Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



सीधे अर्थ का उद्घाटन
1 शमूएल 6:4 में फिलस्तियों के भूतपूर्व समझौते और क्षतिपूर्ति के नियम स्पष्ट हैं: उन्हें यह तय करना पड़ा कि पलिश्ती सरदारों के अनुसार सोने की दक्षिण-पार्थी पाँच गिल्टियाँ और पाँच चूहे चढ़ाने चाहिए, क्योंकि वे लोग एक ही रोग से ग्रस्त थे। यह हिस्सा दर्शाता है कि प्रभुत्व से चूकने के पश्चात् नुकसान के लिए मानक दान कैसे निर्धारित होते हैं और यह दर्शाता है कि यह रोग उनके समुदाय की आपसी बीमारी का प्रतीक था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नियत समय में ईश्वर के चिह्न के रूप में पलिश्ती यह विचार करते हैं कि उनकी दुर्घटना का कारण ईश्वर की क्रोध था और उन्होंने यह व्यवस्था बनाई कि उनसे जुड़ी हानि और रोग का प्रतिफल उनके Աստगूतों के पवित्र चिह्नों के बराबर दान के द्वारा चुकाया जाए। इस प्रकरण का मुख्य लक्ष्य नीति-निर्धारण है: संकट के समय भी सत्य, पवित्रता और सामुदायिक जवाबदेही बनी रहे।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
2-3 सम्बन्धित पद और उनका छोटा अर्थ
· अन्य स्थानों में प्रकार-कार्य का सिद्धांत दिखता है कि दान और प्रतिफल के बिना अस्थिर परिणाम आते हैं; दान का मूल्य और विधि स्पष्ट होनी चाहिए।
· रोग और शारीरिक हानि को Θεός के क्रोध के संकेत के रूप में देखा गया, यह समझाने में मदद करता है कि किस प्रकार पाप या अविश्वास का सामाजिक परिणाम सामने आता है।
मुख्य विषयगत बिंदु
व्यवहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में संकट आने पर उचित दान-चुकौती और पारदर्शी उपाय आवश्यक होते हैं ताकि समुदाय एक साथ आगे बढ़ सके। यह स्मरण दे कि प्रभु के साथ संबंध में सत्य और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है; बिना स्पष्ट नीति के नुकसान न्यूनतम नहीं होते।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ के व्याख्या के साथ)
· यूं ही कुछ संदर्भ जहां पात्रता और दान-प्रतिफल के नियम दिखते हैं, यह बताता है कि आध्यात्मिक संकट में भी व्यवस्थितlösung निर्धारण आवश्यक है।
· कुछ अन्य भागों में रोग और आपदा का उद्देश्य समाज-नियमन से जुड़ा दिखता है, जिससे चरित्र और भक्ति की परीक्षा स्पष्ट होती है।
संक्षेप सार: इस verse में दान और दायित्व की स्पष्ट व्यवस्था दिखाई देती है ताकि समुदाय संकट के समय भी एकजुट रहे और सम्मानजनक तरीके से समाधान खोजे जाएं।