Old Testament
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एज्रा 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके बाद नित्य होमबलि और नये-नये चाँद और यहोवा के पवित्र किए हुए सब नियत पर्वों के बलि और अपनी-अपनी इच्छा से यहोवा के लिये सब स्वेच्छाबलि हर एक के लिये बलि चढ़ाए।
एज्रा 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 29:39 (HINIRV) »
“अपनी मन्नतों और स्वेच्छाबलियों के अलावा, अपने-अपने नियत समयों में, ये ही होमबलि, अन्नबलि, अर्घ, और मेलबलि, यहोवा के लिये चढ़ाना।”

निर्गमन 29:38 (HINIRV) »
“जो तुझे वेदी पर नित्य चढ़ाना होगा वह यह है; अर्थात् प्रतिदिन एक-एक वर्ष के दो भेड़ी के बच्चे।

लैव्यव्यवस्था 1:3 (HINIRV) »
“यदि वह गाय-बैलों में से होमबलि करे, तो निर्दोष नर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर चढ़ाए कि यहोवा उसे ग्रहण करे।
एज्रा 3:5 का भावार्थ
इस आयत में कहा गया है कि मंदिर की व्यवस्था के पुनः स्थापना के बाद लोग नियमित बलि और नवीन चंद्र बलि के साथ-साथ यहोवा के पवित्र पर्वों के बलिदान चढ़ाते रहे, तथा हर एक अपनी इच्छा से यहोवा के लिए बलि चढ़ाने लगा। इसका मतलब है कि ईश्वर की पूजा पुनः क्रमबद्ध बन गई और जन-समुदाय ने धर्म-निष्ठा के साथ अपने-अपने नियम से बलियाँ अर्पण करना शुरू किया।
पृष्ठभूमि
बोली-युवाओं के लौटकर यरूशלם लौटने के बाद ईश्वर के घर का पुनरुद्धार हुआ (एज्रा–नहेम्या काल)। 538–515 ईसा पूर्व के बीच मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ। यह आयत मंदिर–अवकाश के समय की व्यवस्थित पूजा-कलाओं की पुनःस्थापना का संकेत देती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भक्ति केवल पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन-व्यवहार में भी धार्मिक दायित्व का पुनर्स्थापन हुआ।
व्याख्यात्मक अवलोकन
आशय की संकलनात्मक पंक्तियाँ
यह अध्याय समूह के सामुदायिक उपासना के पुनःस्थापन का दृश्य बनाता है: एकतरफुली पवित्रता और समारोह का पुनरुत्थान, दूसरी तरफ व्यक्तिगत सहभागिता का आह्वान। यह एक संतुलित धर्म-जीवन की भी शिक्षा देता है—सामुदायिक व्यवस्था के साथ व्यक्तिगत प्रतिबद्धता आवश्यक है।
संरेखित आयतें (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
संस्कृत सिद्धान्त/मुख्य takeaway
1) पूजा की व्यवस्था और व्यक्तिगत योगदान दोनों का संतुलन आवश्यक है; 2) समुदायिक समारोहों के साथ व्यक्तिगत प्रतिबद्धता भी जरूरी है; 3) 하나님 के पवित्र पर्वों की मान्यता संस्कृति के निरंतर धार्मिक जीवन को मजबूत बनाती है।
सूत्र-धावन (Commentary sources)
यहाँ प्रयुक्त विश्लेषण मौलिक रूप से इस्लाह-आधारित सार्वजनिक-डायरेक्ट commentary से प्रेरणा के साथ है। यदा-कदा Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संरेखित विचार से संक्षिप्त-उद्धरणों का उल्लेख किया गया है; पूर्ण ग्रंथ के उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं।
टिप्पणी के लिए एक संक्षिप्त उद्धरण (यदि उपलब्ध हो)
“निकटतम समय में सार्वजनिक पूजा का पुनरुद्धार, व्यक्तिगत विद्वत्त्व और श्रद्धा के साथ मिलकर, समुदाय के धार्मिक जीवन को पुनर्जीवित करता है।”
निष्कर्ष
एज्रा 3:5 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की आराधना केवल पवित्र स्थलों के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में भी धार्मिक-निष्ठा की भावना को बनाए रखना आवश्यक है।