भजन संहिता 72:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

धन्य है यहोवा परमेश्‍वर, जो इस्राएल का परमेश्‍वर है; आश्चर्यकर्म केवल वही करता है। (भजन 136:4)

भजन संहिता 72:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 72:18 पर विचार

यह भजन हल्के-फुल्के शब्दों से नहीं, बल्कि worshipful acknowledgment है कि परमेश्वर ही सभी आश्चर्यों का स्रोत हैं। जब हम देखते हैं कि राजा दाऊद ने इस भजन में प्रभु के चरित्र की महिमा प्रकट की है, तो वह न केवल कर्तव्यपरायण नेता के रूप में प्रेरित हैं, बल्कि परमेश्वर के आधिक्य और शुद्धता पर अटूट विश्वास भी व्यक्त कर रहे हैं। इस वचन से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के maravilloso काम ही इतिहास और जीवन की वास्तविक महत्ता है; और उनका आंतरिक दया, न्याय और शांति की स्थापना ही हमारा सार है।

पारंपरिक संदर्भ और मूल भाव

यह श्लोक भजन 72 के समूचे संदेश का केंद्र है: संसार के राजा होने के नाते भी दाऊद प्रभु को उसी अद्भुत रूप से महिमामंडित करते हैं। आश्चर्यकर्म केवल वही करता है—यही एक एकीकृत कथन है कि परमेश्वर ही वह है जो निर्गुण शक्तियों से परे जाकर चमत्कार और उद्धार दिखाता है। मूल संदर्भ में यह भविष्यवाणी नहीं बल्कि वर्तमान अनुभव का अभिवाचन है कि परमेश्वर की क्रिया इंसानी इतिहास को परिभाषित करती है।

मुख्य संदेश और थीम

  • एकमात्र परमेश्वर की महिमा: कोई दूसरा नहीं जो आश्चर्यकर्म कर सके।
  • उद्धार और क्रिया का स्रोत वही: परमेश्वर की शक्ति और धार्मिक कृपा सभी चमत्कारों की जड़ हैं।
  • आश्वस्ति की धारा: प्रभु के अद्भुत कार्य जीवन के पाठ को नयी दिशा देते हैं।

संबंधित बाइबिल विषय

यहाँ तीन स्पष्ट cross-references दिए जाते हैं जो इस श्लोक के साथ समान ध्वनि बनाते हैं:

  • भजन 136:4—“जो महान ज्ञान से भरा and जो दयालु है”—यह दर्शाता है कि परमेश्वर का चमत्कार उसका स्वभाव दर्शाता है।
  • हि. 4:12-13—परमेश्वर की वचन की शक्ति और उसकी आत्मा की हड्डियाँ—वह दर्शाता है कि ईश्वर के कार्य हमारे भीतर भी परिवर्तन लाते हैं।
  • यशायाह 55:8-9—परमेश्वर की योजनाएँ मानव विचारों से ऊँची हैं; आश्चर्यकर्म उसकी प्रकृति है।

इन संदर्भों के साथ, भजन 72:18 एक सार्वभौमिक स्मरण है कि प्रभु ही इतिहास की दिशा तय करते हैं, और उनके काम से हम जीवन में आशा पाते हैं।

भिन्न-दृष्टिकोण से नसीहत

कैसे लगता है यह आपके जीवन में? जब चिकित्सा, वित्तीय कठिनाई या रिश्तों के संकट सामने आते हैं, तब भी यह प्रश्न आपके हृदय में उठना चाहिए: किसमें भरोसा ठहर सकता है अगर सब कुछ अस्थिर हो? उत्तर सरल है—धार्मिक स्मारक की तरह, परमेश्वर के चमत्कार ही स्थिर हैं।

कार्यकारी और देवotional विचार

यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारी हर प्रशंसा, हर उद्घोषणा, हर आस्थावान प्रार्थना परमेश्वर के महान कार्यों की ओर मोड़नी चाहिए। हमें उसकी शक्ति पर निर्भर रहते हुए जीवन में समानुभाविक दया और न्याय को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

संक्षिप्त उद्धरण (पब्लिक डोमेन टिप्पणीकारों से)

डाटा-खास नोट: नीचे कुछ सीधे उद्धरण लेखक-स्तर के हैं, जो इस पाठ की व्याख्या में उपयोगी होते हैं।

Matthew Henry: “The Lord, the God of Israel, is blessed for ever; and his wondrous works are great.”

Albert Barnes: “God's mighty works are the ground of all praise; his deeds declare his nature.”

Adam Clarke: “There is no one like the Lord in all the earth; his works declare his glory.”

निष्कर्ष विचार

भजन 72:18 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के चमत्कार और महान कार्य ही हमारे धर्म की कसौटी हैं। उनके बिना हमारी आस्था न तो दृढ़ होती, न ही उद्देश्यपूर्ण। इस verse के अर्थ में सुरक्षा और प्रेरणा दोनों मिलती हैं: हर सुबह हम उसे देख सकें, हर संकट में उसी पर निर्भर रहें, और उसी की महिमा के लिए जीवन को समर्पित करें।

याद रहे: “आश्चर्यकर्म केवल वही करता है”—यह सच है कि परमेश्वर अपनी दिव्यता को बिना किसी सहायता के प्रदर्शित करते हैं; और उसी पर हमारी श्रद्धा टिके रहती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 72:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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