1 शमूएल 14:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसी प्रकार जितने इस्राएली पुरुष एप्रैम के पहाड़ी देश में छिप गए थे, वे भी यह सुनकर कि पलिश्ती भागे जाते हैं, लड़ाई में आकर उनका पीछा करने में लग गए।

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1 शमूएल 14:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ की पुष्टि

1 शमूएल 14:22 का यह पद दर्शाता है कि इज़राइली पुरुष जो पहाड़ी देश एप्रैम में छिपे थे, वे पलिश्ती भागते समय सुनकर लड़ाई में भाग लेने आए और उनका पीछा किया गया। इसका मतलब है कि डर और छिपना तबाही के बिना, प्रेरित होकर साहसपूर्वक संग्राम में भाग लेने से समर्थ हुआ।

पृष्ठभूमि और शास्त्रीय संदर्भ

इस अध्याय के क्रम में גד में तलवारबंदों के साथ जो भयपूर्ण स्थिति थी, उसे दूर करने के लिए शाऊल के सेना की सजगता और आदरणीय नेतृत्व का चित्रण मिलता है। पलिश्ती सेना के भाग जाने पर भी इस्राएली सेना के कुछ लोग किन्हीं कारणों से छिपे थे; इस Verse में वे भय से उभरकर सहयोग के लिए पहुँचते हैं, जिससे युद्ध की धार तेज होती है।

व्याख्यात्मक विचार

  • भय के बावजूद अवसर की पहचान: पलिश्ती retreat के संकेत मिलते ही वे आगे आए। यह दिखाता है कि परिस्थिति के अनुरोध पर एकता और साहस कैसे उभर सकता है।
  • कर्म और उत्तरदायित्व: शाऊल के नेतृत्व में भागे लोग भी पीछे से नहीं रहते; वे सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • उत्कृष्टता बनाम भय का चयन: छिपकर नहीं, एक्शन लेकर परिणामों की दिशा बदलना संभव हुआ।

अनुदेशक टिप्पणियाँ (संयोजित विचार)

यह दृश्य हमें यह सीख देता है कि याद रहने योग्य सफलताएँ केवल संख्या या सामर्थ्य से नहीं मिलतीं, बल्कि साहसपूर्ण उठा Preis, और सही समय पर सहभागिता से मिलती हैं। सामान्यतः ऐसे क्षण जब दबाव बढ़ता है, उस समय सत्य-आत्मा और निष्ठा के साथ क्रिया करने से परिस्थितियाँ पलट सकती हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ छोटा व्यवहारिक उल्लेख

- संदर्भ 1: कुछ अन्य स्थान जहाँ एप्रैम-रेखा के पराक्रम द्वारा संकट निम्न होता है, वहाँ भी सलाह है कि भय के बावजूद देवयुग्म के साथ आना चाहिए। संकेत-पूर्वक क्रिया की प्रेरणा।
- संदर्भ 2: नेतृत्व और एकता के महत्व पर बल देता है कि सही समय पर भागीदारी से दौड़ दूर नहीं रहेगी।
- संदर्भ 3: संघर्ष के बीच विश्वास और सामुदायिक सहयोग से जीत के अवसर बनते हैं।

सार तत्त्व और छोटे निष्कर्ष

  • छिपे रहने से भय को नहीं बदला जा सकता; साहस और सहभागिता से स्थिति बदली जा सकती है।
  • युद्ध के समय जागरूकता और समय पर कदम उठाने की शक्ति से विजयी मोड़ आ सकता है।

कठोर व्यवहारिक takeaway

जो लोग परिस्थितियों में पीछे छिपे रहते हैं, वे संभवतः अवसरों को चूक जाते हैं। जब विश्वास किया जाए और सही समय पर कदम उठाया जाए, तब कठिनाई भी अवसर बन जाती है। यह उपाय उद्धार के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक विश्वास और संचालन की दिशा में प्रेरक है।

नोट: इस commentary से मिलती एक छोटी-सी प्रेरणा यह है कि भय के बीच भी सक्रिय भागीदारी से समकालीन संकटों में सफलता मिल सकती है, यदि नेतृत्व और अनुशासन साथ हों।

यदि चाहें, मैं इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे-छोटे उद्धरण खोजकर शामिल कर सकता/सकती हूँ—बस बताएं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 14:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जब इस्राएली पुरुषों ने देखा कि हम सकेती में पड़े हैं (और सचमुच लोग संकट में पड़े थे), तब वे लोग गुफाओं, झाड़ियों, चट्टानों, गढ़ियों, और गड्ढों में जा छिपे।

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यह देखकर कि इस्राएली पुरुष भाग गए, और शाऊल और उसके पुत्र मर गए, उस तराई की दूसरी ओर वाले और यरदन के पार रहनेवाले भी इस्राएली मनुष्य अपने-अपने नगरों को छोड़कर भाग गए; और पलिश्ती आकर उनमें रहने लगे।

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