Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31

पद का क्षणिक दृश्य और उसके पीछे का संकेत — 1 शमूएल 6:12
तब गायों ने बेतशेमेश का सीधा मार्ग लिया; वे सड़क ही सड़क रंभाती हुई चली गईं, और न दाहिने मुड़ीं और न बायें; और पलिश्तियों के सरदार उनके पीछे-पीछे बेतशेमेश की सीमा तक गए।
तत्समय का नजारा और ईश्वर के प्रति विश्वास का संकेत
यह वाक्य उन घटनाओं की सामान्यता में कुछ विशिष्ट संकेत देता है। पालिश्तियों के साथ युद्ध के बाद यह भी एक संकेत है कि परमेश्वर ने शत्रु के हृदय में हिलाहट ला दी है; वे अपने रास्ते पर बिना भ्रम के चल पड़े, मानो परमेश्वर ने उनके कदमों को एक ठिकाने के लिए निर्धारित कर दिया हो। यह दृश्य युवराज, दाश्त, या लोक-संस्कृति के शांतिपूर्ण मार्ग की अपेक्षा-सीधी, बेरोक-टकर चलना है—एक ऐसे समय में जब लोग यह मानते हैं कि विजय के बाद पथ-चयन में अलगाव होता है।यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर के आदेशों के पालन में जीवन-यात्रा सरल बन सकती है, भले ही परिस्थितियाँ जटिल क्यों न हों।
महत्वपूर्ण शब्द-चित्र और उनके अर्थ
अनुयायियों के लिए संदर्भित बिन्दु
1. परमेश्वर की आशीष के बाद भी मानव-यात्रा एक स्पष्ट मार्ग के साथ चलती है; विश्वास के साथ कदम उठाने से बली-आवाज़ों के बीच भी शांति मिलती है।
2. यह दृश्य यह संकेत देता है कि परमेश्वर युद्धों के बाद भी मानवीय कदमों की दिशा तय करते हैं—जो लोग उनके आदेशों पर चलते हैं, वे सुरक्षित सीमा तक पहुँचते हैं।
3. पलिश्तियों की उपस्थिति और पीछे-पीछे चलना यह दर्शाता है कि दुष्ट शक्तियाँ भी परमेश्वर के नियंत्रण के नीचे हैं, जब लोग उसकी इच्छा के अनुसार चलते हैं।
अनुबंधित क्रॉस-रेफरेंसेज
• अन्य धार्मिक अनुभव दिखाते हैं कि परमेश्वर मार्गदर्शन देता है और भय के समय भी विश्वास को बनाए रखता है (उक्त घटनाओं के समान सन्दर्भों में—यात्रा, मार्गदर्शन, और सुरक्षा के संकेत)।
• एक समान कथा-प्रकार में यह दिखाया गया है कि ईश्वर अपने लोगों को मार्ग दिखाते हैं, भले ही वे बाहरी युद्ध से लौट रहे हों।
आज के जीवन में मार्गदर्शन और अनुप्रयोग
नोट: यह टिप्पणी 1 शमूएल 6:12 के भीतर दिखे संकेतों का संयोजन है—परिमार्जन के साथ: परमेश्वर की सत्ता, पथ-निर्देशन, और कठिनाई के बीच शांति का संदेश। यदि आप चाहें, तो मैं इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की संक्षिप्त-सी उद्धरण-रचना दे सकता हूँ, साथ ही उनके स्पष्ट विचारों को 2-3 पंक्तियों में समेकित कर दूँ।