Old Testament
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एज्रा 3:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए लोग, आनन्द के जयजयकार का शब्द, लोगों के रोने के शब्द से अलग पहचान न सके, क्योंकि लोग ऊँचे शब्द से जयजयकार कर रहे थे, और वह शब्द दूर तक सुनाई देता था।
एज्रा 3:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 3:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 32:17 (HINIRV) »
जब यहोशू को लोगों के कोलाहल का शब्द सुनाई पड़ा, तब उसने मूसा से कहा, “छावनी से लड़ाई का सा शब्द सुनाई देता है।”

न्यायियों 2:5 (HINIRV) »
और उन्होंने उस स्थान का नाम बोकीम रखा। और वहाँ उन्होंने यहोवा के लिये बलि चढ़ाई।

1 शमूएल 4:5 (HINIRV) »
जब यहोवा की वाचा का सन्दूक छावनी में पहुँचा, तब सारे इस्राएली इतने बल से ललकार उठे, कि भूमि गूँज उठी।
एज़्रा 3:13 का संदर्भ और महत्व
एज़्रा 3 अध्याय में यह दृश्य पुनर्निर्माण और आराधना के पुनः आरम्भ का है। यहूदा-यहोश की वादी में Yahweh के मंदिर के लिए इकट्ठे लोग शिलाओं-निर्माण के बीच परम आराधना के गीत गाते थे, परन्तु कुछ पुराने समय के स्मृतियों के कारण रोते भी थे। Verse 13 में एक प्रत्यक्ष दृश्य है: भीड़ खुशी-खुशी चिल्लाती है—लोगों के जयजयकार की ध्वनि इतनी ऊँची है कि रोने की आवाज स्पष्ट तौर पर सुनाई नहीं देती। इसका उद्देश्य यह बताना है कि नया आरम्भ आनंदित होकर आगे बढ़ रहा है, परन्तु पुरानी पीड़ा और स्मृतियाँ भी साथ हैं।
केंद्रीय अर्थ
इस verse में खुशी और शांति की सामंजस्य की ओर संकेत है। स्वयं परिवर्तन को दर्शाने वाले इतिहास में खुशी की ध्वनि अधिक ऊँची उठती है, क्योंकि परमेश्वर के घर के पुनर्निर्माण का अनुभव आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। साथ ही यह बताता है कि नए कदम किन्हीं चीजों को मिटाते नहीं, बल्कि उन्हें संदर्भ में लाते हैं—रोने की आवाज भी उसी पल के भीतर एक कहानी है, जिसे नई आराधना ने मान्यता दी है परन्तु वह पथ की ध्वनि से ध्वस्त नहीं हो पाती।
दो-तीन प्रमुख थीम
प्रमुख cross-references (संकेत)
1) नीतिवचन 14:26-27 के संदर्भ में डर और भक्ति का संतुलन—भक्ति का आभाव नहीं, पर भय से प्रेम और उत्साह का आना संभव होता है।
2) हेबर 12:2-3 की तरह “खेल-खेल के समय” में धैर्य और उत्साह का संयुक्त प्रभाव; परिश्रमी आराधना से पीड़ा घटती है।
3) ईशा 56:7 के समान मंदिर की जगह-स्थापना एक ऐसी जगह है जहाँ सभी जातियों के लिए आशीष है—आनंद की जयजयकार से परमेश्वर की महिमा का उद्घोष बढ़ता है।
घटती-सी सीमाएं दिखाने वाले इन संकेतों से यह स्पष्ट होता है कि नई आराधना और पवित्र स्थान की पुनःस्थापना एक साझा अनुभव है, जिसमें दुख भी अस्तित्व में रहते हैं लेकिन विजय की गवाही बढ़ती है।
व्यावहारिक विचार
जब भी हम अपने जीवन में नई चीजें आरम्भ करें, तो हमें पुरानी पीड़ा को दफन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे नई आशा और खुशी के साथ जोड़ना चाहिए। समुदाय में एक-दूसरे के आंसुओं और खुशी दोनों की मान्यता करें; ऐसा वातावरण परमेश्वर के सामने सत्यपूर्ण आस्था बनाये रखता है।
संक्षेप
एज़्रा 3:13 बताता है कि परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण के समय आशा की जयजयकार की आवाज़ रोने के शब्दों पर भारी पड़ती है—यह दर्शाता है कि ईश्वर की कृपा से नया आरम्भ कितना मजबूत और सम्मोहक हो सकता है, जहां पुरानी पीड़ा भी एक स्मरण बनकर नई आशा को पुष्ट करती है।
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के निर्धारित विचारों के संक्षिप्त संकेतों को एकीकृत किया गया है; नीचे उद्धृत अंश केवल संदर्भ हेतु हैं:
“जहाँ प्रेम और उत्साह एक साथ हों, वहाँ दुख पीछे छूट जाते हैं, और जयजयकार की ध्वनि पुरानी पीड़ा को मात दे देती है।” — यह विचार Adam Clarke के समानताएं दे सकता है।