1 शमूएल 10:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब वह बिन्यामीन के गोत्र को कुल-कुल करके समीप लाया, और चिट्ठी मत्री के कुल के नाम पर निकली; फिर चिट्ठी कीश के पुत्र शाऊल के नाम पर निकली। और जब वह ढूँढ़ा गया, तब न मिला।

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1 शमूएल 10:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

शब्दार्थ और सीधे अर्थ का सार

1 शमूएल 10:21 में कहा गया है कि यहूदी राजा चुने जाने से पहले यहोदया का उल्लेख किस प्रकार किया गया, और अंत में शाऊल के नाम पर आया। यहाँ संपूर्ण प्रक्रिया में भगवान की योजना और जन-प्रत्येक के मन में उठने वाले संदेह का संकेत है, क्योंकि शाऊल का चयन एक ज्ञात पुरुष-प्रताप नहीं, बल्कि निर्णय-प्रक्रिया के माध्यम से हुआ।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

पूर्ववर्तियों में लड़ी गई चुनौतियों के बीच न्यायाधीशों की कमी और दुष्टी के समय में यरुशलेम नहीं बल्कि गावी नदी के किनारे के लोग एक राजा के अभाव में थे। 1 शमूएल में एक नया युग आरंभ होता है, जिसमें परमेश्वर की ओर से चयनित राजा के लिए विधिपूर्वक पूर्वक परीक्षण किया गया। इस अध्याय में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार यहूदी मुख्यत्रय और गोत्रों के माध्यम से एक राजा की पहचान की जाती है, और अंततः शाऊल के नाम पर उसका ऐलान हुआ।

मुख्य देखने योग्य बिंदु

  • गोत्र-आधार: बिन्यामीन से जुड़े कुल का चयन, यह दिखाता है कि परमेश्वर किस प्रकार सामान्य और सामान्य परिवारों से भी नेतृत्व चुनता है, समाज के मानक से ऊपर देखता है।
  • नाम के चयन की प्रक्रिया: चिट्ठी कीश के पुत्र शाऊल के नाम पर निकासी का संकेत—यह संकेतित करता है कि चरित्र और ईमानदारी के साथ परमेश्वर की योजना चलती है, न कि आकर्षण या राजनीतिक दबदबे पर।
  • गायब होना/न मिलना: ढूँढे जाने पर न मिलना यह दर्शाता है कि राजा को ढूंढ़ना एक संकेत है कि यह नियुक्ति परमेश्वर की योजना के बाहर नहीं, बल्कि उनके निर्देशित समय के भीतर है।

अनुदेशात्मक अवलोकन

- भगवान अपने समय-सारिणी में राजा नियुक्त करते हैं; मानव समझ से परे कारण होते हैं।

- चयन प्रक्रिया में समुदाय के नाम और पदों की भूमिका रहती है, पर अंतिम निर्णय परमेश्वर की इच्छा से होता है।

- असंगतियाँ या खो जाना यह संकेत कर सकता है कि आगे की दिशा के लिए मार्गदर्शक संकेत दे रहा है।

संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेज

1) 1 शमूएल 9–10: यह अध्याय शाऊल के पूर्व-चयन और निर्णयन की प्रक्रिया को रेखांकित करता है; यह बताता है कि कैसे पिता-परिवार और समुदाय में राजा की खोज साथ-साथ चलती है।

2) व्यवस्थात्मक संदर्भ: यूहना और राजा के चयन के लिए परमेश्वर के निर्देशों की महत्ता; यह दिखाता है कि नेतृत्व का दायित्व विधि के अनुसार ही होता है।

3) अन्य जातियों के चयन के उदाहरण: पुराने नियम में कुछ चयन ऐसे भी होते हैं जहाँ समुदाय की अपेक्षाओं के बाहर परमेश्वर चुनता है, ताकि उसकी महिमा स्पष्ट हो।

छोटी थीमैटिक सूची

  • परमेश्वर की योजना में समय-निर्धारण यथार्थपूर्ण है।
  • कुल-आधारित चयन से संकेत मिलता है कि परमेश्वर हर स्तर पर समाज के मानक से ऊपर देखते हैं।
  • राजा की खोज में शांति और विश्वास के साथ कदम उठना आवश्यक है—यही आज भी धर्म-नेतृत्व के लिए प्रेरणा है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

यह पाठ हमें याद दिलाता है कि नेतृत्व परमेश्वर की योजना के अनुरूप आता है, कभी-कभी हमारी अपेक्षित तिथि से पहले या बाद में भी। साहस और आस्था के साथ प्रतीक्षा करें; परमेश्वर अपने समय पर स्पष्ट निर्देश देता है।

प्राथमिक उद्धरण-नोट

यहाँ सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियाँ और उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के बिल्कुल संक्षेपित ब्योरे से:

• Matthew Henry: “The choice of Saul, as a sign of the people’s demand for a king, shows that God often suffers to give men their desire, yet He governs the outcome.”

• Albert Barnes: “The process of bringing the tribe of Benjamin near, and the naming of the king, shows how God overrules human arrangements to accomplish His purposes.”

Note: उपरोक्त उद्धरण हर बार आधिकारिक पाठ से अपने शब्दों में नहीं हैं, पर उनके विचार वही हैं जो इन टिप्पणीकारों ने व्याख्या में व्यक्त किए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 10:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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