Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 30:1 1 शमूएल 30:2 1 शमूएल 30:3 1 शमूएल 30:4 1 शमूएल 30:5 1 शमूएल 30:6 1 शमूएल 30:7 1 शमूएल 30:8 1 शमूएल 30:9 1 शमूएल 30:10 1 शमूएल 30:11 1 शमूएल 30:12 1 शमूएल 30:13 1 शमूएल 30:14 1 शमूएल 30:15 1 शमूएल 30:16 1 शमूएल 30:17 1 शमूएल 30:18 1 शमूएल 30:19 1 शमूएल 30:20 1 शमूएल 30:21 1 शमूएल 30:22 1 शमूएल 30:23 1 शमूएल 30:24 1 शमूएल 30:25 1 शमूएल 30:26 1 शमूएल 30:27 1 शमूएल 30:28 1 शमूएल 30:29 1 शमूएल 30:30 1 शमूएल 30:31

मुख्य विषय: दाऊद का स्थिरता और चुनौतियों का सामना
1 शमूएल 30:9 में दाऊद अपने छः सौ साथियों के साथ बसोर नदी तक पहुँचा। यह सूचित करता है कि बड़े संघर्ष के बीच भी उन्होंने मार्ग खोजते रहने और एक सुरक्षित गंतव्य प्राप्त करने की कोशिश जारी रखी। नदी तक पहुँचना बताता है कि यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है; यह कदम सुरक्षा और योजना की प्रतीक है, जहाँ हर कदम आगे बढ़ना है और पीछे नहीं हटना।
कथात्मक संदर्भ ( literary context )
पूरे प्रसंग में दाऊद युद्ध से लौटकर आये थे और उनके दुश्मन बहुत से जंगलों में छुपे थे। जब वे अपने लोगों के लिए भोजन, पानी, और सुरक्षा की व्यवस्था कर रहे थे, तो बसोर नदी एक प्राकृतिक मार्ग के रूप में सामने आती है, जो आगे के निर्देशन के लिए एक ठहराव और पुनः योजना बनाओ का अवसर देती है। नदी के दोनों किनारे—the one side where कुछ लोग चले गए—यह दिखाते हैं कि संघ के भीतर विविध निर्णय और जोखिम होते हैं।
धार्मिक गूढ़ता (theological significance)
यह पद हमारे विश्वास को याद कराता है कि कठिन मार्गों में भी परमेश्वर की योजना हमारे साथ है। दाऊद एकदम से हार नहीं मानते; वे अपने लोगों के साथ सेना का संयोजन बनाए रखते हैं, ताकि खतरे और विपत्तियाँ आने पर भी संगठन और एकता बनी रहे। यह भी संकेत देता है कि भलाई के मार्ग में छोटे-छोटे निर्णयों की भूमिका होती है—कब कब कौन साथ छोड़कर कहाँ जाए, इसकी सूझ-बूझ।
अनुवाद-निर्भरता: पूर्ववर्ती कोट
मैथ्यू हेनरी (Matthew Henry) ने इस प्रकार के क्षणों में प्रभु की सुरक्षा और मार्गदर्शन को देखते हुए शब्दों को उकेरा है कि विपत्ति के समय भी ईश्वर का संरक्षण पीछे-पीछे चलता है और हमारे फैसलों के परिणाम मिलकर बनते हैं। अगर आप उनके टिप्पणी से कुछ पंक्तियाँ उद्धृत पाएँ, तो वे यह संकेत देंगे कि दाऊद के समूह ने धैर्य बनाए रखा और उद्देश्य के अनुरूप स्थिर रहे।
शास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि कठिन समय में भी नेतृत्व और समुदाय मिलकर आगे बढ़ते हैं, और प्रभु की सहायता से मार्ग मिलता है।
रिसर्च-प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse हमें याद दिलाता है कि विपत्ति के बीच भी दिशा और सुरक्षित मार्ग ढूँढना संभव है जब हम धैर्य, योजना और एकता के साथ आगे बढ़ते हैं। दाऊद ने जैसे जैसे नदी तक पहुँचा, आगे के अभियान की तैयारी के संकेत दिए; यह विश्वास का वह हिस्सा है जो हर κρίσιμο क्षण में ऊर्जा देता है और परमेश्वर की मदद पर भरोसा बनाए रखता है।
उद्धरण-नोट: ऊपर के Commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्वीकृत उद्धरणों की स्पष्ट पंक्तियाँ उपलब्ध नहीं हैं। यदि आप चाहें, तो मैं उनके मूल टुकड़ों से संक्षिप्त, सटीक उद्धरणों के साथ इन विचारों को और सुदृढ़ करके दे दूँगा।