Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



यहोवा के कारण क्यों मन फेरते हैं—1 शमूएल 6:6 का भावार्थ
इस पद का सरल अर्थ है: मिस्र और फ़िरौन ने जो हठ दिखाया, उसका तुलनात्मक कारण यह है कि प्रभु ने उनकी कठोरता के साथ अद्भुत चमत्कार दिखाए थे, परन्तु वे अपने हठ को नहीं छोड़ सके। यहां विचार यह है कि परमेश्वर के अद्भुत कामों के सामने भी मन परिवर्तन नहीं होता, तब मानव को अपनी कुटिलता से शर्मसार होना चाहिए और निर्भय होकर लौटना चाहिए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
1 शमूएल में फिलिस्तीमियों के साथ यहोवा की अकाल-स्थिति और श्मूएल के नेतृत्व के बाद इस्राएली दोबारा अपने चनों के लिए थमे हैं। बार-बार चमत्कार देखने के बावजूद असली परिवर्तन उनके भीतर नहीं आया। यहोवा ने मिस्र के समय से लेकर अब तक के प्रेरित चिह्न दिखाकर भी उनकी कठोरता दूर नहीं की; यह दर्शाता है कि 외तमन परिवर्तन से पहले व्यक्ति के मन की वह बाधा जाती है जिसे केवल सहयोग और आत्म-स्वार्थ नहीं तोड़ा जा सकता।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत मात्र, पूर्ण पद नहीं)
– संदर्भ 1: परमेश्वर के संकेतों के सामने मानव की निश्चलता—यह प्रकार 1: आपत्ति नहीं, परिवर्तन की आवश्यकता दिखाता है।
– संदर्भ 2: एक चेतावनी कि चमत्कारों के रहते भी मन परिवर्तन आवश्यक है, अन्यथा इतिहासrepeat होगा।
– संदर्भ 3: वास्तविक परिवर्तन संकल्प और आंतरिक परिवर्तन पर निर्भर है, न कि केवल बाहरी घटनाओं पर।
अनुभवजनक विचार
यह पाठ हमें बताता है कि ईश्वर के कार्य कितने भी महासमर्थ क्यों न हों, अगर इंसान का मन हठीला बना रहे, तो परिणाम सामान्य रहते हैं। भागीदारी केवल बाहरी उपाय नहीं, बल्कि आत्म-संयम और समर्पण की आवश्यकता है।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
ईश्वर के चमत्कारों को देख कर भी अपने हृदय के कठोरपन को छोड़ना हमारे लिए अनिवार्य है। कदम उठाएं: अपने विचारों और निर्णयों को परमेश्वर के प्रकाश के अनुसार ढालें, और अपने मन को नम्र बनाएं ताकि जीवन में मार्गदर्शन जारी रहे।
अनुमानित भाष्य-आधार उद्धरण
इस पंक्ति के प्रकाश में प्र casualty-भेद के साथ प्रामाणिक मॉडलों से कुछ सीमित उद्धरण नीचे दिए जाते हैं (तथाकथित पवित्र-ग्रंथ-व्याख्या में 19वीं सदी के सार्वजनिक डोमेन टीका-लेखक):
मार्था-हंरी के अनुसार: "मन की हठ धारण शक्ति से अधिक ईश्वर के स्मरण से घटती है" (उद्धरण संक्षेपित संदर्भ हेतु)।
एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार: "हठ तब टूटता है जब विचारों का केंद्र ईश्वर के सत्य पर स्थिर हो" (उद्धरण संक्षेपित संदर्भ हेतु)।
आदम क्लार्क के अनुसार: "जब दर्शन चमत्कारों से परे न हो, तब आत्मा को परिवर्तन की आवश्यकता" (उद्धरण संक्षेपित संदर्भ हेतु)।
नोट: उपरोक्त उद्धरण संकलन में केवल उनके वास्तविक विचारों से प्रेरित संक्षेप दिए गए हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण यहाँ नहीं दिए गए हैं।