Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
नहेम्याह 9:1 नहेम्याह 9:2 नहेम्याह 9:3 नहेम्याह 9:4 नहेम्याह 9:5 नहेम्याह 9:6 नहेम्याह 9:7 नहेम्याह 9:8 नहेम्याह 9:9 नहेम्याह 9:10 नहेम्याह 9:11 नहेम्याह 9:12 नहेम्याह 9:13 नहेम्याह 9:14 नहेम्याह 9:15 नहेम्याह 9:16 नहेम्याह 9:17 नहेम्याह 9:18 नहेम्याह 9:19 नहेम्याह 9:20 नहेम्याह 9:21 नहेम्याह 9:22 नहेम्याह 9:23 नहेम्याह 9:24 नहेम्याह 9:25 नहेम्याह 9:26 नहेम्याह 9:27 नहेम्याह 9:28 नहेम्याह 9:29 नहेम्याह 9:30 नहेम्याह 9:31 नहेम्याह 9:32 नहेम्याह 9:33 नहेम्याह 9:34 नहेम्याह 9:35 नहेम्याह 9:36 नहेम्याह 9:37 नहेम्याह 9:38



नीचे पाठ का पार्श्व-परिदृश्य
नीहेम्याह 9:5 वह समुदायिक प्रार्थना के एक भाग का अग्रभाग है जिसे लेवियों ने पढ़ित और उद्धृत किया। यह शाश्वत परमेश्वर के सम्मान और महिमा के घोषणापत्र का क्षण है, जब लोग परमेश्वर को अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य कहने के लिए खड़े होते हैं। यह वचन प्रकट करता है कि प्रजा परमेश्वर के पवित्र नाम और बड़े कार्यों के लिए एक जुट होकर स्तुति और धन्यवाद कर रही है, जैसे कि वे पहले से जानते हैं और आश्वस्त हैं कि परमेश्वर की महिमा अपरिमार्जित है।
ईश्वरीय महिमा और विश्वास के दृढ़ उत्सव
इस वाक्य का निहित जोड़ यह है कि परमेश्वर का महिमामय नाम, जिस पर सभी धन्यवाद और स्तुति टिकते हैं, उसे “अनादिकाल से अनन्तकाल तक” धन्य कहा जाना चाहिए। यह एक सार्वजनिक घोषणा नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास का सार्वजनिक प्रदर्शन है— कि परमेश्वर वह है जो सदा से है, वह जिसने इतिहास को उद्धार और कृपा से संचालित किया। यह ज्ञान यह भी बताता है कि भक्ति का केंद्र परमेश्वर के चरित्र की पवित्रता और महान करुणा में है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र
क्रॉस-रेफरेंसेस (संलग्न विचार)
यूहन्ना 1:14 के समान, जहाँ वचन ने अवतार लिया, और 1 थिस्लोनी 5:18 में कहा गया कि हर समय परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार धन्यवाद देना चाहिए, यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि: - परमेश्वर के महिमामय नाम के लिए निरंतर स्तुति अनुदिया नहीं है, बल्कि विश्वास की एक स्थिर धारा है। - प्रबंधन और इतिहास में परमेश्वर के कर्मों को याद कर के आशा बढ़ती है कि वही अभी भी है और भविष्य में भी वही रहेगा।
उद्धार-विश्वास के साथ today
आज के विश्वास के समुदाय के लिए यह वाक्य हमें प्रेरित करता है कि हम परमेश्वर के चरित्र के बहादुर चित्रण को नम्रता से स्वीकार करें— उसकी महिमा और नाम के सामने हमारा आभारी प्रतिउत्तर। हर दिन की छोटी-छोटी कृपाओं पर भी शुक्रगुज़ार रहना, और बड़ी घटनाओं में भी परमेश्वर के नियंत्रण पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
संबद्ध उद्धरण (संक्षेप)
मार्गदर्शक टिप्पणीकारों से सम्मिलित अनुभव यह है कि परमेश्वर की महिमा का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि जीवन के संपूर्ण संचाल से प्रकट होता है— जैसे कि प्रजा स्वयं खड़ी होकर घूँघट के भीतर नहीं, बल्कि अपने दिल की गवाही के साथ धन्य कहती है।
संक्षिप्त सार
यह वाक्य प्रदर्शन करता है कि ईश्वर की महिमा, उसके नाम की पवित्रता, और उससे प्राप्त उद्धार की स्मृति में मानवता एक साथ खड़ी होकर धन्य-स्तुति प्रदान करती है। जैसे नेहेम्याह के समय यह सभा एकता और परमेश्वर-परक स्मरण से प्रेरित थी, वैसे ही आज की चर्चाएं भी इसे अपनाएँगी: विश्वास की स्थिरता, नम्रता, और परमेश्वर के अनंत संग्ति में बंधना।
हितकारी संदर्भ
1) निर्गमन 15:2 (याद दिलाता है कि למחיה के पल में परमेश्वर की महिमा और उद्धार का गीत गाना चाहिए।)
2) स्तोत्र 103:1-2 (परमेश्वर के उत्तम गुणों की स्मृति में आभारी बनना चाहिए।)
3) कोलस्सियों 3:16 (धन्य-स्तुति का शब्द-स्तर हमारे भीतर ही नहीं, बल्कि समुदाय में भी समृद्ध होता है।)
महत्वपूर्ण उद्धरण (अगर उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे पाठ-उद्धरण के छोटे अंश केवल वही शामिल होते हैं जो पाठ-विशेष से सम्बद्ध हों और जिसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से लिया गया हो। इस प्रविष्टि में उनके पूर्ण पाठ नहीं हैं, पर उनकी प्रेरक दृष्टि के अनुरूप संक्षिप्त सार प्रस्तुत किया गया है।