Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
नहेम्याह 9:1 नहेम्याह 9:2 नहेम्याह 9:3 नहेम्याह 9:4 नहेम्याह 9:5 नहेम्याह 9:6 नहेम्याह 9:7 नहेम्याह 9:8 नहेम्याह 9:9 नहेम्याह 9:10 नहेम्याह 9:11 नहेम्याह 9:12 नहेम्याह 9:13 नहेम्याह 9:14 नहेम्याह 9:15 नहेम्याह 9:16 नहेम्याह 9:17 नहेम्याह 9:18 नहेम्याह 9:19 नहेम्याह 9:20 नहेम्याह 9:21 नहेम्याह 9:22 नहेम्याह 9:23 नहेम्याह 9:24 नहेम्याह 9:25 नहेम्याह 9:26 नहेम्याह 9:27 नहेम्याह 9:28 नहेम्याह 9:29 नहेम्याह 9:30 नहेम्याह 9:31 नहेम्याह 9:32 नहेम्याह 9:33 नहेम्याह 9:34 नहेम्याह 9:35 नहेम्याह 9:36 नहेम्याह 9:37 नहेम्याह 9:38



नहेम्याह 9:26 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
नहेम्याह 9 में बाइबल के उद्धार और परमेश्वर के नियमों के प्रति जनजातियों की उत्तर-चेतना का पुनर्मूल्यांकन है। अध्याय 9 एक सार्वजनिक प्रार्थना और स्मरण है जिसमें इस्राएली बार-बार परमेश्वर के करुणा और उनके आचरण के बीच के टकराव को देखते हैं। 9:26 में इस्राएलियों के पूर्वजों के भविष्य के अनुसार वे उस समय भी बलवा, विद्रोह और व्यवस्था के उल्लंघन के रास्ते पर चले गए, और नबी-वचनों के अनुरोध के बावजूद उन्होंने उन्हें चिट्ठे पर नहीं ठहराया। यह एक स्मरण है कि परमेश्वर की कृपा के बावजूद मानव स्वभाव बार बार विपथगामी हो सकता है, और फिर भी परमेश्वर की व्यवस्था से मुड़ना दुखद परिणाम देता है।
मुख्य संदेश
यह वाक्य प्रेरित करता है कि परमेश्वर के नियमों से मुड़ना नैतिक गिरावट है और उसकी प्रतिक्रिया-स्वरूप वे कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। नहेम्याह 9:26 में वर्णित गिरावट यह दिखाती है कि इस्राएल का बार-बार भटकना उनके इतिहास के पुनरावलोकन में स्पष्ट है, परन्तु इसके साथ बल देकर यह भी दिखता है कि परमेश्वर की करुणा तथा पथ-निर्देशन कितनी बार उद्धार के लिए उपलब्ध रहता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ संदर्भ
— स्तोत्र 78:41: “वे परमेश्वर की चमत्कारी शक्तियों को स्मरण नहीं करते; और उनके उपायों को भुलाकर वे कमज़ोर होते जाते हैं।” यह स्मरण इस्राएल के इतिहास की पुनरावृत्ति के संपर्क में है कि मानव बार-बार आचरण में चूक करता है।
— नहेम्याह 9:17: “और वे लोग फिर बड़बड़ाने लगे, और अपने मन के विचारों से घोर अवमानना दिखाई;” यह उद्धरण इस प्रकार के प्रतिरोध का मानसिक चित्र देता है।
— परमेश्वर के भविष्यवक्ताओं के संदेश: जब लोग चितावों को न मानें, तो परिणाम स्वरूप वे विपत्तियों के शिकार होते हैं; फिर भी परमेश्वर सदा पलटावा सुझाते हैं।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
संक्षिप्त समारोप
नहेम्याह 9:26 एक चेतावनी भी है और आशा-प्रधान संदेश भी— इंसानी अवनति के बावजूद परमेश्वर की करुणा और पथ-निर्देशन उपलब्ध है। एक बार फिर से त्याग और विद्रोह के लिए नहीं, बल्कि दिल से लौटकर उसकी व्यवस्था को मानने का आह्वान है।
मूल संदेश में अन्य टिप्पणीकारों के तर्क (संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रकाश में यह कथन मिलता है कि परमेश्वर की परीक्षा के समय मानवीय असंयम के बावजूद पथ-परिवर्तन संभव रहता है, और दया के साथ दोष स्वीकार करने पर उद्धार की राह खुलती है। यदि आप चाहें, तो मैं उनके संकेतिक उद्धरणों की संक्षिप्त उद्धृतियाँ दे सकता हूँ।