Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 6:17 का महत्व
यह वाक्य उन वस्तुओं के बारे में है जिन्हें पलिश्तियों ने यहोवा को हानि पहुँचाने के लिए दोषबलि के रूप में लिया था और फिर वे वापस करने की कोशिश कर रहे थे। सोने की गिलटियाँ उनके मानव-तुल्य अहंकार और भय की कथा बुनती हैं: भौतिक संपत्ति में भी उसके उपयोग का मूल्यांकन होता है कि वह परमेश्वर की महिमा के लिए है या अपनी ही सुरक्षा-चर्च ऊपर उठाने के लिए। इस आयतन में यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की पवित्रता और उसकी इच्छा के अनुरूप व्यवस्था से बाहर आते ही संपत्ति भी हानिकारक हो सकती है।
हार्दिक संदर्भ: मूल संदर्भ और संदेश
दरअसल, यह सूची पलिश्तियों द्वारा यहोवा के मनोहारी स्थान, मनोरथ या आशीष के बदले लिए गए दानों के दायरे में है। वे यह मानते थे कि गम्भीरता से लौटाई गई धातुएँ और आभूषण यहोवा के कृपा-आकांक्षाओं को शांत कर देंगे, जबकि असल में यह उनकी चतुराई और भय से प्रेरित था। इस अध्याय के माध्यम से लेखक यह दिखाता है कि धर्म-व्यवहार और वैध अनुशासन के बाहर का लाभ-हानि का गणित परमेश्वर के सिंहासन के सामने भिन्न मूल्य नहीं रखता।
मुख्य संदेश
यहVerse यह सिखाता है कि परमेश्वर के साथ सही रिश्ते में भौतिक संपत्ति का सही स्थान क्या है। पलिश्तियों ने भले ही इसे वापस भेज दिया, परंतु यह भी स्पष्ट है कि उनके द्वारा दिया गया दान-स्वरूप हिस्सा अभी भी एक चेतावनी संकेत था: धर्म-कर्म में चोर-जहज और भय-उपजाऊँ को न थामें, बल्कि सचमुच यहोवा के योग्य सम्मान के साथ पुनः प्रस्तुत करें।
थीशियों और थीम्स
- पाप के परिणामस्वरूप बचे वस्त्र और धातुएँ: ये वस्तुएँ भी पाप-निर्माण के प्रतीक बन जाती हैं जब उनका उद्देश्य केवल सुरक्षा या रुचि हो।
- सेवक-भाव और पूर्णता: यह दिखाता है कि परमेश्वर के समक्ष विवेकपूर्ण, संपूर्ण समर्पण चाहिए—कई बार यह घटिया आश्वासन नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन को मांगता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके छोटे संबंध
पवित्र अनुस्मारक और चिंतन
हममें से प्रत्येक के जीवन में अक्सर ऐसी चित्त-स्थिति आती है जहाँ हम देखना चाहते हैं कि हमारे दान, समय या संपत्ति परमेश्वर के ऊपर कब तक निर्भर और कब तक नियंत्रण में हैं। इस verse से सीख मिलती है कि परमेश्वर के साथ सही संबंध बनाए रखने के लिए हमें अपनी सामग्री-प्राप्तियाँ उसे समर्पित कर देनी चाहिए, न कि उनको हथियार बनाकर भय या आत्म-निर्भरता के साथantie अपनी सुरक्षा ठहरानी चाहिए।
संदर्भ-आधार: संक्षिप्त टिप्पणी
1) मैथ्यू हेनरी: यह दर्शाता है कि वस्तुओं का यह हानि-भरना एक सामाजिक-धार्मिक चेतावनी है कि पुरानी स्मृतियाँ और आचार-विचार परमेश्वर के दरबार में सही स्थान बनाते हैं।
2) अलेक्जेंडर बार्न्स: दान-सम्पादन में भावना और उद्देश्य दोनों महत्त्वपूर्ण हैं; यह पथ-भ्रष्टता से बचने के लिए प्रोत्साहन देता है कि इरादे शुद्ध हों।
3) एडम क्लार्क: यह दिखाता है कि परमेश्वर से दूरी बनाने के प्रयास अस्थिर और नुकसानदेह हो सकते हैं जब आत्मा-विश्वास कमजोर हो।
छोटी विचार-वृत्ति
यहाँ एक छोटा विचर है: प्रभु के लिए हमारा आराधन और समर्पण तब ही फल देता है जब हम अपनी आशाओं और संपत्ति को उसकी महिमा के लिए समर्पित करते हैं।