1 शमूएल 6:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यहोवा का सन्दूक लेकर उस गाड़ी पर रख दो, और सोने की जो वस्तुएँ तुम उसकी हानि भरने के लिये दोषबलि की रीति से दोगे उन्हें दूसरे सन्दूक में रख के उसके पास रख दो। फिर उसे रवाना कर दो कि चली जाए।

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1 शमूएल 6:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

शब्दार्थ में सरल अर्थ

1 शमूएल 6:8 में यहोवा का सन्दूक लौटाने के क्रम में, सतर्कता से कहा गया है कि सन्दूक के साथ रखी गई सोने की वस्तुएँ भी “दोषबलि की रीति से” दी जाएँ और उन्हें दूसरे सन्दूक में रखकर सन्दूक के साथ भेज दिया जाए ताकि यहोवा के क्रोध का कारण न बने।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

लगभग समय के आस-पास जिस समय बलपूर्वक यहोवा के सन्दूक ने फिलिस्तीनी क्षेत्र में विनाशकारी प्रभाव दिखाए थे, वह समय था। यहूदियों ने जालिम अनुभव किया कि सन्दूक रखते समय कई असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, यहोवा के सन्दूक को सुरक्षित रूप से वापस भेजना पड़ता है—लेकिन यह प्रक्रिया धार्मिक-रीति के अनुरूप, दोषबलि सहित, सम्पन्न क़दमों से पूरी करनी होती है।

व्याख्यात्मक निष्कर्ष

  • धार्मिक रीति का पालन: यहोवा के सन्दूक के साथ की जाने वाली दान-भारियाँ और दोषबलि का नियम उस समय की पवित्रता और सम्मान को दर्शाता है।
  • न्याय-संरचना का संकेत: यह अपराध-योग्यता का प्रश्न नहीं, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि परिस्थिति के अनुसार आधे-मन से नहीं, पूर्णता के साथ पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक है।
  • सुरक्षा और सन्तुलन: यह प्रक्रिया यह दर्शाती है कि परमेश्वर को शुद्धता और सही उद्देश्य के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि मात्र दिखावे के लिए।

संबंधित आयतें और उनका संक्षिप्त अर्थ

2 मत्तय 7:1-2 के समान ध्यान: परमेश्वर के अधिपत्य और आदेश का सम्मान आवश्यक है; इसलिए कर्म-फल और रीति-पालन में स्पष्टता होनी चाहिए।

यहोवा के सन्दूक के साथ का निष्कासन: यह बताता है कि पवित्र दिशा-निर्देश के बिना सन्दूक का उपयोग असुरक्षित हो सकता है; रीति-पालन से आशीष मिलती है।

3 ठोस क्रियात्मक बिंदु

  • रीति-पालन को प्राथमिकता दें; यह सुरक्षा और भक्ति दोनों को बनाये रखता है।
  • यहोवा की पवित्रता के संदर्भ में अपनी सारी गतिविधियाँ शुद्ध रखें।
  • समझदारी से कदम उठाकर परिणामों के अनुरूप समाधान खोजें।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)

यशायाह 66:3— बाहरी श्रद्धा की अपेक्षा आंतरिक भक्ति अधिक महत्वपूर्ण है; रीति-पालन में ईश्वर का कल्याण सर्वोपरि है।

निर्गमन 25:9— माझे-आकृति-निर्देशन में पवित्र वस्तुओं की व्यवस्था और संदूकों के साथ स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं।

संक्षिप्त नैतिक निष्कर्ष

यह पाठ यह सिखाता है कि पवित्रताओं के साथ ईश्वर के निर्देशों का सावधानीपूर्ण पालन करना आवश्यक है, ताकि भय और दया के बीच संतुलन बना रहे। दोषबलि जैसी रीति-नीतियों के माध्यम से भी हम यह दिखाते हैं कि परमेश्वर के महिमाकारी कार्यों के प्रति विनम्र और सचेत रवैया आवश्यक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 6:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वे बोले, “यदि तुम इस्राएल के देवता का सन्दूक वहाँ भेजो, तो उसे वैसे ही न भेजना; उसकी हानि भरने के लिये अवश्य ही दोषबलि देना। तब तुम चंगे हो जाओगे, और तुम जान लोगे कि उसका हाथ तुम पर से क्यों नहीं उठाया गया।”

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