Old Testament
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एज्रा 3:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सो वे यह गा गाकर यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, “वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है।” और जब वे यहोवा की स्तुति करने लगे तब सब लोगों ने यह जानकर कि यहोवा के भवन की नींव अब पड़ रही है, ऊँचे शब्द से जयजयकार किया।
एज्रा 3:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 3:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 106:1 (HINIRV) »
यहोवा की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!


एज्रा 3:11 पर टिप्पणी—ध्वनि के साथ स्मरण और आशा
यह अंग बनती है कि क्यों यह परम 하나님 की स्तुति और करुणा का हरदम स्मरण गाया जाना चाहिए, भले ही सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ कैसे भी हों। पुराने उद्धार के इतिहास में यह वाकया यह स्पष्ट करता है कि पूजा और प्रतिज्ञा के साथ आरम्भिक भविष्य की नींव रखी जाती है। इस उपासना के बीच अग्निशमक और निर्माण के उत्साह का संगम दिखता है: परमेश्वर की भलाई के स्मरण से समुदाय को एकता और विश्वास मिलता है, और निर्माण के पट पर जयजयकार की ध्वनि सुनाई देती है।
पद का मूल संदर्भ और संदर्भ-वस्तु
यहोवा के भवन की नींव पड़ने के समय यहूदियों ने एक साथ पत्थर टेकना शुरू किया; उसी अवसर पर बुढ़े-बच्चे सभी ने गाकर यहोवा की स्तुति से वातावरण को पवित्र किया।Verse 11 में वे कहते हैं, “वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है”—यह स्मरणीय उद्घोष समुदाय के विश्वास की कसौटी बन गया। इस आयत से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक-उर्ध्वगमन के साथ भावनात्मक अभिव्यक्ति कैसे एक साथ प्रेरित करती है: परमेश्वर की दयालुता के स्मरण से सभा की प्रेरणा बढ़ती है और निर्माण-कार्य उन्नति पाता।
मुख्य संदेश
1) स्तुति एक आध्यात्मिक ऊर्जा है: जब लोग परमेश्वर के भलाई को स्मरण करते हैं और उसकी करुणा की स्थायीता पर विश्वास जताते हैं, तो उनकी आत्मा उत्साह से भर जाती है।
2) निर्माण के समय पूजा का महत्व: नींव पड़ने के क्षण में धार्मिक आस्था की घोषणा से समुदाय एक नई आशा और एकता प्राप्त करता है, जो टिके रहने योग्य संरचना बन जाती है—मौजूद सामाजिक परिवर्तन के बीच स्थिरता का संकेत।
3) इतिहास का क्रमानुसार स्मरण: पुरानी-नई वाचा के बीच करुणा की निरंतरता का संदेश—यहोवा का प्रेम और कृपा नवीन आरंभ की नींव बनती है।
अनुवादक-प्रेरक विचार (शास्त्री-आलोचना के सार से संकलित)
यह पंक्ति यह दिखाती है कि पवित्र स्थल के निर्माण के क्षण भी स्तुति-आधारित विश्वास से प्रेरित और केंद्रित रहते हैं। परमेश्वर की भलाई के स्मरण से नम्रता और आध्यात्मिक दृढ़ता मिलती है, जो समुदाय-निर्माण के समय आवश्यक होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सारांश और उनके अर्थ की समझ)
संयुक्त विचार—मूर्त धारा के भीतर एक समर्पण
एज्रा 3:11 का यह क्षण हमें यह दिखाता है कि भक्ति और निर्माण एक दूसरे के पूरक हैं। यहूदी जनता के लिए यह नया युग-शुरुआत एक स्पष्ट घोषणा थी कि परमेश्वर की भलाई और उसकी करुणा न समय के साथ घटती है, न कभी बोझ बनती है। वे यह कहकर उन्नति के साथ-साथ आस्था की स्थिरता बनाते हैं: “वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है।” इस भाव के साथ लोग नई नींव के पत्थरों पर ईश्वर के नाम की स्तुति से प्रोत्साहित होते हैं।
संक्षिप्त devotional thought
आप अपने जीवन की नींव क्यों नज़र रखते हैं? जैसे यहूदियों ने टुकड़े-टुकड़े निर्माण के बीच परमेश्वर की भलाई को याद किया, वैसे ही कठिन समय में आप भी अपनी आशाओं को बनाए रखें: प्रभु की करुणा हर समय बनी रहती है, और उसकी स्तुति आपके घर-परिवार और कार्यस्थल में स्थिरता लाती है।
शाब्दिक संदर्भों के लिए छोटे नोट
कम शब्दों में नीतिगत अभ्यास: इस आयत के संदेश को परखते समय, पूजा के क्षणों में दया और विश्वास की स्थिरता को प्राथमिकता दें; इससे समुदायिक और व्यक्तिगत जीवन दोनों में आशा बनती है।