Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



पद का क्षण-स्थिति: शमूएल के समय का संदूक और फिरौतीारी उपचार
1 शमूएल 6:3 में लोग यह बयान करते हैं कि इज़राइल के देवता के सन्दूक को यदि वे फिर से भेजेंगे, तो उसे पूरी तरह भेजना चाहिए; ताकि उसकी हानि जो सामने आए, उसे वे पूरा चुकाने से डरे। वे यह भी जानते हैं कि देवता का हाथ उनके ऊपर क्यों नहीं उठ रहा—यानी पहले से चली आ रही चिंता और चिह्न व्यक्ति-सम्भाव के कारण वह संकेत कर रहा है कि भेद्यता है और उद्धार का एक मार्ग संचालित है।
ईश्वर के बारे में पाठ से स्पष्ट होने वाले तथ्य
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टीकरण
“सन्दूक” यहाँ सिर्फ एक पवित्र चिह्न नहीं, बल्कि ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक है। “दोषबलि” से तात्पर्य उन घटनात्मक उपायों से है जो पाप के परिणामों को संतुलित करने के लिए ईश्वर ने निर्धारित किए हैं—परमेश्वर के ताड़ना-पुनरुत्थान की क्रिया का हिस्सा।
संयुक्त संदर्भ-आकाश और पृथ्वी के सत्य
यह पाठ अन्य स्थानों से जुड़ता है जहाँ प्रत्यक्ष पवित्र चिह्नों के साथ परमेश्वर की योजना स्पष्ट होती है: उदाहरण के लिए यहूदियों के इतिहास में पवित्र कर्मों और शास्त्रीय नियमों का सम्मिलन, और व्यक्तियों की दया के साथ न्याय की आवश्यकता का संकेत।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संकेत)
- प्रेषित विश्वस्ताव के संदर्भ में, ऐसे संकेत जो मानवीय निर्णयों के बावजूद परमेश्वर के मार्ग को प्रकाशित करते हैं।
- अन्य कृत्यों में, पवित्र सन्दूक के साथ जुड़ी Mer. व्यवहार और मानवीय प्रतिक्रिया का संयोजन।
- पवित्रता और धर्म-निष्ठा बनाम डर और आत्म-स्वार्थ के संघर्ष की प्रतीकता।
आज के समय में निष्कर्ष-जीवन से सीख
इस पद से आधुनिक विश्वासियों के लिए यह सीख मिलती है कि हम कभी भी ईश्वर के मार्ग को अपना बनाने की कोशिश न करें, बल्कि पवित्रता, निष्ठा और ईश्वर के नियमों के अनुसार ही चलें। जब हम ऐसी स्थिति में आते हैं जहाँ परिणाम असुरक्षित लगते हैं, तब भी हमें भरोसा रखें कि परमेश्वर की निष्कपट योजना सार्थक है और उसकी कृपा से ही उद्धार संभव है।
मैथ्यू हेन्नरी, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के समाहित विचार
इन पुरानी टिप्पणियों में परमेश्वर के सर्वोच्च अधिकार तथा मानव-निष्ठा की आवश्यकता पर बल दिया गया है कि प्रभु के संगति में रहना और उसकी महिमा में ही उत्साह हो। अगर आवश्यक हो तो ये विचार संक्षेप में शामिल कर लिए जाते हैं: परमेश्वर के मानदंडों के अनुसार चलना, और अपनी परिस्थितियों में भी प्रभु की कृपा पर निर्भर रहना—यही शांति और वास्तविक सुरक्षा की कुंजी है।
इस पाठ की संपूर्ण विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का हाथ कभी ताने-ताने नहीं उठता जब मनुष्य उसकी उचित उपस्थिति और स्मरण के साथ जुड़ता है; चिह्न-प्रतीकों के नीचे भी उसकी दृष्टि और योजना चलती रहती है।