1 शमूएल 30:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तीसरे दिन जब दाऊद अपने जनों समेत सिकलग पहुँचा, तब उन्होंने क्या देखा, कि अमालेकियों ने दक्षिण देश और सिकलग पर चढ़ाई की। और सिकलग को मार के फूँक दिया,

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1 शमूएल 30:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

1 शमूएल 30:1 बताता है कि दाऊद और उनके लोग जिन्दा आदमी थे, वे मुस्किल परिस्थिति में लौटते हैं और फलस्वरूप अमालेकीयों ने सिकलग पर आक्रमण कर दिया। यह वचन दाऊद के लिए एक कड़ी परीक्षा का समय है, जब उनकी सुरक्षा और सामर्थ्य के बिना भी ईश्वर की सहायता की आशा में वे आगे बढ़ते हैं। दाऊद की नज़र में यह घटना यह स्पष्ट करती है कि दुर्दिन की घड़ियों में भी परमेश्वर पर निर्भर रहना चाहिए।

VERSE CONTEXT in brief

यह वाकया युद्ध से लौटते दाऊद के समूह के सामने घटित होता है। सिकलग उनके निवासस्थल पर आक्रमण कर दिया गया और परिवार, सन्तान, और सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट हुआ। इस दुर्घटना के बाद दाऊद के मन में भय, चिंता और प्रेरणा—तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं उठती हैं, पर वे ईश्वर की सहायता के लिए पुकारते हैं और आगे की राह ढूंढते हैं।

Main spiritual lesson

कुशलता या असफलता चाहे जैसी भी हो, परमेश्वर के साथ साहसपूर्वक चलते हुए भी मानव कमजोरियाँ बाधाओं के बीच उजागर होती हैं। इस verse में सीख यह है: अचानक आयी विपत्ति के समय भी विश्वासियों को अपने हृदय को ईश्वर की व्यवस्था और मार्ग के अनुरूप रखना चाहिए, धैर्य बनाए रखना चाहिए, और राष्ट्र-समूह के बीच साझा सहयोग को बनाए रखना चाहिए।

सम्पादनशैली: पारिवारिक और सामरिक धारा

दाऊद, जिन्होंने पहले ફરી से अपनी सेनाओं को संगठित किया, एक कठोर सच्चाई का सामना करते हैं—परिवार के विनाश के स्मरण से वे और उनकी टोली एक बार फिर ईश्वर के लिए पुकारते हैं। इस पाठ में तीन मानक आयाम देखे जा सकते हैं: (1) विपत्ति की अचानकता, (2) संतोष और आशा की जरूरत, (3) शांति-यशस्वित मार्ग का खोज।

Cross-references

  • यशायाह 41:10 — भय को छोड़कर ईश्वर के साथ स्थिर रहने की प्रेरणा देता है; इस परिस्थिति में दाऊद भी धीरज बनाए रखने का संदेश लेते हैं।
  • राजाओं 19:11-13 — Elijah के भय और ईश्वर की ठंडी आहट के बीच विश्वास के मार्ग की पुनर्स्थापना; विपत्ति के बीच ईश्वर के संकेत समझने की आवश्यकता पर बल देता है।
  • यूहन्ना 16:33 — संसार में परेशानियाँ होंगी, परन्तु मैं संसार पर विजयी हूँ; यह प्रेरणा दाऊद के लिए भी विश्वास के पथ को पुष्ट करती है।

इन संदर्भों से दिखता है कि विपत्तियाँ अक्सर विश्वास के परीक्षण होती हैं, पर परमेश्वर के साथ सहयोग में ही मार्ग निकलता है।

Commentary insights

यह अनुभाग दाऊद के मनोभावों के प्रवाह को समझाने में मदद करता है। Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke जैसे प्रकाशकों के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी के संकेत इस संदर्भ के भीतर साथ आते हैं—परन्तु यहाँ हमने उन पाठों को सुसंयत रूप से शामिल किया है, ताकि मूल पाठ की धारा बनी रहे। यदि आप इनमें से किसी एक के संकेत-उद्धरण देखना चाहें, तो वे विपत्ति के समय दृढ़ विश्वास और प्रार्थना के महत्व पर सहमत होते हैं।

कथनात्मक अनुप्रयोग

- जब हमारा निवासी (परिवार/संगठन) खतरे में हो, तब धैर्य से ईश्वर से सहायता माँगना उचित है।

- नुकसान के समय समुदाय का समर्थन चाहिए; एकजुटता से हालात से निपटना अधिक सम्भव होता है।

- निराशा के क्षणों में भी, परमेश्वर के उद्धार की आशा रखना चाहिए, ताकि आगे की राह स्पष्ट हो सके।

हवाला—पढ़ना और प्रायोगिक विचार

1 शमूएल 30:1 के आगे के भागों में दाऊद दुबारा युद्ध-योजना बनाते हैं और अमालेकीयों के विरुद्ध लौटकर परिवार की बचाव-यात्रा करते हैं। यह घटना दिखाती है कि संकट के बीच भी ईश्वर की प्रतिज्ञा और उनकी दिशा से आगे बढ़ना चाहिए।

संक्षेप

तीसरे दिन सिकलग पहुँचने पर दाऊद को मालूम हुआ कि अमालेकीयों ने सिकलग पर आक्रमण कर दिया। यह चुम्बकीय घटना उनके विश्वास, धैर्य और समुदायिक समर्थन की परीक्षा है, जिसमें ईश्वर की सहायता ही दिशा बताती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 30:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब शाऊल ने हवीला से लेकर शूर तक जो मिस्र के पूर्व में है अमालेकियों को मारा।

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इसलिए दाऊद अपने जनों समेत तड़के उठकर पलिश्तियों के देश को लौट गया। और पलिश्ती यिज्रेल को चढ़ गए।

1 शमूएल 27:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और दाऊद ने अपने जनों समेत जाकर गशूरियों, गिर्जियों, और अमालेकियों पर चढ़ाई की; ये जातियाँ तो प्राचीनकाल से उस देश में रहती थीं जो शूर के मार्ग में मिस्र देश तक है।

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