1 शमूएल 10:27 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु कई लुच्चे लोगों ने कहा, “यह जन हमारा क्या उद्धार करेगा?” और उन्होंने उसको तुच्छ जाना, और उसके पास भेंट न लाए। तो भी वह सुनी अनसुनी करके चुप रहा।

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1 शमूएल 10:27 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधा सार

यह पद बताता है कि कर्तव्यनिष्ठ राजा के समर्थक होने के बावजूद कई लोग उसकी आलोचना करते हैं, उसे तुच्छ समझते हैं और भेंट न देकर उसका महत्व चुराते हैं। उसके बारे में लोगों की यह प्रतिक्रिया सत्ता-पंथ और आदर्श के प्रति संदेह की धारणाओं को दर्शाती है, फिर भी राजा ने परिस्थिति के विरुद्ध शांत रहने और अपने कान खोलकर लोगों की आवाज़ सुनने की चुप राह अपनायी।

प्रसंग पृष्ठभूमि

1 शमूएल 9–10 मेंolecules: जब शमूएल ने Saul (शाऊल) को घोषित रूप से इस्राइल का राजा नियुक्त किया, तब Saul कमजोर शुरुआत के बावजूद ईश्वर के निर्देशों के अनुसार नेतृत्व की राह पर चले। इस verse में कुछ लोग राजा के योग्यतাকে लेकर Cynical रहते हैं; वे राजा की भेंट देने के नियम से बाहर रहते हैं, और उनकी आलोचना से राजा के प्रति सामाजिक दबाव उभरता है। यह आग्रह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि प्रशासनिक सत्ता के साथ सार्वजनिक स्वीकृति और व्यक्तिगत श्रद्धा दोनों कैसे टकराते हैं।

व्याख्या के प्रमुख नतीजे

  • स्वीकृति बनाम आलोचना: राजा होने के बावजूद, कुछ लोग बाह्य द्योतक आधारित निन्दा करते हैं और उसे सम्मानित नहीं समझते।
  • चुप्पी की शक्ति: राजा ने व्यक्तिगत अपमान या बहस में उलझने के बजाय चुप रहकर ईश्वर की योजना पर विश्वास बनाए रखा।
  • भेंट न लाने की प्रवृत्ति: यह दर्शाता है कि समाज में कुछ लोग आध्यात्मिक या राजकीय आदर्श के प्रति कितने सतही रहते हैं, जबकि असल सत्ता के अनुरूप आचरण का पालन आवश्यक है।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संदेश

क: - 1 समुएल 9–10 के समग्र कथन से प्रेरणा मिलती है कि सार्वजनिक पदों के लिए चयन कैसे होता है और लोग किस प्रकार परीक्षण के समय भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियाएं दिखाते हैं। यह राही के लिए आंतरिक धैर्य और ईश्वर पर निर्भरता की शिक्षा देता है।

- भला-भला कहे जाने पर भी आत्मीयता और भेंटों के महत्व की चर्चा; यह हमारे धार्मिक व्यवहार में आचरण और सम्मान के बीच संतुलन की ओर संकेत करती है।

2-3 उपयुक्त विचार-विन्यास

  1. जो कुछ लोग कहेंगे, उसे ईश्वर के निर्देश के विरुद्ध न समझें; अपने दायित्व पर स्थिर रहें।
  2. चुप रहना कभी-कभी ईश्वर के निर्णय के प्रचार-प्रसार के लिए बेहतर हो सकता है।
  3. आत्म-सम्पादन में भेंट-स्वीकृति से अधिक आचरण और ईमानदारी की पूछताछ करें।

संबंधित आयते (संक्षेप में) और उनका रिश्ता

1) नेतृत्व की प्रकृति पर परीक्षण: प्रभु की योजना कैसे चलती है, यह दिखाने के लिए।

2) जनता की प्रतिक्रिया बनाम ईश्वर की तैयारी: बाहरी सहमति बनाम अंतरात्मा की आवाज़।

3) निर्णयों में धैर्य और विनम्रता का महत्व: सत्ता के साथ व्यवहार में परिशुद्धता की आवश्यकता।

व्यावहारिक निष्कर्ष

किसी भी नेता के लिए यह सीख है कि बहस-तर्क से पहले ईश्वर के रास्ते को देखना चाहिए, और सामाजिक दबाव के बीच शांत और न्यायसंगत निर्णय लें। भेंट और सम्मान के नियमों के बावजूद आचरण की सच्चाई बनाए रखना आवश्यक है।

उद्धरण नोट: इस विषय पर मैथ्यू हेन्री, अलबर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क की प्रकाशित टिप्पणी में संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; जहाँ वे उपलब्ध हैं, वे पाठ के साथ सीधे संदर्भित नहीं किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 10:27 समानांतर पद और संबंधित वचन

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