Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 13:1 1 शमूएल 13:2 1 शमूएल 13:3 1 शमूएल 13:4 1 शमूएल 13:5 1 शमूएल 13:6 1 शमूएल 13:7 1 शमूएल 13:8 1 शमूएल 13:9 1 शमूएल 13:10 1 शमूएल 13:11 1 शमूएल 13:12 1 शमूएल 13:13 1 शमूएल 13:14 1 शमूएल 13:15 1 शमूएल 13:16 1 शमूएल 13:17 1 शमूएल 13:18 1 शमूएल 13:19 1 शमूएल 13:20 1 शमूएल 13:21 1 शमूएल 13:22 1 शमूएल 13:23



मुख्य interpretive बिंदु
1 शमूएल 13:23 एक क्षणभंगुर, परंतु संकेतपूर्ण स्थिति को दर्शाता है: पलिश्तियों के सैन्य चौकियों के साथ मुकाबले की तैयारी और संघर्ष की गहराई। इस वाक्य में सेनाओं के बीच के तनाव और निर्णय लेने की तीव्रता उभरती है; यह दिखाता है कि इस समय इजरायल के लोग चट्टानी स्थिति में थे, जब परमेश्वर के मार्ग में धीरज और विश्वास की कसौटी पर खड़े रहने की जरूरत है।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक ढांचा
इस अंश में कथा की गति और वातावरण तीव्र है—युद्धकालीन कवायद की स्पष्ट स्थिति, पलिश्ती सेना की ठंडी, गहरी चालाकी और इजरायली नेतृत्व की नैतिक चुनौती। कई कथा-उद्धरणों में एक ही अवसर पर निर्णय और परिणाम का दायरा स्पष्ट होता है: एक ओर सत्ता-बल का दबाव, दूसरी ओर परमेश्वर की स्नेहपूर्ण मार्गदर्शिका की तलाश।
आध्यात्मिक महत्व
यह पंक्ति एक विशिष्ट क्षण को उद्धार की दिशा से जोड़ती है: मानव सीमाओं के भीतर भी परमेश्वर की योजना कैसे संचालित होती है। निर्णय का दायरा—हठधर्मी बनाम आस्था—यह दिखाता है कि विश्वासियों को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और ईश्वर-के निर्देश के अनुरूप चलना चाहिए।
ग्रंथ-पर्याय और संरचना
यह वाक्य पूरी कथा के तनाव की चोटी पर है; पलिश्तियों की चौकी के सिपाहियों का मिकमाश की घाटी तक आना, एक निर्णायक मोड़ संकेतक है। यह दृश्य, जहाँ बाहरी दबाव स्पष्ट है, आंतरिक विश्वास की जाँच देता है कि कैसे ईश्वर के लोग चुनौतियों का सामना करते हैं और कब विरोध के बावजूद सत्य पर टिकते हैं।
Cross-references (संक्षेप में) और उनके संबंध
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि बाहरी दबाव के बीच आस्था, मार्गदर्शन और धैर्य कैसे काम करते हैं, और किस तरह परमेश्वर की कृपा सचेत-निर्णय को सक्षम बनाती है।
विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 शमूएल 13:23 एक क्षण-निर्णय के क्षण का उल्लेख है, जिसमें इजरायली बल पलिश्ती चुनौती के सामने खड़े रहते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि सफलता अकेले शक्ति पर नहीं, आस्था और परमेश्वर की मार्गदर्शिका पर निर्भर करती है। आवश्यकता है कि हम हर दबाव में परमेश्वर के वचन के अनुसार कदम उठाएं, विश्वास के साथ आगे बढ़ें और हर परिस्थिति में सत्य के प्रति निष्ठा बनाए रखें।
उद्धृत टिप्पणियाँ (सार)
यदि आवश्यक हो, तो इस प्रकार के उधृत टिप्पणियों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट विचार उपलब्ध हैं।
नोट: ऊपर के विचार सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के समान सिद्धांतों पर आधारित हैं; पूरा पाठ मूल-शब्द उद्धरण के रूप में नहीं दिया गया है।