Old Testament
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एज्रा 5:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब हाग्गै नामक नबी और इद्दो का पोता जकर्याह यहूदा और यरूशलेम के यहूदियों से नबूवत करने लगे, उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर के नाम से उनसे नबूवत की।
एज्रा 5:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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हाग्गै 1:1 (HINIRV) »
दारा राजा के राज्य के दूसरे वर्ष के छठवें महीने के पहले दिन, यहोवा का यह वचन, हाग्गै भविष्यद्वक्ता के द्वारा, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल के पास, जो यहूदा का अधिपति था, और यहोसादाक के पुत्र यहोशू महायाजक के पास पहुँचा

जकर्याह 4:6 (HINIRV) »
तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, “जरुब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है: न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।

मीका 5:4 (HINIRV) »
और वह खड़ा होकर* यहोवा की दी हुई शक्ति से, और अपने परमेश्वर यहोवा के नाम के प्रताप से, उनकी चरवाही करेगा। और वे सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि अब वह पृथ्वी की छोर तक महान ठहरेगा।
एज्रा 5:1 पर हिन्दी टिप्पणी — संदर्भ और संदेश
यह पद समझाता है कि अब से कुछ समय पहले बंधन-युग के बाद यहूदियों के復वास के समय देवदर्शनों ने नबूवत फिर शुरू की। हाग्गै के नबी और इद्दो का पोता जकर्याह ने यहूदियों तक परमेश्वर के नाम से संदेश पहुँचाया, ताकि वे परमेश्वर के इच्छा के अनुसार नये प्रयत्नों और निर्माण-कार्य को पुनः आगे बढ़ाएं। नबूवत की यह पुनः आरम्भकीय घटना स्पष्ट करती है कि परमेश्वर का आत्मा, इतिहास के बड़े बदलावों के बीच भी, अपने लोगों के बीच सक्रिय रहता है और उनके ईश्वर-पर-विश्वास को पुनः केंद्रित करता है।
मुख्य विचार
1) प्रेरणा का जागरण: नबवती की शुरूआत यह संकेत है कि परमेश्वर अपनी योजना को आगे बढ़ाने के लिए चुने हुए लोगों को हirezित करता है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
2) परमेश्वर के नाम का उद्घोष: मसीह-तत्व के अनुसारenges, यहूदियों को ईश्वर के नाम से पुकारना और उनकी भव्यता को स्वीकारना आवश्यक है; नबियों के माध्यम से यह संदेश उनके जीवन का आधार बनता है।
3) पुनरुद्धार की दिशा: प्रवर्तन-आगमन के समय, नबूवत से लोगों को बुलावा मिलता है कि वे मंदिर-कार्य और आध्यात्मिक पुनर्निर्माण की ओर लौटें, ताकि उनका समाज ईश्वर के साथ सुसंगत बना रहे।
कुंजी थीम्स
संबद्ध पारायाय/आइडिया
• एज़रा-हाग्गै-ज़कर्याह से संबंधित अन्य संदर्भ बताते हैं कि लौटे हुए लोग कैसे परमेश्वर की योजना के अनुरूप मंदिर निर्माण और धार्मिक-जीवन को पुनः स्थापित करते हैं।
• अन्य नबीगण जैसे तेहल, अग्गे तथा इजक्येल के क्रमानुसार, परमेश्वर का उद्देश्य समुदाय के आध्यात्मिक पुनर्स्थापना और नैतिक uprightness को बढ़ावा देना रहा है।
संकेतित पाठ्यांश यह दर्शाता है कि नबूवत एक उपकरण है, जो लोगों को उत्साह देता है और उनके धार्मिक दायित्वों की री-स्थापना करवाता है।
व्यावहारिक चिंतन
- अपने नज़दीकी समुदाय में परमेश्वर के नाम को मान्यता दें: शब्द-बद्ध पुकार के साथ जीवन का आचरण दिखाएं।
- कठिन समय में भी ईश्वर-पराक्रम पर भरोसा रखें और अपने आध्यात्मिक दायित्वों की पुनः-स्थापना करें।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
1) हाग्गै 1:1-15 — मंदिर निर्माण के पुनः आरम्भ का उद्घोष; यह स्पष्ट करता है कि समुदाय को किस प्रकार प्रेरित किया गया ताकि देव-कार्य फिर से चालित हो।
2) एज्रा 3:1-3 — लौटी हुई भीड़ ने शिथिल मंदिर-कार्य को दोबारा शुरू किया; यहाँ भी “यहोवा के नाम से” संदेश प्रमुख था।
3) दानियेल 9:2-3 — आध्यात्मिक पुनःस्थापना और प्रार्थना-आडंबर से परे, वास्तविक प्रत्यक्ष परिवर्तन का आह्वान मिलता है।
छोटा निष्कर्ष
एज्रा 5:1 यह दृढ़ता से बताता है कि परमेश्वर द्वारा चुने गए नबी और प्रधान-वंशज अपने जनसमुदाय के भीतर संदेश लेकर आए—ताकि वे लौटे हुए समय में विश्वास और सेवा के पुनर्निर्माण की दिशा तय करें। यह संदेश आज भी यहूदियों के लिए ही नहीं, प्रेरित-विश्व के लिए भी एक प्रेरणा है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ सक्रिय है और वह प्रेरणा से उनके कार्यों को दिशा देता है।
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