Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 14:1 1 शमूएल 14:2 1 शमूएल 14:3 1 शमूएल 14:4 1 शमूएल 14:5 1 शमूएल 14:6 1 शमूएल 14:7 1 शमूएल 14:8 1 शमूएल 14:9 1 शमूएल 14:10 1 शमूएल 14:11 1 शमूएल 14:12 1 शमूएल 14:13 1 शमूएल 14:14 1 शमूएल 14:15 1 शमूएल 14:16 1 शमूएल 14:17 1 शमूएल 14:18 1 शमूएल 14:19 1 शमूएल 14:20 1 शमूएल 14:21 1 शमूएल 14:22 1 शमूएल 14:23 1 शमूएल 14:24 1 शमूएल 14:25 1 शमूएल 14:26 1 शमूएल 14:27 1 शमूएल 14:28 1 शमूएल 14:29 1 शमूएल 14:30 1 शमूएल 14:31 1 शमूएल 14:32 1 शमूएल 14:33 1 शमूएल 14:34 1 शमूएल 14:35 1 शमूएल 14:36 1 शमूएल 14:37 1 शमूएल 14:38 1 शमूएल 14:39 1 शमूएल 14:40 1 शमूएल 14:41 1 शमूएल 14:42 1 शमूएल 14:43 1 शमूएल 14:44 1 शमूएल 14:45 1 शमूएल 14:46 1 शमूएल 14:47 1 शमूएल 14:48 1 शमूएल 14:49 1 शमूएल 14:50 1 शमूएल 14:51 1 शमूएल 14:52



सीधे अर्थ का संक्षेप
1 शमूएल 14:35 बताता है कि शाऊल ने यहोवा के लिये एक वेदी बनवाई, जो उसके द्वारा यहोवा के लिये बनी पहली वेदी मानी जाती है। यह संकेतक है कि शाऊल ने धार्मिक रीति-रिवाजों को स्थापित करने और अपने राज्य की आधिकारिक आराधना को एक ठोस रूप देने का प्रयास किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय सिंहावलोकन के समय का है, जब आयतों के बीच शाऊल और उसकी सेना जंगल में छिपे हुए लोहित पुत्रों के साथ युद्ध की तैयारी कर रहे थे। इस घटना में शाऊल की पहली वेदी बनवाने से यह प्रकट होता है कि वह यहोवा के प्रति कर्तव्यबद्धता दिखाने के साथ-साथ अपने शासन के औपचारिक पन्थ पर भी आग्रह रखता है। यहूदा और इस्राइल के धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य में यह एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिसमें धार्मिक समारोही क्रिया की स्थापना से यहोवा-प्रेम के साथ राजनीतिक सत्ता का संयोजन दिख सकता है।
व्यাখ्या और शिक्षण प्रस्ताव
- वेदी बनवाना एक संकेत है कि शाऊल यहोवा को मान्यता देते हैं, और यह उनके प्रशासनिक निर्णयों के एक अंग के रूप में आता है।
- परन्तु यह भी चेतावनी है कि बाहरी धार्मिक क्रिया आवश्यक नहीं कि आंतरिक विश्वास और समर्पण के बराबर हो; व्यवहारिक प्रस्तुतियाँ अक्सर अपने उद्देश्य से भिन्न भी हो सकती हैं।
3 प्रमुख विचार (थीमेटिक बिंदु)
अन्य प्रासंगिक बाइबिल उद्धरण (संक्षिप्त संदर्भ विवरण)
- दूसरों के साथ यह विचार मिलते हैं कि धार्मिक क्रियाओं के अभ्यास से आंतरिक निष्ठा मानी जाती है (उदा.: राजा के युग में आराधना की संस्थाएं कब जरूरी समझी जाती हैं)।
- एक समान परिस्थिति में अन्य ग्रंथों में भी यह दिखाया गया है कि बाह्य देव-आराधना के ढांचे की स्थापना तब तक अनंत नहीं जब तक दिल से समर्पण पूरी तरह रहे।
खास उद्धरण (ऐतिहासिक टिप्पणी से संकलन)
यह भाग पवित्र-टीका से संबंधित पूर्व-उद्धरणों के लिए है; नीचे दिए गए पंक्तियाँ केवल संदर्भ हेतु हैं:
“जो लोग यह मानते हैं कि कर्म मात्र से धर्म पूरा होता है, वे यहाँ यह देखेंगे कि शाऊल ने वेदी बनवाई—पर यह नहीं बताता कि उसका दिल यहोवा के साथ सच्चा था।” (मैथ्यू हार्नी, अलेक्टर बर्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डॉयरे शब्दों के अनुरूप संकलन)
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके सार
- 2 समूएल 7:7-11 की स्मृति से मिलान दिखता है कि राजा के कदमों में यहोवा की इच्छा को प्राथमिकता देना चाहिए; यह दर्शाता है कि सत्ता और आराधना के रास्ते कभी-कभी अलग हो सकते हैं।
- सभोपदेशक 3:1-8 भाव के साथ यह समझ आता है कि समय और अवसर की पंक्तियाँ एक साथ चलती हैं; समुदाय के लिए एक उपयुक्त आराधना-स्थापना आवश्यक हो सकती है, परन्तु अंततः निष्ठा ঈश्वर के सामने होनी चाहिए।
- मरकुस 12:33 के विचार से यहोवा में प्रेम और अपने पड़ोस से प्रेम एक साथ रखने की प्रेरणा मिलती है; प्रतीकों की भूमिका तब तक है जब तक वे अंतःकरण को व्यक्त करें।
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
1 शमूएल 14:35 हमें सिखाता है कि यहोवा के लिए की जाने वाली धार्मिक क्रियाओं में सरकार और शासन की भागीदारी हो सकती है, पर वास्तविक धर्मनिष्ठा निष्ठापूर्ण दिल से आती है। प्रतीकों और वेदियों का निर्माण एक अवसर है, पर दिल का समर्पण और आज्ञाओं का पालन ही परमेश्वर के साथ संबंध को ठोस करता है।