Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 20:1 लूका 20:2 लूका 20:3 लूका 20:4 लूका 20:5 लूका 20:6 लूका 20:7 लूका 20:8 लूका 20:9 लूका 20:10 लूका 20:11 लूका 20:12 लूका 20:13 लूका 20:14 लूका 20:15 लूका 20:16 लूका 20:17 लूका 20:18 लूका 20:19 लूका 20:20 लूका 20:21 लूका 20:22 लूका 20:23 लूका 20:24 लूका 20:25 लूका 20:26 लूका 20:27 लूका 20:28 लूका 20:29 लूका 20:30 लूका 20:31 लूका 20:32 लूका 20:33 लूका 20:34 लूका 20:35 लूका 20:36 लूका 20:37 लूका 20:38 लूका 20:39 लूका 20:40 लूका 20:41 लूका 20:42 लूका 20:43 लूका 20:44 लूका 20:45 लूका 20:46 लूका 20:47



लूका 20:41–42 पर विवेचना: दाऊद की सन्तान मसीह कौन?
मुख्य interpretive बिंदु: यीशु ने अध्यात्मिक ढंग से राजनीतिक या जन्मगत ठहराव से नहीं, बल्कि धर्मसूत्रों में लिखी दाऊद की सन्तान के प्रति उनके समझ पर प्रश्न उठाकर यह दिखाया कि मसीह का स्थान परमेश्वर के राजा के रूप में है — दाऊद की परंपरा के भीतर भी वह ईश्वर द्वारा प्रेरित है। मसीह दाऊद की सन्तान होने के साथ-साथ प्रभु का हुनर है, जो उद्धार की पूर्ण योजना का केंद्र है।
साहित्यिक संदर्भ (पठनीय संदर्भ)
लूका 20 में यीशु के सवाल का संचालन डगर-धार्मिक नेताओं के साथ तकरार के बीच आता है। पंक्ति-प्रेरणा यह है कि शास्त्रों के भीतर मसीह के वास्तविक स्थान को समझना संभव है, परन्तु यह समझाने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि चाहिए। यह पाठ येशु की परमेश्वर-निष्ठ और शास्त्र-आनन्दिनी शिक्षाओं की पुष्टि करता है कि मसीह सत्ता-युग में परमेश्वर के राजकुमार के रूप में आते हैं, न कि सिर्फ मानव राजा के रूप में।
धर्मशास्त्रीय महत्व
- मसीह के दाऊद की सन्तान होने की परिकल्पना से यह स्पष्ट होता है कि यीशु का जन्म वंशावली से जुड़ा है, किन्तु उसका राज स्वर्गीय और अनंत है।
– यह प्रश्न शास्त्र-समझ को चुनौती देता है कि क्या मसीह सिर्फ मानव-वंश के अधीन है, या उसकी पहचान परमेश्वर के अवतार के रूप में है।
अन्वय—ग्रंथ-परिचय और cross-references
इन क्रॉस-रेफरेंसेस के माध्यम से यह समझ आता है कि मसीह का अस्तित्व और प्रभुत्व परमेश्वर के योजना का अभिन्न भाग है, न कि केवल मानवीय वंश का परिणाम।
परिप्रेक्षण—आत्मिक प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
फिर उसने उनसे पूछा कि मसीह दाऊद की सन्तान कैसे कहला सकते हैं? इसका उत्तर यही है कि मसीह परमेश्वर की व्यवस्था के भीतर क्षमा, उद्धार और राजा के रूप में आते हैं। दाऊद के नाम से जुड़ी परंपरा उनके जन्म-बंधनों को दर्शाती है, पर उनका राजनीतिक-राज्य नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य का आध्यात्मिक और शाश्वत सिद्धान्त है।
मैथ्यू हेनरी, आल्बर्ट बार्न्स, एंड ऐडम क्लार्क से उपलब्ध संक्षिप्त उद्धरण
उद्धरणों का छोटा उल्लेख: यदि पहले से उपलब्ध हों तो नीचे दिए गए तीनों विद्वानों के संक्षिप्त शब्दों से लिए गए कथन उचित स्थान पर छोड़े जा सकते हैं।
Cross-reference notes: ऊपर दिए गए संदर्भों में कुछ स्पष्ट शाब्दिक उद्धरण सीधे न हो, पर उनके विचारों की समरूपता स्पष्ट होगी।