1 शमूएल 30:30 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

होर्मा, कोराशान, अताक,

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1 शमूएल 30:30 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 30:30—यह verse क्यों महत्वपूर्ण है

यह छोटा सा नामांकन भी एक बड़ी संवेदना देता है: जीवन में अचानक आई विपदाओं के बीच भरोसा और नेतृत्व की भूमिका। 1 शमूएल 30:30 में हर एक किरदार के लिए नया आयाम खुलता है—जहाँ समर्पित योजना, ईश्वर की सहायता और समुदायिक नेतृत्व मिलते हैं। इस पाठ में हम देखते हैं कि कैसे बुरे दिन भी आशा के रास्ते खोलते हैं, जब व्यक्ति और उसके समाज ईश्वर की कृपा पर टिके रहते हैं।

प्रमुख संदर्भ: मूल प्रसंग

राजाओं की अवधि के दौरान दाऊद और उसके लोग घर लौटते हैं और देखते हैं कि उनकी नगरी दीवालों सहित लुट गई है। यह verse उस कहानी का भाग है जिसमें दाऊद ने अपने समूह के साथ युद्ध-पूर्व की कठिनाइयों का सामना किया, परन्तु ईश्वर की कृपा से स्थिति को संभाला। यहाँ “होर्मा, कोराशान, अताक” जैसे नाम लिपिबद्ध हैं, जो स्थान-प्रतीकों या स्थानीय समुदायों का संकेत दे सकते हैं और परिणामस्वरूप दाऊद के लिए एक नई आस्था और रणनीतिक निर्णय का मार्ग खुलता है।

मुख्य संदेश

इस verses का मूल संदेश यह है कि जीवन की तबाही के बीच भी उम्मीद और मार्गदर्शन मौजूद रहता है जब लोग ईश्वर की योजना पर निर्भर रहते हैं और एक दूसरे के साथ सहयोग करते हैं। हार मानना नहीं, बल्कि लक्ष्य पर टिके रहना और परमेश्वर की अनुमति पहचानना—यही सफलता की कुंजी है।

प्रमुख थीम्स

  • समुदाय-संरक्षण: संकट की स्थिति में समूह की एकजुटता और एक-दूसरे का सहारा।
  • लीडरशिप का पुनःस्थापन: दाऊद की भूमिका—स्व-निर्णय से ईश्वर के संकेत की ओर मोड़।
  • आशा बनाम निराशा: कठिन समय में विश्वास की दृढ़ता और ईश्वर की योजनाओं पर भरोसा।

पवित्र ग्रंथ से संबद्ध विचारधारा

पवित्रता से भरे संदेशन में यह दिखाता है कि श्रम और जोखिम के बीच भी ईश्वर के उद्देश्य होते हैं, और समुदायिक सहारा से नुकसान की मरम्मत संभव है। यह भी संकेत देता है कि आंतरिक विश्वास और बाहरी नेतृत्व दोनों मिलकर संकट से उबारते हैं।

cross-references (संक्षेप में, 2–3 मार्गदर्शक लिंक)

1) रोम 8:28 से प्रेरणा—सब मिलकर करें तो परमेश्वर की योजना के अनुसार सब भला होता है; इस कथा की सामूहिक धारणाओं को पुष्ट करता है।

2) भजन 46:1—ईश्वर हमारे सहायता और शरण हैं; संकट के बीच स्थिर रहने का संदेश देती है।

3) 1 समूएल 30:6—दूतों के संघर्ष के बीच दाऊद का मनोबल कैसे बना रहा; नेतृत्व और विश्वास के संतुलन को स्पष्ट करता है।

छोटे विचार: एक पाठक के लिए devotional निष्कर्ष

कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी क्षति वही अवसर बन जाती है जहाँ हम सीखते हैं कि कैसे समुदाय मिलकर एक नया मार्ग बनाते हैं। जब जीवन की दीवारें टूटती हैं, ईश्वर हमें एक नई दिशा दिखाते हैं—अगर हम एक दूसरे के साथ बने रहें और उनके संकेतों पर चलें। यह verse हमें याद दिलाता है कि संघर्ष के समय भी नेतृत्व और विश्वास की संयुक्त शक्ति से लौटना संभव है।

संक्षिप्त अनुवाद-नोट

इस verse में दाऊद और उसके साथियों की स्थिति दर्शाई गई है, जहां स्थानीय नामों के संकेत उनके क्षेत्र या समूह की विविधता को दर्शाते हैं और निर्णय-निर्माण में ईश्वर की आशीष के साथ संगठित प्रयास का महत्व उभरता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 30:30 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर यहूदा ने अपने भाई शिमोन के संग जाकर सपत में रहनेवाले कनानियों को मार लिया, और उस नगर का सत्यानाश कर डाला। इसलिए उस नगर का नाम होर्मा* पड़ा।

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एलतोलद, बतूल, होर्मा,

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तब अमालेकी और कनानी जो उस पहाड़ पर रहते थे उन पर चढ़ आए, और होर्मा तक उनको मारते चले आए।

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