Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



सीधे शब्दों में अर्थ
1 शमूएल 6:11 में बताया गया है कि यहोवा का सन्दूक, दूसरा सन्दूक, सोने के चूहों (पीतलियों) और अपनी गिलटियों की मूरतें गाड़ी पर रख दी गईं। यह घटना चरणबद्ध लौटाने के प्रक्रिया का हिस्सा है, जहाँ शर्मीला, लेकिन संकेतभरे ढंग से यहूदा के नगरों से परमेश्वर के सन्दूक के साथ ले जाया गया था ताकि उसे फिर से ईश्वर के केन्द्र (स्तंभित) में रखा जा सके।
पृष्ठभूमि संक्षेप
चौथा अध्याय में यहूदा के लोगों ने परमेश्वर के सन्दूक को अपने सैनिकों के साथ लड़ाई के लिए भेजा; परन्तु उसे पराजय मिली और यह सन्दूक फिलistinियों के हाथ गया। उनके देवताओं के लिए यह एक भयानक आश्चर्य था। इस पंक्ति में यह स्पष्ट होता है कि यहोवा के सन्दूक के साथ अन्य सामान भी लौटाए गए, ताकि यह संकेत हो कि परमेश्वर स्वयं से नियंत्रित है, न कि किसी चमत्कारिक अयाचित वस्तुओं से।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- यहोवा के सन्दुक के साथ “दूसरा सन्दूक” रखना प्रतीक है कि भगवान अपने निवासस्थान से बाहर नहीं हैं, और भक्तों के लिए यह एक चेतावनी है कि किसी भी चीज को सीधे देवत्व के समान नहीं माना जाना चाहिए।
- सोने के चूहों और गिलटियों की मूरतें घरेलू वैभव नहीं, बल्कि उन दिनों की अस्थिरताओं और आशाओं के प्रतीक थे। इनको गाड़ी पर रखकर लौटाने से यह निश्चित किया गया कि सन्तुलित दायित्व परमेश्वर पर ही है, न कि इन वस्तुओं पर।
मुख्य विचार
क्रॉस-रेफरंस (संक्षिप्त संदर्भ-व्याख्या)
रेखांकन और व्यावहारिक निष्कर्ष
यदि हम अपने जीवन के किसी भी “सन्दूक” या चिह्नों के साथ नाजायज अभिमान करें, तो यहोवा की पवित्रता से भटकाने वाला हो सकता है। सही मार्ग यही है कि हम परमेश्वर को पहले रखें, भक्ति और निष्ठा से, न कि वस्तुओं या प्रतीकों से।
संक्षिप्त डोर्योपर्याय – यह पंक्ति सन्दूक के लौटाने की प्रक्रिया में एक शिक्षण देती है: परमेश्वर की महिमा सर्वोच्च है; समर्पण और सत्यनिष्ठा से ही वास्तविक आशीष मिलती है।
गम्भीर टिप्पणी: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायर्ड उद्धरणों के संभावित संदर्भ उपलब्ध हैं परन्तु यहाँ हमने मूल-शब्दों में सार्वजनिक-domain विचारों को समेकित किया है।