Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 11:15 — संदर्भ-संदेश और महत्व
यह पद यह बताता है कि ईश्वरीय शासक शाऊल के चुने जाने के बाद इब्रानी कुल मिलकर गिलगाल पहुँचे और वहाँ यहोवा के सामने उसे राजा के रूप में मान्यता दी। यह घटना शाऊल की स्थापना, इस्राइल के नेताओं के प्रति उनकी भूमिका और लोगों के सामूहिक उत्सव का चित्रण करती है। संदर्भ में, बच्चों-सी धारणाओं के बजाय एक ऐतिहासिक क्षण है जब देश ने एक केंद्रित नेतृत्व के लिए सहमति दी और यहोवा के नाम पर बलिदान के साथ उनकी नई राजनीतिक-धार्मिक व्यवस्था-निर्माण की शुरुआत दिखती है।
मुख्य आशय
इस verse से तीन बातों पर प्रकाश पड़ता है: (1) यहोवा के सामने राजा के रूप में शाऊल की मान्यता, (2) समारोही क्रिया के साथ राज्य-उत्साह का संगम, और (3) परमेश्वर की योजना के अनुसार समाज का एकजुट होना। शाऊल के तलस्वरूप में नेतृत्व की स्वीकृति और लोग-समुदाय की खुशी एक साथ जुड़ती है, जो आगे चलकर देश के नगर-राज्यों के संघ-जीवन की नींव बनती है।
कुंजी विषय
संदर्भ-व्यवहार
यह घटना यहूदा के पुराने परमुख कारणों से अलग एक नया अध्याय है—राज्य-सत्ता की स्थापना और सामर्थ्य के साथ परमेश्वर के इरादों का समन्वय।
संबंधित आयतन-चिन्ह (cross-references):
नोट: नीचे उल्लेखित क्रॉस-वर्स आगामी verses के छोटे-से संकेत प्रस्तुत करते हैं; पूर्ण वचन नहीं दिए गए हैं।
प्रायोगिक विचार
हमारे लिए इस verse से सीख यह है कि नेतृत्व और समुदाय का 합 यहोवा के सम्मान के साथ जुड़ना चाहिए। जब लोग ईश्वर की इच्छा के अनुसार आदेशित मार्ग पर चले, तब उत्साह और एकता बढ़ती है। व्यक्तिगत उत्साह तब सार्थक होता है जब वह भक्तिपूर्ण समर्पण और नैतिक जिम्मेदारी के साथ जुड़ा हो।
छोटा सार
गिलगाल में शाऊल की राजा-स्वीकृति और यहोवा की पूजा का समन्वय यह दिखाता है कि नेतृत्व और आराधना एक साथ चलना चाहिए, ताकि इस्राएल का समाज एकजुट और उद्देश्यपूर्ण बने।