Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 10:1 1 शमूएल 10:2 1 शमूएल 10:3 1 शमूएल 10:4 1 शमूएल 10:5 1 शमूएल 10:6 1 शमूएल 10:7 1 शमूएल 10:8 1 शमूएल 10:9 1 शमूएल 10:10 1 शमूएल 10:11 1 शमूएल 10:12 1 शमूएल 10:13 1 शमूएल 10:14 1 शमूएल 10:15 1 शमूएल 10:16 1 शमूएल 10:17 1 शमूएल 10:18 1 शमूएल 10:19 1 शमूएल 10:20 1 शमूएल 10:21 1 शमूएल 10:22 1 शमूएल 10:23 1 शमूएल 10:24 1 शमूएल 10:25 1 शमूएल 10:26 1 शमूएल 10:27



1 शमूएल 10:26 — दृश्य पृष्ठभूमि और संकेत
विधेय पाठ: और शाऊल गिबा को अपने घर चला गया, और उसके साथ एक दल भी गया जिनके मन को परमेश्वर ने उभारा था।
immédiate setting (तुरंत का संदर्भ)
यह पद वह क्षण दर्शाता है जब परमेश्वर के प्रेरित शासन-युग में शाऊल ने घोषणा-यात्रा समाप्त कर गिबा लौटकर अपना घर प्राप्त किया। दीप सरगर्मी के साथ यह दिखाता है कि शाऊल छोटा-सा अग्रणी था जिसे परमेश्वर ने चुना था और जनता के बीच सामाजिक-राजनीतिक मान्यता मिलने के बाद भी उसका निजी जीवन एक साधारण क्रम में लौट रहा है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर कभी-कभी ऐसे व्यक्तियों के साथ होते हैं जो उनके उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं—उनके साथ एक “दल” गया जो परमेश्वर ने उभारा था।
ईश्वर की योजना और विश्वास का संदेश
यह वाक्यशः कहती है कि परमेश्वर ने शाऊल के पीछे एक आशीषित समुदाय को प्रेरित किया, जिसे आत्म-समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ना है। परमेश्वर अपने इरादों को व्यक्तिगत रूप से शुरू करते हैं और फिर उन्हें ऐसे संग-साथों से समर्थ बनाते हैं जो मन-समरूपित होकर उसके उद्देश्य की पूर्ति में शामिल होते हैं। इसका अर्थ यह है कि सफलता केवल एक व्यक्ति की योग्यता नहीं, बल्कि परमेश्वर की दी हुई प्रेरणा और सहयोग से मिलती है।
महत्वपूर्ण शब्दों एवं छवियों की स्पष्टता
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संयोगित संदर्भ) और उनका संक्षेप प्रभाव
1) 1 शमूएल 9:16-17 — परमेश्वर ने शाऊल के चयन की पुकार की आधिकारिक घोषणा की; यह पाठ दिखाता है कि राजा के चयन का दायित्व और दिशा किस प्रकार उसका प्रशिक्षण और प्रेरणा के साथ जुड़ा है।
2) रोम 8:28 — परमेश्वर की योजनाओं में विश्वास और सहयोग की प्रेरणा पर बल; यह बताता है कि जो भी हो रहा है, परमेश्वर उन हर कदमों को बंधन की तरह संभालते हैं जो उनके उद्देश्य के अनुरूप होते हैं।
3) यूहन्ना 15:5 — निर्भरता का महत्व; परमेश्वर के साथ जुड़ाव ही जीवन की सफलता की असली कुंजी है, और “जो μου रहते हैं और जिनमें मैं रहता हूँ” वही फल ला सकते हैं।
प्रसंग-समझ और सुसंगत विचार
हेनरी (Matthew Henry) और ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) आदि के सामंजस्य से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर अपने सेवकों को चुनते हैं और उनके लिए साथ के लोग भी उभरते हैं ताकि divine प्रोग्राम पूर्ण हो सके। एक बड़े निर्देश के रूप में यह पंक्ति यह बताती है कि बाहरी-प्रतिष्ठा के साथ-साथ आंतरिक प्रेरणा और समुदाय का संयुक्त समर्थन आवश्यक है।
आज के लिए अनुप्रयोग
एतिहासिक-व्याख्या के संयुक्त निष्कर्ष
यह वाक्य इस बात की पुष्टि करता है कि राजा-शासकों की यात्रा सिर्फ सत्ता में नहीं, बल्कि परमेश्वर की ओर से दी गई सहायता और समुदाय की एकता से संचालित होती है।
सूत्रीहरण उद्धरण: Matthew Henry के पारंपरिक टिप्पणी से प्रकटन के भीतर सामान्य विचार मिलते हैं—परमेश्वर अपने भक्तों से साथ सक्रिय रूप से जुड़ते हैं और समूहों के माध्यम से उनकी योजना पूर्ण करते हैं; Barnes/Clarke के मिलान से भी यह स्पष्ट होता है कि प्रेरणा और समुदाय की भूमिका कितनी निर्णायक है। (उद्धरण संक्षेपित)