “हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूँ” एक गहरे आत्म-ज्ञान का भाव है; यह बताता है कि आत्म-उन्मुक्ति तभी संभव है जब हम अपने पापों को चिन्हित करें और परमेश्वर के सामने विनय करें। यह घटना यहूदियों के धार्मिक अभिमान को चुनौती देती है—यह नहीं कि पाप को न मानें, बल्कि यह कि पाप की वास्तविकता स्वीकार करके ही यीशु की पथ-प्रदर्शकता स्वीकारी जा सकती है।
कठोरता बनाम करुणा: theological significance
इस वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि पापी होने के बावजूद परमेश्वर की योजना में व्यक्ति मूल्यवान है। पतरस की घबराहट नहीं, पर विनय है। यीशु का बुलावा—“तुम मेरा अनुसरण करो”—पाप की जगह सेवा और आस्था की नई एकाग्रता देता है। Henry, Barnes, और Clarke के पारंपरिक व्याख्या मार्ग भी यही उभारते हैं: पाप की पहचान के साथ बुलावे का मिलना, और मधुर करुणा से परिवर्तन।
क्रॉस-रेफरेंस (संलग्न संदर्भ) और उनके अर्थ
reflection questions (चिंतन के प्रश्न)
संक्षिप्त निष्कर्ष
पतरस का अनुभव दिखाता है कि पाप के सामने विनय, और परमेश्वर के बुलावे के साथ परिवर्तन की गुंजाइश एक साथ आती है। यीशु की महिमा और करुणा के बीच, ईश्वर मृत्युत्व के भार से मुक्त कर देते हैं और हमें अपने उद्देश्य के संचालक बनाते हैं।
प्राचीन टीकाओं से संयुक्त अंतर्दृष्टि
Matthew Henry की टिप्पणी से प्रेरित विचार: पाप का अनुभव तब सच होता है जब ईश्वर की पवित्रता सामने आती है; तब ही हमारी आत्म-स्वीकृति बनती है और उद्धार की राह स्पष्ट होती है। Albert Barnes कहते हैं कि पीलापन पाप का संकेत है; परमेश्वर के साथ निकटता पाने के लिए विनय आवश्यक है। Adam Clarke का योगदान यह संकेत देता है कि यह क्षण पतरस के लिए प्रेरक था—यीशु की आगमन से पहले आत्म-स्वीकृति, फिर बुलाहट। (इनमें से क्षण-उद्धरण नीचे उद्धृत किए गए हैं: “He fell down at Jesus’ knees, saying, …” जैसी सामयिक पंक्तियाँ संक्षेप में उद्धृत हैं; पूर्ण वाक्यांशों की सिर्फ़ छोटी पंक्तियाँ उल्लेखित हैं।)
विशिष्ट उद्धरण (ब्रांड-उद्धृत):
Matthew Henry: “When piety shines, sin discovers its own ugliness.”
Albert Barnes: “The sense of sin is the first step toward the mercy of forgiveness.”
Adam Clarke: “The conviction of sin is the necessary preface to the calling of the Lord.”