Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
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आर्थ: शाऊल के पुत्र योनातान ने साहसपूर्ण कदम उठाने की शुरुआत
मुख्य अर्थ: एक दिन योनातान ने बिना अपने पिता से बताने के अपने हथियारबोध वाले जवान से कहा, कि चलो पलिश्तियों की चौकी के पास जाकर इधर-उधर देखें, यह यह दर्शाता है कि परमेश्वर के भी अवसर उनके सामने खुले रहते हैं, और विश्वास में माता-पिता की सीमाओं से आगे बढ़ना सही हो सकता है।
पृष्ठभूमि
यह घटना शाऊल के शासन के शुरुआती दिनों की है, जब इस्राइल पलिश्तियों के विरुद्ध युद्ध की तैयारी कर रहा था। योनातान, शाऊल का पुत्र, एक साहसी और निर्भीक वीर के रूप में चित्रित होते हैं। वह अपने पिता की नीति और सुरक्षा-चिन्हों से अलग जाकर कदम उठाते हैं, यह संकेत देता है कि परमेश्वर के निर्देश कब और कैसे मान्य होते हैं, यह विवेक और साहस पर निर्भर है।
व्याख्यात्मक विचार
- योनातान का कदम आत्मविश्वास पर आधारित है: वह अपने पिता से पूर्व-सम्मति के बिना भी पलिश्तियों के सामने जाने को तैयार है, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की कृपा और विजय के अवसर लोगों के भीतर छुपे रहते हैं।
- कथा यह भी दिखाती है कि नीतिगत रोक-टोक, यदि विवेक के साथ नहीं जुड़ी, तो कभी-कभी ईश्वर के उद्देश्यों को रोक भी सकती है।
- जवान का सहारा लेकर आगे बढ़ना एक संकेत है कि सामर्थ्य और विश्वास हाथ में हाथ में चलते हैं; सही निर्णय लेने पर देव-योजना खुलती है।
थीमेटिक बिंदु
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यह प्रेरणा दूतों की सरलता और साहस के बारे में याद दिलाती है—अन्योक्त निर्णय लेने में ईश्वर की योजना विद्यमान रहती है।
2) एक अन्य संदर्भ जहाँ विश्वास और कदम उठाने का संयोजन दिखता है, वह है जहाँ लोग निर्भय होकर जलप्रवाह पार करते हैं; यह दिखाता है कि ईश्वर कभी-कभी साहसिक निर्णयों के बाद ही उपहार देता है।
3) व्यक्ति-परिस्थितियों में परमेश्वर के मार्ग को देखने के लिए अच्छी विवेक की आवश्यकता को संकेतित करता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जब अवसर सही हों और विवेक साथ हों, तो साहस के कदम उठाने से परमेश्वर की सहायता प्रसारित हो सकती है। परन्तु यह भी आवश्यक है कि यह कदम प्रशासनिक नीति के विरुद्ध न हो और नितांत ईश्वर-आदेश के अनुरूप हो।
संकेतित उद्धरणों के नोट
इस पन्ने के संदर्भ में सीधे वेदांत के अनुभागों के परिचयों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रयुक्त शब्दों के exact उद्धरण नीचे उद्धृत नहीं हैं; केवल उनके विचारों के अनुरूप सार-संयोजन प्रस्तुत किया गया है।