1 शमूएल 30:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं इस दल का पीछा करूँ? क्या उसको जा पकड़ूँगा?” उसने उससे कहा, “पीछा कर; क्योंकि तू निश्चय उसको पकड़ेगा, और निःसन्देह सब कुछ छुड़ा लाएगा;”

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1 शमूएल 30:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 30:8 — दाऊद और दुष्ट समूह का पीछा

परिप्रेक्ष्य: इस दृष्य में दाऊद और उसके साथियों के विरुद्ध उनके नगर जुड्द में हुए आक्रमण के बाद, वे अपने घरों और संपत्ति के लिए उद्विग्न हो उठते हैं। जब बट-शेम और अन्य स्थानों के परिवारजन गायब थे, दाऊद ने पूछा कि उन्हें आगे बढ़ना चाहिए या नहीं। यह वचन हमें बताता है कि कैसे दाऊद ने परमेश्वर से मार्गदर्शन माँगा और जवाब पाकर उन्होंने अपहरणकर्ताओं को पाने की दिशा स्वीकार की।

प्रमुख अर्थ

यह verse दाऊद की निर्भयता और आशीर्वादपूर्ण नेतृत्व-वृत्ति को दर्शाता है—जब वे संकट में थे, उन्होंने परमेश्वर से आगे बढ़ने की पुष्टि माँगी और उसे पाया कि पीछा करना उचित था और सफलता निश्चित होगी। परमेश्वर की आज्ञा मिलते ही दाऊद ने साहसपूर्वक कदम बढ़ाया और विजय की निश्चितता उनके मन में समाहित थी।

मुख्य थीम्स

  1. केन्द्रित विश्वास बनाम भय: दाऊद ने भीषण परिस्थिति में भी प्रभु से मार्गदर्शन माँगा; erwartung के साथ कार्य किया गया।
  2. आदेश के अनुसार行动 की पुष्टि: परमेश्वर के कहने पर ही चरित्रगत निर्णय लेना—जो जोखिम भरा हो पर परमेश्वर की सहायता के भरोसे किया गया।
  3. संकट के बाद restoration की आशा: वापसी में शत्रुओं से सब कुछ छुड़ाने का भरोसा है—धन, सम्बन्ध, और परिवार की पुनःस्थापना की दृष्टि।

कौम की मार्गदर्शक विचारधारा (cross-references)

  • यशायाह 30:21 — मार्गदर्शन के समय कान उनके पीछे होंगे; यह शिक्षा देती है कि परमेश्वर के निवेदन के अनुसार पीछा करने से लाभ है।
  • नीतिवचन 3:5-6 — प्रभु में विश्वास रखो, अपने समझ के अनुसार न चलो; वह तुम्हारे मार्ग निर्देशन करेगा।
  • निर्गमन 14:15-16 — विश्वास में की गई दिशा-निर्देशन से व्यवस्थापन संभव होता है; प्रभु की प्रेरणा के अनुसार आगे बढ़ना सार है।

ये cross-references बताती हैं कि परमेश्वर के मार्ग के अनुसार आगे बढ़ना किस तरह जीवन के संकटों में आशा और समाधान ला सकता है।

व्यावहारिक संकेत

  • कठिन समय में भी विचार-विमर्श के साथ प्रभु से पहले मार्ग पूछना—ध्रुव विश्वास को स्थापित करता है।
  • स्थिति की न तुच्छ आलोचना, न ही निराशा, बल्कि परमेश्वर के वचन के अनुसार कर्म करना।
  • विश्वास और prudence का संतुलन बनाए रखना—दाऊद की तरह जोखिम उठाने से पहले परमेश्वर की अनुमति माँगते हैं।

संक्षिप्त समापन

1 शमूएल 30:8 में दाऊद का चरण-दर-चरण निर्णय दिखाते हैं कि किस प्रकार परमेश्वर के साथ समन्वय बनाकर सुदूर चुनौती भी सहज लग सकती है। यह वचन प्रेरित करता है कि संकट के समय न सिर्फ साहस चाहिए, बल्कि प्रभु के संकेतों के अनुसार कदम उठाने से सुनिश्चित सफलता मिलती है—और यह भी किRecovered lives और संपत्ति की पुनःस्थापना ईश्वर के उद्धार की योजना का हिस्सा है।

नोटः इस पंक्तिबद्ध व्याख्या में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायनामिक टिप्पणीकारों के सामान्य विचारों का एकसाथ समेकन किया गया है; नीचे उद्धरण-टिप्पणियाँ आवश्यकतानुसार उल्लेखित हैं।

असार-उद्धरण (यदि मौज़ूद): "फिर वह पहचानते हैं कि परमेश्वर के साथ संगत कदम ही सच्चे विजय की कुंजी हैं" — Matthew Henry-like synthesis. "तुम पूछो, तो परमेश्वर उत्तर देगा" — Barnes-समझ। "धीरज से प्रतीक्षा करो, और प्रभु से मार्ग मांगो" — Clarke-शैली सार।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 30:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और जो कुछ अमालेकी ले गए थे वह सब दाऊद ने छुड़ाया; और दाऊद ने अपनी दोनों स्त्रियों को भी छुड़ा लिया।

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तब दाऊद ने यहोवा से पूछा, “क्या मैं जाकर पलिश्तियों को मारूँ?” यहोवा ने दाऊद से कहा, “जा, और पलिश्तियों को मार के कीला को बचा।”

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तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना*।

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