Old Testament
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एज्रा 5:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब यदि राजा को अच्छा लगे तो बाबेल के राजभण्डार में इस बात की खोज की जाए, कि राजा कुस्रू ने सचमुच परमेश्वर के भवन के जो यरूशलेम में है बनवाने की आज्ञा दी थी, या नहीं। तब राजा इस विषय में अपनी इच्छा हमको बताए।”
एज्रा 5:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 4:15 (HINIRV) »
तेरे पुरखाओं के इतिहास की पुस्तक में खोज की जाए; तब इतिहास की पुस्तक में तू यह पाकर जान लेगा कि वह नगर बलवा करनेवाला और राजाओं और प्रान्तों की हानि करनेवाला है, और प्राचीनकाल से उसमें बलवा मचता आया है। इसी कारण वह नगर नष्ट भी किया गया था।

एज्रा 6:1 (HINIRV) »
तब राजा दारा की आज्ञा से बाबेल के पुस्तकालय में जहाँ खजाना भी रहता था, खोज की गई।

एज्रा 4:19 (HINIRV) »
और मेरी आज्ञा से खोज किये जाने पर जान पड़ा है, कि वह नगर प्राचीनकाल से राजाओं के विरुद्ध सिर उठाता आया है और उसमें दंगा और बलवा होता आया है।
एज्रा 5:17 — संदिग्ध प्रकरण और आध्यात्मिक पाठ
यह चरण यह दर्शाता है कि परमेश्वर का भवन बनवाने के बारे में यरूशलेम के पितरों के निर्णय और उसके विरोध में प्रचलित सत्ता-व्यवस्था के भीतर एक नया निगाह-परिवर्तन आया। राजा की अनुमति पर बाबा/कुव्यवस्था से पूछताछ की जाती है कि क्या परमेश्वर के भवन के निर्माण का उल्लेख सच था या नहीं। यह पाठ हमें एहसास दिलाता है कि परमेश्वर के कार्यों की पुष्टि earthly rulers से भी संभव है, और उसकी सच्ची राह जानने के लिए अपराध-निरपेक्ष विवेक और राजकिय स्वीकृति आवश्यक है।
पद का पाठ और अध्याय के संदर्भ
एज्रा 5:17 कहता है: “अब यदि राजा को अच्छा लगे तो बाबेल के राजभण्डार में इस बात की खोज की जाए, कि राजा कुस्रू ने सचमुच परमेश्वर के भवन के जो यरूशलेम में है बनवाने की आज्ञा दी थी, या नहीं। तब राजा इस विषय में अपनी इच्छा हमको बताए।” यह वाक्य है एक प्रशासनिक जाँच और सत्यापन की मांग जो था ताकि यह स्पष्ट हो कि स्थापन होने वाले धार्मिक-निर्माण का आधार किस प्रकार का था—राजाओं की नीतियाँ या परमेश्वर की उद्घोषणा।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) सत्यापन की आवश्यकता: परमेश्वर के कार्यों की प्रमाणिकता बाहरी राजनीतिक निर्णय पर निर्भर नहीं रहती; फिर भी संसारिक सत्ता उनकी पुष्टि कर सकती है। 2) प्रेरक अनुमति: राजाओं की सहमति से भी सत्य और शुद्धता की जाँच आवश्यक होती है ताकि विश्वास समुदाय को चिंता-रहित राह मिल सके। 3) नेतृत्व का उत्तरदायित्व: अधिकारी और धर्म-नेता मिलकर यह सुनिश्चित करें कि निर्माण परमेश्वर की महिमा में हो, न कि केवल सामर्थ्य या सत्ता के लिए।
पवित्र-लेखन के समान अनुभागों की तुलना
– हनूाकह के समय restored temple के पीछे परमेश्वर की मंजूरी का महत्व—उत्तेजक जांच और सार्वजनिक स्वीकृति का संयोजन।
– दानियों के समय परमेश्वर के भवन के लिए शुद्ध और सही तैयारी पर जोर।
– नीतियों की पारदर्शिता और समुदायिक मान्यता का अहम् स्थान।
हमारी हृदय-उपयोगिता (आसक्ती-व्यवहार)
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनका संक्षिप्त अर्थ
1) नीतिवचनात्मक पथ: परमेश्वर के भवन के उद्देश्य में सत्य और पवित्रता की पुष्टि आवश्यक है; दूसरों के विचार से नहीं, पर उनके अनुरोध से भी सत्यापन चाहिए।
2) धर्म-नेतृत्व की पारदर्शिता: जैसे पुराने समय में ईश्वर के योजना के पीछे प्रशासनिक सत्यता ज़रूरी थी, वैसे ही आज भी समुदाय-निर्माण में साफ़-स्वच्छ प्रक्रियाओं का महत्व है।
3) आस्था और इतिहास का समन्वय: परमेश्वर की योजना के अनुसार बनवाने की इच्छा, और उसे जनता के सामने स्पष्ट करना—ये दोंनो मिलकर विश्वास की स्थिरता दिखाते हैं।
हिंदी पठन के लिए चयनित उपयुक्त उद्धरण
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व्यावहारिक अनुप्रयोग
- जब भी धार्मिक-निर्माण का विचार सामने आये, तो यह सुनिश्चित करें कि यह परमेश्वर की महिमा और पवित्रता पर आधारित हो।
- राजनीतिक अभिरुचियाँ और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ मार्गदर्शक बन सकती हैं, पर सत्य का आकलन सर्वोपरि होना चाहिए।
संक्षेप
एज्रा 5:17 इस बात को रेखांकित करता है कि ईश्वर के भवन निर्माण के विरुद्ध या समर्थक निर्णयों को देखने के लिए पृथ्वी के शासकों की भूमिका भी है, पर सुरक्षा और विश्वास की कसौटी परमेश्वर की इच्छा है। सत्य की खोज, पारदर्शिता, और समुदाय के लिए स्पष्टता—ये तीनों इस पद से निकली चेतावनी और प्रेरणा हैं।