Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 10:1 1 शमूएल 10:2 1 शमूएल 10:3 1 शमूएल 10:4 1 शमूएल 10:5 1 शमूएल 10:6 1 शमूएल 10:7 1 शमूएल 10:8 1 शमूएल 10:9 1 शमूएल 10:10 1 शमूएल 10:11 1 शमूएल 10:12 1 शमूएल 10:13 1 शमूएल 10:14 1 शमूएल 10:15 1 शमूएल 10:16 1 शमूएल 10:17 1 शमूएल 10:18 1 शमूएल 10:19 1 शमूएल 10:20 1 शमूएल 10:21 1 शमूएल 10:22 1 शमूएल 10:23 1 शमूएल 10:24 1 शमूएल 10:25 1 शमूएल 10:26 1 शमूएल 10:27



शीर्षक: इस्राएल के लिए परमेश्वर का उद्धार-यज्ञ
सीधी व्याख्या का संकेत: 1 शमूएल 10:18 में यहोवा इस्राइल से कह रहे हैं कि वह पवित्र उद्धारकर्ता है जिसने मिस्र से उन्हें निकाल कर उनकी युनानी-सीमा से बचाया, और उन सभी शत्रुओं के कब्जे से भी छुड़ाया है। यह उद्धार उनके सामर्थ्य, कृपा और चुनाव के कर्तव्य की याद दिलाता है: परमेश्वर ने उनके लिए एक विशिष्ट पथ निर्धारित किया है और उनकी आस्था, भक्ति, तथा आज्ञापालना को प्रेरित किया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ शमूएल के समय इस्राएलियों के बीच एक महत्त्वपूर्ण स्मरण कराता है—याद दिलाता है कि परमेश्वर ने देश-प्रवास के समय उनके साथ क्या किया। इस्राएल का उद्धार एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है, जिसे शासक के चयन के साथ जोड़ा गया है ताकि लोग यह समझें कि शासन और सुरक्षा परमेश्वर के निर्णयों के अधीन है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
मूल पाठ से जुड़े क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या)
1) प्रेरित उद्धार के स्मरण से जुड़ी अन्य घटनाओं पर प्रकाश डालता है कि परमेश्वर अपने लोगों को कैसे संजोते हैं।
2) परमेश्वर के सामर्थ्य के कारण मानवीय निर्भरता बढ़ती है, क्योंकि वे उनकी रक्षा और मार्गदर्शन में प्रतिष्ठित रहते हैं।
3) आस्था और आशीष: उद्धार के स्मरण से यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर का चयन और कृपा, इस्राएल के भीतर एक नई जिम्मेदारी और आचरण की मांग करते हैं।
सूक्ष्म पाठ-आधार से विचार
यह उद्धरण यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने इस्राएल को उन सभी दबावों से बचाया है जो उनके प्रति असुरक्षा पैदा करते थे। उनके इतिहास के इस हिस्से में एक बार फिर से यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर की कृपा उनके साथ है जब वे उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलते हैं।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग कठिन समय में भरोसा करते हैं, वे पाते हैं कि परमेश्वर ने अतीत में जो किया, वही आज भी उनके साथ है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में ईश्वर के उद्धार और मार्गदर्शन के लिए खुला और आज्ञाकारी बनना चाहिए, ताकि हम नई चुनौतियों के समय भी उसकी कृपा से आगे बढ़ सकें।
ध्वनि उद्धरण (एक लाइन): “मैं तो इस्राएल को मिस्र देश से निकाल लाया, और तुम को मिस्रियों के हाथ से…”