1 शमूएल 6:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब बेतशेमेश के लोग कहने लगे, “इस पवित्र परमेश्‍वर यहोवा के सामने कौन खड़ा रह सकता है? और वह हमारे पास से किस के पास चला जाए?”

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1 शमूएल 6:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का संक्षिप्त परिचय

1 शमूएल 6:20 वह क्षण है जब बेतशेमेश के लोग परमेश्वर के पवित्र ठहराव को देखकर भयभीत हो उठते हैं और यह समझना चाहते हैं कि भविष्य में परमेश्वर के स्थान से किसके पास जाना उचित होगा। इस प्रसंग में इजराइल के लोग यहोवा के चिह्न और उसकी पवित्रता के साथ मानवीय दृष्टिकोण के टकराव को अनुभव करते हैं—एक ओर उनकी आवश्यकता और दूसरी ओर परमेश्वर का आभास। यह वाक्य यह दिखाता है कि परमेश्वर की महिमा कितनी ऊँची है और वह कब किस प्रकार उनके बीच स्थिर रहता है, और मानव की दृष्टि कैसे उसे स्वीकार या अस्वीकार्य कर सकती है।

पद का पाठ और संदर्भ

तब बेतशेमेश के लोग कहने लगे, “इस पवित्र परमेश्‍वर यहोवा के सामने कौन खड़ा रह सकता है? और वह हमारे पास से किस के पास चला जाए?” (1 शमूएल 6:20, HINIRV)

पाठ का अध्याय-परिप्रेक्ष्य

उक्त अध्याय में, फिलिस्तीनी सेना से पराजय के बाद इस्राइलियों ने यहोवा की माउस-चिपी गश्त के प्रतीक के साथ एक मौक़ा खो दिया था। मन्ना-गायन तथा यहोवा के ark के साथ प्रतिक्रिया ने लोगों के हृदय में भय और विनय की लहर कर दी। ज्यों-ज्यों ark वापस लेने की योजना बनती है, लोग यह मान लेते हैं कि परमेश्वर का पवित्र स्थान वहाँ के मानदंडों के अनुसार माना जाएगा। परन्तु यहोवा की पवित्रता और मानव की धारणाओं के बीच का यह टकराव उनके सामने स्पष्ट हो उठता है—कौन उस परमेश्वर के सामने खड़ा हो सकता है, जो सर्वशक्तिमान है?

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

संदेश एक समान्य लेकिन गहन सवाल से शुरू होता है: परमेश्वर के सामने कितना सम्मान और सावधानी आवश्यक है? यहोवा यदि पवित्र है, तो उसका आबलम्बन और उसकी उपस्थिति यथोचित मान-सम्मान के बिना नहीं आ सकती। बेतशेमेश के लोग यह निष्कर्ष नहीं निकाल पाते कि परमेश्वर को सम्मान के साथ आने देना है, बल्कि वे अपनी आवश्यकता—Ark के साथ सुरक्षित लौटना—की इच्छा में उलझ जाते हैं। यह वचन यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का स्थान और उसकी पवित्रता मनुष्य की परवाह से ऊपर है, और हमें उसका सम्मान करते हुए ही उसकी मंजूरी चाहिए।

अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों के संयोगशास्त्र (संयोजन)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-domain टिप्पणी पर आधारित विचार समान रूप से इस घटना के पवित्रता-आश्रय के पाठ को उजागर करते हैं:

  • Henry के अनुसार, यह दृढ़ चेतावनी है कि परमेश्वर के सम्मुख आत्म-आत्म-स्वस्थ धर्म और विनय ही उचित आस्था को दर्शाते हैं; परमेश्वर के साथ किसी भी प्रकार के युक्ति-योजना बनाना उचित नहीं।
  • Barnes यह विचार रखते हैं कि परमेश्वर की पवित्रता से मिलना तभी संभव है जब व्यक्ति अपने intending साहस और आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखे; वरना वह भय में गिर सकता है।
  • Clarke यह बताने का प्रयास करते हैं कि यहोवा की पवित्रता मानव आत्म-खुशी से ऊपर है, अतः वह कैसे भी मानवीय योजना के अनुसार स्थान-अनुकूल नहीं हो सकता।

कई क्रॉस-रेफ़रेंस एवं उनके छोटे विवरण

कृपया ध्यान दें कि नीचे दी गई संदर्भ verse के पूर्ण पाठ नहीं हैं, केवल संक्षेप में संकेत दिए गए हैं:

  • चलो यह सोचें कि परमेश्वर कब, कहाँ और किस प्रकार उपस्थित रहता है—यहोशा 6:1-5 के साथ यह विचार मिलता है कि परमेश्वर की मार्गदर्शक वास्तविकता कितनी ऊँची है।
  • मसीही-विश्वास में विनय और भय दोनों आवश्यक हैं; रोम 11:33-36 के रंग में यह चेतावनी मिलती है कि परमेश्वर की मार्गदर्शनों को साधना में समझना चाहिए।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

- परमेश्वर के साथ हमारा दैनंदिन संबंध पवित्रता और विनय पर टिके होना चाहिए; अपनी योजनाओं में उसे सर्वोपरि मानना चाहिए।

- कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर के सामने ठहरना सिखाता है कि निष्ठा और निष्काम विश्वास से ही सच्ची सहायता मिलती है।

- जीवन के निर्णयों में “केवल Ark नहीं, बल्कि परमेश्वर का आशीर्वाद” चाहिए; इसलिए व्यवहार, विचार और उद्देश्य परमेश्वर के मानदंडों के अनुरूप हों।

छोटा-summary

1शमूएल 6:20 हमें दिखाता है कि परमेश्वर की पवित्रता मानव कल्पनाओं से परे है, और उसका सम्मान केवल हमारी जरूरतों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। यहोवा के सामने विनय के साथ आने से ही सत्य जीवन-संबंध बनते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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