Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 20:1 लूका 20:2 लूका 20:3 लूका 20:4 लूका 20:5 लूका 20:6 लूका 20:7 लूका 20:8 लूका 20:9 लूका 20:10 लूका 20:11 लूका 20:12 लूका 20:13 लूका 20:14 लूका 20:15 लूका 20:16 लूका 20:17 लूका 20:18 लूका 20:19 लूका 20:20 लूका 20:21 लूका 20:22 लूका 20:23 लूका 20:24 लूका 20:25 लूका 20:26 लूका 20:27 लूका 20:28 लूका 20:29 लूका 20:30 लूका 20:31 लूका 20:32 लूका 20:33 लूका 20:34 लूका 20:35 लूका 20:36 लूका 20:37 लूका 20:38 लूका 20:39 लूका 20:40 लूका 20:41 लूका 20:42 लूका 20:43 लूका 20:44 लूका 20:45 लूका 20:46 लूका 20:47



क्यों यह वाक्य महत्वपूर्ण है
लूका 20:26 में यह दृश्य दिखता है कि यीशु ने अपने विरोधियों के चाल को कैसे मात दी और उनके प्रश्नों के गिर्द एक ऐसी बुद्धिमत्ता रखी जो धर्मशास्त्रियों को चौंका देती है। यह verses यह दर्शाते हैं कि लोग जो कुछ पूछते हैं, उसे न मानकर, वे अपने अनुभव, कानूनी ढांचे या राजनीति-स्वार्थ के आधार पर जवाब जाँचते हैं; पर ईश्वर के राज्य के प्रश्नों में सच्चा अध्यात्मिक ज्ञान उनके तर्क-वितर्क से अधिक गहरा होता है। यह वाक्य पाठक को बताता है कि परमेश्वर की सत्ता और बुद्धिमानी मानवीय दबावों के ऊपर है, और सत्य की खोज में चुप्पी भी एक सशक्त बयान हो सकती है।
परिप्रेक्ष्य और मूल संदेश
इस पाठक-परिदृश्य में यीशु से धर्मशास्त्री और पुरोहितों के समूह ने एक राजनीतिक-धार्मिक प्रश्न किया— राजाओं के कर-वसूली के विषय पर— ताकि वे उसे फँसाकर नुकसान पहुंचा सकें। किन्तु यीशु ने उनका प्रश्न नहीं बल्कि उत्तर को पकड़ा, और उनका विरोध चकित रह गया। इसका मूल संदेश है कि परमेश्वर के राज में ज्ञान और चतुराई के स्रोत अलग होते हैं; चापलूसी, छल या राजनीतिक खेल से निर्धारित नहीं होता। जो लोग ईश्वर के विधान के अनुरूप जीवित रहते हैं, उनके प्रश्नों के उत्तर भी उसमें खुलकर सामने आते हैं।
मुख्य विषय-विकास
पश्चात संदर्भार्थित विचार
इस प्रकार की घटनाएँ प्रेरित करती हैं कि हम परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते में सरल, सच्चे और विनम्र प्रश्न रखें, न कि राजनीतिक या सामाजिक दबाव से प्रेरित बहस। यह भी संकेत है कि यीशु के उत्तर में वे लोग चकित हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा उत्तर सुना जो उनके पुरुषार्थ के पार था।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप) और उनके स्पष्टीकरण
1) मत्ती 22:21 में “देके राजा को दे दो” का विचार दर्शाता है कि पृथ्वी की सत्ता और ईश्वर की सत्ता अलग-अलग क्षेत्र हैं; यहाँ पर यह स्पष्ट होता है कि स्रोत कहाँ से आ रही है।
2) मार्क 12:17 में यीशु भूमि-नीति के प्रश्न पर उत्तर देते हैं जो दिल को समर्पण और दायित्व के साथ देखने के संकेत देता है।
3) म मुख्य 9:8-9 में परमेश्वर के राज के मूल्य-चिन्ह और चपल बुद्धि के बजाय सरलता की महत्ता पर बल दिया गया है।
नोट: उपरोक्त संदर्भ केवल विचार-विन्यास के लिए हैं; पूर्ण पाठ उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है।
व्यावहारिक devotional सोचना
जब आप किसी कठिन धार्मिक या सामाजिक प्रश्न से जूझते हैं, तो पहले अपने दिल की ईमानदारी को खोजें— आप सत्य के लिए कितनी तत्परता दिखाते हैं? यीशु के उत्तर की तरह, कभी-कभी चुप्पी भी सबसे शक्तिशाली उत्तर होती है, जो हमारे जीवन में परमेश्वर की योजना की सच्चाई को उजागर कर देती है।]
उद्धृत स्रोत नोट: नीचे के 2-3 मानक प्रकाशनों के सार-नोट्स सम्मिलित हैं; Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मौलिक टिप्पणियों से संक्षेप हित में आवश्यक पोलिश निकला है।