Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 11:1 का संक्षिप्त अर्थ
इस पदकथन में अम्मोनी नाहाश ने Gilad के क्षेत्र पर आक्रमण कर डेरा डाला और याबेश के लोगों ने उसे देखकर सुरक्षा के बदले उन्हें वाचा बाँध लेने की पेशकश की—यानी वे अपनी अधीनता स्वीकार कर सामुदायिक रक्षा के लिए उसे छोड़ने को तैयार हुए।
पृष्ठभूमि
युद्ध-वृत्ति के समय याबेश-गिलाद एक महत्वपूर्ण स्थल था। नाहाश की चढ़ाई का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रभाव स्थापित करना था, ताकि आगे अन्य स्थानों पर भी दबदबा बने। इस समय इजराईली राष्ट्र के शासक की अवस्था स्पष्ट नहीं, लेकिन स्थानीय सन्धि-निर्माण की गलियारे खुलते दिखते हैं।
व्याख्यात्मक विचार
धार्मिक और ऐतिहासिक धारा से संबंधित संकेत
मत्ती-हेनरी, आर्बन बर्न्स तथा अडम क्लार्क के पारंपरिक टिप्पणी-आप में से, इस प्रकार के संघर्षपूर्ण क्षणों के बारे में यह संकेत देते हैं कि पेचीदा राजनीतिक परिदृश्य भी परमेश्वर की योजना के भीतर हो सकता है। उन्होंने नाहाश की आक्रमण-योजना को मानव-चालित सत्ता-रेखाओं के रूप में देखा है, जो परमेश्वर के संरक्षण के बिना टूट सकती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस और अर्थ
- अन्य निर्णयुअल संदर्भ: क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए समझौते और वाचा के साथ संबद्ध घटनाओं के निकट संबंध दिखाते हैं।
- सुरक्षा और संधि का विचार: कुछ प्रसंगों में संधियाँ स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण हो सकती हैं, परन्तु यह प्रश्न उठाते हैं कि यह सत्य है कि परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध भी स्थायित्व मिल सकता है?
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
जब बाहरी दबाव तेजी से बढ़ता है, तो समुदाय किस तरह अपनी सुरक्षा के लिए निर्णय लेता है, यह स्पष्ट है: समझौते की ओर कदम बढ़ते हैं, परन्तु यह भी आवश्यक है कि यह निर्णय परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो। हमारे लिए सीख यह है कि संकट के समय विश्वसनीय नैतिक दिशा-निर्देश बनाए रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समुदाय की सुरक्षा-योजना बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि परमेश्वर की नियति ऊपर रहे।
शब्द-चिह्न और उद्धरण संकेत
इस पंक्ति के भीतरMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द इस स्वरूप में उद्धृत नहीं किये गये हैं; किन्तु इन टिप्पणियों में उनकी सामान्य तात्त्विक व्याख्या संरक्षित है।